बच्चों के रियलिटी शो पर क्यों लगना चाहिए प्रतिबंध

रियलिटी शो जहां लोगो का मनोरंजन करते है वहीं इसके दुष्प्रभाव भी हैं...

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रियलिटी शो, एक प्लास्टिक के डिब्बे में किसी बने बनाए सेट से आने वाला कार्यक्रम। जिसमें सब कुछ प्लान्ड रहता है। रियलिटी शो का अपना ही अलग क्रेज है लोगों के बीच में। टेलीविजन चैनलों में विस्तार होने के साथ प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की विषयवस्तु में भी कई तरह के प्रयोग किए गए हैं। रियलिटी शो उन प्रयोगो में से एक है। लेकिन आज के समय में जहां रियलिटी शो लोगो का मनोरंजन करते है वहीं इसके दुष्प्रभाव भी हैं। 

साभार: यूट्यूब
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नकारात्मक पहलुओं में से दो सबसे बड़े पहलू हैं, आत्मसम्मान में बदलाव और वास्तविक दुनिया में क्या महत्वपूर्ण है उसपर से फोकस की कमी होना। दुनिया भर के किसी भी देश में मनोरंजन पाने का एक माध्यम टीवी है। अगर इस माध्यम से कुछ शिक्षा मिलती है तो इससे समाज को एक नई दिशा मिलती है। लेकिन आजकल दिखाए जाने वाले रियलिटी शो का नकारात्मक प्रभाव समाज पर पड़ रहा है।

बोस्टन विश्वविद्यालय में संचार के सहायक प्रोफेसर डॉ सैय-वोगेल ने किशोरावस्था पर रियलिटी टीवी के प्रभाव पर शोध किया और पुष्टि की कि 'तथ्य और कल्पना के बीच का विभाजन धुंधला है। उसको विभाज्य कर पाना मुश्किल हो सकता है। इसका मतलब यह है कि अधिक से अधिक रियलिटी शो देखने वाले किशोर वो वास्तविक दुनिया की सच्चाई को समझना भूल सकते है। वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है, इसकी पहचान नहीं कर पाते।'

रियलिटी शो, एक प्लास्टिक के डिब्बे में किसी बने बनाए सेट से आने वाला कार्यक्रम। जिसमें सब कुछ प्लान्ड रहता है। रियलिटी शो का अपना ही अलग क्रेज है लोगों के बीच में। टेलीविजन चैनलों में विस्तार होने के साथ प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की विषयवस्तु में भी कई तरह के प्रयोग किए गए हैं। रियलिटी शो उन प्रयोगो में से एक है। लेकिन आज के समय में जहां रियलिटी शो लोगो का मनोरंजन करते है वहीं इसके दुष्प्रभाव भी हैं। दुनिया भर के किसी भी देश में मनोरंजन पाने का एक माध्यम टीवी है। अगर इस माध्यम से कुछ शिक्षा मिलती है तो इससे समाज को एक नई दिशा मिलती है। लेकिन आजकल दिखाए जाने वाले रियलिटी शो का नकारात्मक प्रभाव समाज पर पड़ रहा है। हम यहां बच्चो के रियलिटी शो के बारे में बात कर रहे है। आज के समय में बच्चो के बहुत सारे थीम्ड रियलिटी शो है जैसे सिंगिंग, डॉनसिंग, एक्टिंग और किसी तरह का गेम खेलना। इससे कोई भी वर्ग छूटा नहीं है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर दिखता है। टीवी और रियलिटी शो आजकल एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं।

रियलिटी शो को बच्चों पर पड़ रहे दबाव को ध्यान में रखना चाहिए और उसी तरह की तैयारी करनी चाहिए ताकि बच्चों पर ज्यादा दबाव ना पड़े और बच्चे रियलिटी शो में दबाव झेलने की बजाय इसे अपने कैरियर के प्लेटफॉर्म की तरह उपयोग करें। तनाव का जीवन बड़ों के लिए होता है, कम से कम बच्चों को उनके बचपने को जीने देना चाहिए। रियलिटी शो बच्चों को प्रतिस्पर्धी होना सिखाता है नाकि सहयोग के महत्व के बारे में बताता है। प्रतिस्पर्धात्मक भावना यह महसूस कराती है कि विजेता होना ही अंतिम लक्ष्य है।

रियलिटी शो टेलीविजन दुनिया के साल 2000 के प्रारंभ में फैल गया। लगभग हर चैनल पर रियलिटी शो देखने को मिलता है। हमारे समाज में रियलिटी टीवी अभी भी आज की सबसे लोकप्रिय शैली बना हुआ है। कुछ टीवी शो, जो कि रियलिटी टीवी के तहत वर्गीकृत किए जाते हैं वो बच्चो के बीच में तेजी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं। हम देखते हैं कि अधिक से अधिक बच्चे रियलिटी शो देखने के लिए टीवी से चिपके रहते हैं और उसे एक आदत बना लेते हैं जिससे उन पर नकारात्मक तरीकों से प्रभावित होने की अधिक संभावना बढ़ जाती है। नकारात्मक पहलुओं में से दो सबसे बड़े पहलू हैं, आत्मसम्मान में बदलाव और वास्तविक दुनिया में क्या महत्वपूर्ण है उसपर से फोकस की कमी होना। दुनिया भर के किसी भी देश में मनोरंजन पाने का एक माध्यम टीवी है। अगर इस माध्यम से कुछ शिक्षा मिलती है तो इससे समाज को एक नई दिशा मिलती है। लेकिन आजकल दिखाए जाने वाले रियलिटी शो का नकारात्मक प्रभाव समाज पर पड़ रहा है।

दबाव झेलने की उम्र नहीं बचपन

रियलिटी शो इतने व्यापक रूप में रहते हैं तो किशोरों के लिए अलग-अलग शो के लिए पागल होना साधारण सी बात हो जाती है। औसतन एक सप्ताह में एक बच्चा टेलीविजन पर 28 घंटे बिताता है। अगर हम एक वर्ष के अंतराल पर नजर डालें तो लगभग 15,000 घंटे एक वर्ष में बिताता है जो कि उसके स्कूल जाने के औसत से भी ज्यादा है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि चमक धमक से सबसे ज्यादा बच्चे आकर्षित है तो संभावना बढ़ जाती है की वो रियलिटी शो पर दिखाए जाने वाली आदतों को चुन लें। बच्चों को लगता है कि रियलिटी शो को उत्थान और प्रेरणादायक के रूप में देखा जा सकता है, उनको ऐसा लगता है कि वो भी एक दिन फेमस हो सकते है, उनका जीवन भी उन लोगों की तरह हो सकता है जिन्हें वो टेलीविजन पर देखते हैं। मनोचिकित्सक और स्कूल सलाहकार डॉ आइयर, रियलिटी टीवी की वास्तविकता के बारे में कहते हैं कि रियलिटी टीवी हमारी संस्कृति में एक बड़ा बदलाव लाती है। जहां बच्चों का कहना है कि सबसे ज्यादा प्रसिद्धि फेम पाना है लेकिन ये समझना जरूरी है कि फेम उनके जीवन में एकमात्र पहलू नही है। दरअसल सच्चाई तो ये है कि किशोर बहुत सारी आदतें टेलीविजन के रियलिटी शो से ही सीखते हैं। 

समय के साथ रियलिटी टीवी का ग्लैमरमय प्रदर्शन वास्तविक दुनिया के किशोरों के विचारों पर प्रभाव डाल सकता है। बोस्टन विश्वविद्यालय में संचार के सहायक प्रोफेसर डॉ सैय-वोगेल ने किशोरावस्था पर रियलिटी टीवी के प्रभाव पर शोध किया और पुष्टि की कि 'तथ्य और कल्पना के बीच का विभाजन धुंधला है। उसको विभाज्य कर पाना मुश्किल हो सकता है। इसका मतलब यह है कि अधिक से अधिक रियलिटी शो देखने वाले किशोर वो वास्तविक दुनिया की सच्चाई को समझना भूल सकते है। वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है, इसकी पहचान नहीं कर पाते।'

बच्चों के दिमाग का प्रेशर कुकर

जब युवा और बच्चे आकर्षक और खूबसूरत सेलिब्रिटी लोगों को टीवी पर देखते हैं तो वे खुद की उन लोगों के साथ तुलना करना शुरू करते हैं। रियलिटी शो उन्हें ये महसूस कराता है कि वो तब तक सुंदर नहीं हैं जब तक कि वो लोग और हस्तियां जैसे टेलीविजन पर दिखाई न दें। इन अपेक्षाओं की वजह से, किशोरावस्था में ये बात ज्यादा बढ़ने की संभावना होती है की वो अपना आत्मसम्मान कम आंकने लगते हैं या खो देते हैं। माता-पिता अपने बच्चों पर तरह तरह से ध्यान दे सकते हैं और देते भी हैं एसे कई तरीके हैं जिससे माता पिता ध्यान देते हैं। ऐसा करके वे अपने बच्चों को रियलिटी शो से होने वाले नकारात्मक प्रभाव पड़ने से रोक सकते हैं। अधिकांश अभिभावक अपने बच्चो के लिए दिशानिर्देश तैयार करते हैं जो कि एक अच्छा कदम है।

एक सचमुच महत्वपूर्ण तरीका ये है कि अपने बच्चों के साथ बैठकर टीवी देखने का समय दें। न केवल यह आपके बच्चे के साथ एक बांड पैदा करता है, लेकिन आप टीवी पर भी निगरानी रख सकते हैं कि उनके बच्चे क्या देख रहे हैं। माता पिता मानते हैं कि ज्यादातर रियलिटी शो बच्चो से गायन और नृत्य कराके अपने टीआरपी के लिए बच्चों के सीधेपन का फायदा उठाते हैं। और उनके मन में भ्रम पैदा करते है जिससे उनके मन पर ये दबाव आ जाता है कि उन्हें किसी भी हाल में अच्छा करना है। जब ऐसा नहीं हो पाता है तो उनको मानिसक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 

माता पिता अपने बच्चो को लेकर हमेशा संजीदा रहते है उनके अच्छे और बुरे का ख्याल रखते हैं, बच्चे क्या कर रहे क्या नहीं सब पर नजर रहती है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए कई बच्चों के माता- पिता बच्चों के रियलिटी शो को बंद करने के पक्ष में हैं। पहले भी कई लोगो ने इसका विरोध किया है, पहले भी कई बार इस पर सवाल उठाया जा चुका है कि बच्चों से जुड़े रियलिटी शो बंद होने चाहिए क्योंकि इससे बच्चों पर बहुत कम उम्र में मानसिक दवाब पड़ता है। इसपर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

यहां पर देखें, कैसे आज के मशहूर सिंगर अरिजीत सिंह पर एक रियलिटी शो का कितना मानसिक दबाव पड़ा था-

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