युद्ध को साक्षात देख पाने की इंसानी रुचि का प्रतिफल हैं ये वॉर फिल्में

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युद्ध पर बनी फिल्में हमेशा से बॉलीवुड के मुख्यधारा दर्शकों की एक खास पसंद रही है। इन फिल्मों का भारतीयों पर न केवल सामाजिक बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से गहरा प्रभाव पड़ता है। स्वाभाविक रूप से बॉलीवुड ने युद्ध पर आधारित फिल्मों को सिल्वर स्क्रीन पर दर्शाने की कोशिश की है जिसमें से कुछ के कथानक अच्छे हैं, कुछ बुरे हैं, और कुछ बहुत ही शानदार हैं। 

फिल्म गाजी अटैक का एक पोस्टर
फिल्म गाजी अटैक का एक पोस्टर
गाजी अटैक एक शानदार फिल्म और लीक से हटकर भारतीय नौसेना पर केंद्रित है। 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, पाकिस्तान के नौसेना की पनडुब्बी पीएनएस गाजी के रहस्यमय डूबने पर आधारित है। के के मेन मेनन, राणा डुग्गूबती और तापसी पन्नू के मुख्य किरदार में होने के बावजूद यह फिल्मबॉक्स ऑफिस पर नहीं चली लेकिन क्रिटिक ने तीनो किरदारों के अभिनय की सराहना की।

चाहे फिल्में हो या इंडिया बनाम पाकिस्तान क्रिकेट मैच, विचार करके देखा जाए तो हमारे पहले भी बहुत सारे युद्ध पड़ोसी देशों से हुए है जिनकी छाप आज भी हमारे देश की आत्मा पर अमिट रूप से पड़ी हुई है।

युद्ध पर बनी फिल्में हमेशा से बॉलीवुड के मुख्यधारा दर्शकों की एक खास पसंद रही है। चाहे फिल्में हो या इंडिया बनाम पाकिस्तान क्रिकेट मैच, विचार करके देखा जाए तो हमारे पहले भी बहुत सारे युद्ध पड़ोसी देशों से हुए है जिनकी छाप आज भी हमारे देश की आत्मा पर अमिट रूप से पड़ी हुई है। इन फिल्मों का भारतीयों पर न केवल सामाजिक बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से गहरा प्रभाव पड़ता है। स्वाभाविक रूप से बॉलीवुड ने युद्ध पर आधारित फिल्मों को सिल्वर स्क्रीन पर दर्शाने की कोशिश की है जिसमें से कुछ के कथानक अच्छे हैं, कुछ बुरे हैं, और कुछ बहुत ही शानदार हैं। आज हम आपके लिए 21वीं सदी में पर्दे पर अवतरित हुईं युद्ध पर आधारित सर्वश्रेष्ठ बॉलीवुड फिल्मों की सूची पेश कर रहे हैं।

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों (2004)

काल्पनिक आतंकवादी हमले के आधार पर एक फिल्म को बॉलीवुड में दर्शाया गया जिसका नाम ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और बॉबी देओल मुख्य भूमिका निभाई है। यह फिल्म प्रसिद्ध अमरनाथ मंदिर पर काल्पनिक आतंकवादी हमले के आधारित है। इस फिल्म की छोटी छोटी कड़ियां है जिसका मुख्या सार यह है की कैसे कैसे आतंकवादी धार्मिक स्थलों को अपना निशाना बनाते है। भारतीय सेना के एक अधिकारी मेजर राजीव सिंह (अक्षय कुमार) जो अपनी नवविवाहित पत्नी श्वेता सिंह (दिव्य खोसला) को छोड़कर जाता है। जो देश की सुरक्षा करते वक़्त गायब हो जाता है। भारतीय सेना के दिग्गज के पोते कप्तान कुणाल (बॉबी देओल) जो श्वेता के प्रेम में पड़ जाते हैं और देश के प्रति अपने कर्त्तव्य को भी पीछे छोड़ देते हैं। यह फिल्म मनोरंजन के एक पूर्ण पैकेज है जिसमे एक निराश दादाजी, प्यार की कहानियों का चयन और देश की राजनितिक अशांति पैदा करने के लिए एक साज़िश करते है।

दीवार (2004)

इस फिल्म की कहानी यह नहीं है कि युद्ध क्या होता है बल्कि यह है की इसका अंजाम क्या होता है। 1971 के युद्ध के दौरान, भारतीय सैनिकों को पाकिस्तान की जेल में कैद किया गया था। मेजर रणवीर कौल (अमिताभ बच्चन) और उनके 30 कैदी साथी हर दिन जेलर सोहेल (के के मेनन) का सामना करते हैं जो इन सबकों जीवित रखने के लिए पाकिस्तान सरकार की निंदा करते रहते है। मेजर के पुत्र गौरव (अक्षय खन्ना) के रूप में आती है जो उन्हें गुप्त रूप से जेल से बाहर निकालने की योजना के बारे में सूचित करता है। शानदार तरीके से जेल तोड़ने का प्लान और साथ-साथ सामान रूप से यह है मनोरंजक फिल्म है। यह एक अलग तरह की फिल्म है जिसमे युद्ध के अनकहे प्रभाव पर दर्शकों का ध्यान केन्द्रित किया है।

टैंगो चार्ली (2005)

सशस्त्र बलों के एक दल पर ध्यान देने की बजाय, टैंगो चार्ली एक सैनिक तरुण चौहान (बॉबी देओल) की कहानी है जो देश भर के चार अलग-अलग युद्धक्षेत्रों पर तैनात रहता है। बॉलीवुड की हर दूसरी फिल्मों की तरह से केवल भारत-पाकिस्तान सीमा पर आधारित न होकर, यह देश में हो रहे अन्य लड़ाइयों के बारे में बताती है। पाकिस्तान की सीमा के साथ-साथ, तरुण को आंध्र प्रदेश में नक्सलियों की बीच तैनात किया गया है , गुजरात में हिंदू-मुस्लिम दंगों को संभालता है और उत्तर-पूर्व में विद्रोहियों से लड़ता है। नैतिक आतंकवाद के अलावा, भारत में ही ऐसे कई असामाजिक समूह हैं जो हमारे कानून को गलत साइड से समझ रहे है जिसके परिणाम यही होता है कि देश अन्दर से ही टूटने की साजिश रची जाती है।

वॉर छोड ना यार (2013)

भारत-पाकिस्तान मुद्दे को कॉमेडी रुख देने वाली फिल्मों में से एक है वॉर छोड ना यार। इस युद्ध की फिल्म में नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय और पाकिस्तानी सेना (शर्मन जोशी और जावेद जाफरी) के दो सैनिकों की कहानी है। फिल्म में दोनों मैं लीड एक्टर्स ने युद्ध के मुद्दे पर रौशनी डालते हुए मजाकिया चुटकुले, हास्य और स्पॉट-ऑन कॉमिक टाइमिंग का उपयोग करते है। फिल्म में यह दर्शाते हैं कि कैसे दोनों देशों के सैनिक दिन-प्रतिदिन अलग-अलग मामलों से सामान तरीके से निपटते है। और अंत में असली खलनायक यानी कि राजनेताओं और ब्यूरोक्रैट्स विश्वासघात करते है।

गाजी अटैक (2017)

भारत में युद्ध पर बनी लगभग हर फिल्म में स्पष्ट कारणों से भारतीय सेना पर केंद्रित है क्योंकि सबसे ज्यादा युद्ध में शामिल होने वाली सेना है हमारी आर्मी। यह शानदार फिल्म और लीक से हटकर भारतीय नौसेना पर केंद्रित है। 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, पाकिस्तान के नौसेना की पनडुब्बी पीएनएस गाजी के रहस्यमय डूबने पर आधारित है। के के मेन मेनन, राणा डुग्गूबती और तापसी पन्नू के मुख्य किरदार में होने के बावजूद यह फिल्मबॉक्स ऑफिस पर नहीं चली लेकिन क्रिटिक ने तीनो किरदारों के अभिनय की सराहना की।

रंगून (2017)

विशाल भारद्वाज की फिल्म 'रंगून' अपने अन्य फिल्मों से मेल नहीं खा सकता है लेकिन फिल्म की कहानी और प्रयास काफी सम्मानजनक है। अगर आप फिल्म की बारीकी और अनदेखी इतिहास के शौकीन है तो 'रंगून' आपके लिए सही फिल्म है। अरुणाचल प्रदेश के अनदेखे स्थान, डरावने बैकग्राउंड म्यूजिक और अति उत्तम छायांकन फिल्म में इस तरह से काम करते हैं जो फिल्म को प्यार, विश्वासघात और युद्ध की कहानी का समर्थन करता है। यह फिल्म विशाल भारद्वाज की सबसे महत्वाकांशी फिल्मों में से है।

एलओसी: कारगिल (2003)

1999 भारत-पाकिस्तान युद्ध की एक सच्ची तस्वीर है यह फिल्म। इस फिल्म में एक-एक बारीकी दिखाई गई है की कैसे कारगिल युद्ध हुआ, किस वजह से हुआ और कैसे कैसे युद्ध लड़ा गया। संजय दत्त, अजय देवगन, सुनील शेट्टी और सैफ अली खान समेत कई प्रसिद्ध बॉलीवुड सुपरस्टारों वर्णन करते है की जब दो राष्ट्र युद्ध में गिरते हैं तो कैसे कई छोटे छोटे परिवारों पर इसका असर पड़ता है। इस फिल्म में कप्तान विक्रम बत्रा और मनोज पांडे जैसे शहीदों की कहानी है जो अपने देश के सामने मौत से भी नहीं घबराते।

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