कैब बुकिंग का नया रास्ता, 'Rutogo' ने दिखाई मंज़िल

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क्या आप वीकेंड पर रोड ट्रिप की योजना बना रहे हैं मगर बेस्ट कैब ऑपरेटर पाने में मुश्किल आ रही है? रुटोगो ये सुनिश्चित करता है कि आपके पास अपने लोकेलिटी में उपलब्ध बेस्ट बैक ऑपरेटर्स की लिस्ट से तुलना करने और चुनाव करने का विकल्प मौजूद रहे। रुटोगो के को-फाउंडर वीनस धुरिया के मुताबिक लोगों में सबसे किफायती कैब सर्विस ढूढ़ने के बारे में कन्फ्यूजन है। इसके अलावा एवेलेबिलिटी चेक करने के लिए अक्स बहुत सारे वेंडर्स को चेक करना पड़ता है।

वीनस कहते हैं कि रुटोगो इसलिए इस क्षेत्र में आया है क्योंकि यहां कोई भी उचित कम्यूनिकेशन चैनल नहीं है। “ रुटोगो एक मार्केटप्लेस के रुप में काम करता है जहां एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी लोकल टूअर एंड ट्रेवल ऑपरेटर जुड़े हुए हैं और जहां से कस्टमर कीमत, एवेलेबिलिटी और ऑपरेटर की रेटिंग के आधार पर किसी ऑपरेटर को चुन सकते हैं।”

Rutogo का आइडिया इसके को-फाउंडर अनीश रायचंदा को उस समय आया जब वह जर्मनी में इंटर्नशिप कर रहे थे। इंटर्नशिप के दौरान अनीश ने mitfahrgelegenheit.de. जैसे कई इंटरसिटी राइड-शेयरिंग सर्विसेज का इस्तेमाल किया। तभी उनके मन में भारत में भी कुछ इसी तरह की सर्विस स्टार्ट करने का विचार आया। मगर वह आइडिया पर आगे काम नहीं कर सके क्योंकि उन्हें वहां कोई भी लाइक-माइंडेड व्यक्ति नहीं मिला जिसका विज़न उनसे मिलता-जुलता हो।

जब उन्होंने रेकिट्ट बेनकिसर को ज्वॉइन किया तो उनकी वीनस से मुलाकात हुआ। दोनों ने महसूस किया कि उनके विचार काफी हद तक एक दूसरे से मिलते हैं। जल्द ही उन्होंने रिसर्च करना शुरू किया और आइडिया को जमीनी धरातल पर उतारने का फैसला किया। इंटरसिटी राइडशेयरिंग आइडिया की जगह उन्होंने कैब्स पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। दोनों ने पाया कि भारत में इंटरसिटी ट्रेवल के लिए कैब बुक करना किसी सिरदर्द से कम नहीं है।

वीनस कहते हैं- “लोग इंटरसिटी कैब सर्विस के लिए ओल्ड-स्कूल बुकिंग तरीके का इस्तेमाल करते हैं जिसमें कई सारे वेंडर्स को फोन करना और उनकी प्राइस और एवेलेबिलिटी को जांचना शामिल है। इसलिए हमने सभी टूर एंड ट्रेवल ऑपरेटर्स को तकनीक के जरिये एक सिंगल प्लेटफॉर्म से कनेक्ट करने के आइडिया पर काम करना शुरू किया ताकि कस्टमर उस प्लेटफॉर्म से एवेलेबिलिटी, प्राइस और रेटिंग के आधार पर कैब बुक कर सकें।”

अपनी बचत को निवेश करके दोनों ने इनिशियल टेक डेवलपमेंट पर काम करना शुरू किया। एक बार जब प्रोडक्ट विकसित हो गया तब उन्हें अपने सीनियर कलीग्स, फैमिली और फ्रेंड्स से भी पूंजी मिलने में मदद मिलने लगी।वीनस बताते हैं- “ अब हमारे पास 13 सदस्यों की टीम है जिसमें ऑपरेशंस, टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में 8 इंटर्न भी शामिल हैं।” डिजिटल मार्केटिंग के अलावा टीम ने कॉर्पोरेट और ट्रेवल एजेंट्स से भी पार्टनरशिप की है।

चुनौतियां

शुरुआती आइडिया को व्यवहार में लाना एक बड़ी चुनौती थी। टीम की सबसे बड़ी चिंता प्लेटफॉर्म के लिए जरूरी तकनीक कौ तैयार करना था। टीम ने शुरुआत में जयपुर की एक सॉफ्टवेयर सोल्यूशंस कंपनी से काम आउटसोर्स किया, मगर काम योजना की मुताबिक नहीं हुआ।

महीनों की देरी के बाद, कंपनी को बंद होना पड़ा और ये जिम्मेदारी वीनस और अनीश के कंधों पर आ गई। जल्द ही उन्हें दिल्ली में एक और कंपनी को तलाशा और उन्हें 4 महीने बाद अपना मिनिमम वैल्यू प्रोडक्ट मिला। अब अगली चुनौती थी लोकल कैब ऑपरेटर्स को प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के लिए कनविंस करना। वीनस बताते हैं- “ज्यादातर ऑफलाइन बुकिंग मोड के आदी थे और उन्हें ऑनलाइन बुकिंग के लिए तैयार करना बहुत चुनौतीपूर्ण काम था।”

ऑपरेशंस और ट्रैक्शन

दोनों ने अपने ऑपरेशंस को मई में फोन कॉल्स के जरिये शुरू किया ताकि ऑफलाइन मार्केट में पहुंचा जा सके। बाद में उन्होंने अपना एंड्रॉयड ऐप रिलीज किया। तबसे लेकर अब तक कंपनी का ऐप 2500 बार डाउनलोड हो चुका है। आज की तारीख में वह औसतन 5 हजार रुपये के टिकट साइज के 300 बुकिंग्स कर चुके हैं। वीनस बताते हैं- “किसी अच्छे दिन तो हम करीब 12 बुकिंग्स कर लेते हैं जबकि ये आम तौर पर 8-10 होता है। हमारा ग्रोथ शानदार रहा है। पिछले दो महीनों से ज्यादा वक्त से हमने प्रति महीने 250 फीसदी की दर से विकास किया है।”Rutogo अपने टोटल बुकिंग अमाउंट पर फ्लैट कमिशन चार्ज करता है।

मार्केटफ्लेस मॉडल के जरिये काम करने की वजह से प्राइसिंग कैब्स की एवेलेबिलिटी पर निर्भर होता है। उसके बाद यूजर प्राइसिंग के आधार पर उपलब्ध विकल्पों में से किसी को चुनता है। वीनस आगे बताते हैं- “इसके बाद आप किसी विशेष प्राइस रेंज और डिमांड के मुताबिक उस समय उपलब्ध सबसे किफायती ऑप्शन का चुनाव करते हैं। इस तरह से कस्टमर बिलिंग अमाउंट पर 2000 रुपये तक की बचत कर सकता है। ये दूसरे प्लेयर्स से अलग है जो कैब को फिक्स्ड प्राइस पर ऑफर करते हैं जो आम तौर पर लोकल वेंडर की प्राइस से काफी ज्यादा होता है।”

वह कहते हैं कि उनकी टीम अपने प्लेटफॉर्म को ऑप्टिमाइज करने पर काम कर रही है ताकि लोग सिर्फ वन वे कैब बुक करा सकें और सिर्फ एक तरफ का ही किराया अदा करें। आमतौर पर दूसरे वेंडर्स आपकी बुकिंग पर टू-वे चार्ज करते हैं भले ही आपको वापस आना हो या नहीं। प्लेटफॉर्म पर दिल्ली-एनसीआर में करीब 32 अलग-अलग रूट्स हैं जहां से आप वन वे कैब बुक कर सकते हैं। इसके अलावा Rutogo लोकल सिटी टूअर्स के लिए घंटे के हिसाब से रेंट वाले कैब भी ऑफर करती है।

Rutogo फिलहाल दिल्ली-एनसीआर और चंडीगढ़ में काम कर रही है। अगले दो महीनों में उनकी योजना उत्तर भारत के सभी बड़े शहरों में पहुंचने की है। इसके अलावा वह इंटरसिटी कैब राइड शेयरिंग पर काम करना चाहते हैं जो एक ऑल्टरनेट मोड ऑफ ट्रांसपोर्ट के तौर पर काम करेगा।

मार्केट

भारतीय रेडियो टैक्सी मार्केट करीब-9 अरब डॉलर के आस-पास है और इसके सालाना 17-20 फीसदी के दर से विकास का अनुमान है। यहां ये बात काफी अहम है कि इस मार्केट का सिर्फ 4-6 फीसदी हिस्सा ही संगठित है- बाकि हिस्सा उन ऑपरेटर्स का है जो 2-50 कारों के बेड़े के साथ काम करते हैं और मुख्य तौर पर किसी एक शहर में ही उनकी मौजूदगी है।

हालांकि मार्केट में ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं मगर साथ ही में इस बात के भी आसार हैं कि किसी भी समय यहां भी अमेजॉन-फ्लिपकार्ट टाइप प्राइस वार छिड़ सकता है। 10 से 15 हजार की फ्लीट साइज वाले कम से कम 8 से 10 बड़े प्लेयर्स अगले 18-24 महीनों में अपनी पोजिशन को मजबूत करने की आक्रामक कोशिश करेंगे।