टीम इंडिया के इस सितारे को कभी मयस्सर था सिर्फ एक वक्त का खाना, आज हैं करोड़ों के मालिक

संघर्ष से सफलता तक... 

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कौन जाने, किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज और फर्श से अर्श पर पहुंचने के अच्छे दिन जिंदगी में शामिल हो जाएं। ऐसा ही कुछ गुजरा है प्रसिद्ध क्रिकेटर हार्दिक पटेल की जिंदगी में। किसे पता था कि आर्थिक तंगी में एक जून खाना खाकर समय बिताते अपने परिवार के बीच से जब वह कभी क्रिकेट के मैदान में उतरेंगे तो दुनिया देखती रह जाएगी। पैसे-पैसे के मोहताज वक्त से गुजरते हुए आज वह अपनी मेहनत और लगन के कारण सफलता के जिस पायदान पर खड़े हैं, अपने भाई क्रुणाल पांड्या के साथ उनके परिवार की गिनती करोड़पतियों में होने लगी है...

पिता तो क्रिकेट के दीवाने थे ही, उनसे भी एक अभिभावक के रूप में क्रुणाल और हार्दिक को भरपूर संबल मिलता गया। यह कितना दुखद रहा था कि बचपन के उन दिनों में हार्दिक तो पूरे दिन मैगी खाकर प्रैक्टिस किया करते थे।

विश्व क्रिकेट जगत में आज हार्दिक पांड्या एक जगमगाते सितारे का नाम है, लेकिन बहुतों को नहीं मालूम कि उनकी जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी गुजर चुका है, जब वह घरेलू आर्थिक वक्त में एक ही जून भोजन कर दिन काटते थे। चौबीस वर्षीय पांड्या का निकनैम हैरी है। उनका जन्म 11 अक्टबर 1993 को सूरत (गुजरात) में हिमांशु पंड्या के घर हुआ था। पिता कार फाइनेंस के छोटे-मोटे बिजनेसमैन थे। जब उनका कारोबार ठीक से नहीं चला तो यह काम उन्होंने हमेशा के लिए बंद कर दिया। उन्हें बिजनेस में लगातार नुकसान हो रहा था। उस समय हार्दिक की उम्र पांच साल थी। परिवार पर ऐसा आर्थिक संकट आया कि उन्होंने शहर ही बदल दिया।

सूरत से बड़ौदा पत्नी व दोनों पुत्रों क्रुणाल और हार्दिक के साथ सपरिवार स्थानांतरित हो गए। घर में एक एक पैसे का अभाव था। बड़ौदा में किराए के मकान में रहने लगे। सेहत भी ठीक नहीं रहती थी कि वह कोई नौकरी आदि कर पाते। उन दिनो प्रायः पूरे परिवार को एक ही वक्त खाना खाकर वक्त गुजारना पड़ता था। दिन तो बदहाली में गुजर ही रहे थे, पिता हिमांशु पांड्या को कई बार हृदयाघात लगा। जान जाते-जाते बची। हिमांशु पंड्या का भी सबसे पसंदीदा खेल क्रिकेट ही रहा, जिसका प्रभाव उन दिनो दोनों बेटों क्रुणाल पांड्या (7) और हार्दिक (5) पर पड़ा। जब पिता-पुत्र एक ही मन-मिजाज के हों तो परिवार की जिंदगी में भी उसी रंग-ढंग का घुल जाना स्वाभाविक था।

हिमांशु पांड्या ने अपने दोनों ही बेटों का बड़ौदा के किरण मोरे क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन करा दिया। जैसे-जैसे दोनो बच्चे बड़े होते गए, बाल-बल्ले पर निखरता उनका हुनर पूरे शहर को हैरत में डालने लगा। हिमांशु पांड्या अपने दोनो बेटों को अक्सर मैच दिखाने के लिए स्टेडियम ले जाया करते थे। हिमांशु पांड्या की माली हालत ठीक नहीं, यह किरण मोरे एकेडमी के कर्ताधर्ताओं को भी पता था इसलिए दोनो बेटों के प्रशिक्षण का कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। हार्दिक का पढाई-लिखाई में मन नहीं लगता था। वह नौवीं कक्षा में जब फेल हो गए तो पूरे परिवार का मन क्षोभ से भर उठा था।

इसके बाद उन्हें लगा कि शायद क्रिकेट में ही उनका बेहतर भविष्य हो सकता है और इस सोच के साथ ही उनके जीवन की दिशा बदल गई। बड़ौदा क्रिकेट गुरुओं को दोनों बाल खिलाड़ियों में भविष्य के बड़े क्रिकेटर का रंग-ढंग साफ समझ में आने लगे। उन्हें हर तरफ से प्रोत्साहन भी मिलने लगा। हार्दिक भाड़े पर अपने आसपास के आयोजनों में खेलने लगे। वह गुजरात के एक गाँव में पैसे लेकर खेलते थे हालाकि प्रतियोगिता का कोई नाम नहीं होता लेकिन ये मैच आस पास के गाँव के बीच होता था, जिसमें खेलने के लिए उनको 400 रुपए, जबकि उनके भाई क्रुणाल पांड्या को पांच सौ रुपए मिलते थे।

पिता तो क्रिकेट के दीवाने थे ही, उनसे भी एक अभिभावक के रूप में क्रुणाल और हार्दिक को भरपूर संबल मिलता गया। यह कितना दुखद रहा था कि बचपन के उन दिनों में हार्दिक तो पूरे दिन मैगी खाकर प्रैक्टिस किया करते थे। उधर पिता भोजन के पैसे बचा कर क्रिकेट किट के लिए जमा करते रहते थे। सन 2104 में जब सईद मुश्ताक अली ट्राफी में खेलने के लिए हार्दिक पांड्या के पास बल्ला नहीं था तो उनको इरफ़ान पठान ने दो बल्ले दिए। उन्होंने 57 गेंदों पर मुंबई के खिलाफ पश्चिम ज़ोन मैच में तब कुल 82 रन बना डाले थे। उसके बाद मुंबई इंडियंस के कोच जॉन राइट की नज़र हार्दिक पर पड़ी और उन्हें 10 लाख रुपये के आधार मूल्य पर आईपीएल के लिए मुंबई इंडियंस ने ख़रीदा।

वहां से उनकी जिंदगी में नाटकीय रूप से बदलाव आया और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक समय वह था, और आज एक वक्त ये है कि हार्दिक पांड्या छक्के-पर-छक्के मारने लगे हैं। वह टीम इंडिया की जान बन चुके हैं, दुनिया भर में धूम मचा रहे हैं। हार्दिक को पहला बड़ा ब्रेक मिला आईपीएल में हिट होने के बाद, जब उनका टीम इंडिया में सिलेक्शन हो गया और टीम इंडिया को भी स्टार ऑलराउंडर प्लेयर मिल गया। अब तो घर-परिवार के सारे दुर्दिन जाने कब के लापता हो चुके। हिमांशु पांड्या के दोनो बेटों पर धन की बारिश हो रही है। पांड्या परिवार की गिनती आज करोड़पतियों में होने लगी है। अब पूरा पांड्या परिवार बड़ौदा से मुंबई शिफ्ट हो चुका है। अब तो हार्दिक पांड्या को आइपीएल में खेलने पर सालाना एक करोड़ रुपए मिलते हैं। बीसीसीआई ने भी उन्हें ग्रेड-सी के प्लेयर्स में शामिल कर लिया है।

पांड्या परिवार के अच्छे दिन आने के साथ ही हार्दिक की जिंदगी ने एक चमकीली करवट ली है। जमाने की हवा लगी तो वह छिपे-छिपे आशनाई की पेंगें भी भरने लगे। बिग बॉस की एक्स कंटेस्टेंट और सलमान की पसंदीदा एलि अवराम से उनकी नजदीकियां आए दिन मीडिया की सुर्खियों में रहती हैं। दोनो कई बार साथ साथ पार्टियों में देखे गए हैं। बताते हैं कि दोनों पहली बार एक ऐड शूट के दौरान मिले ‌थे। वहीं दोनों ने अपने मोबाइल नंबर एक्सचेंज किए। ऐड शूट के बाद दोनों बाहर मिलने लगे और साथ हैंगआउट करते देखे गए। कभी मूवी तो कभी डिनट डेट पर कई बार साथ देखे गए। हाल ही में दोनों को क्रिकेटर क्रुणाल पांड्या और पंखुरी शर्मा के वेडिंग रिसेप्‍शन में देखा गया। अब तो दोनों की युगल तस्वीरें आए दिन सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी हैं। दोनों के अफेयर की सुर्खियां आम हो चुकी हैं।

पिछले दिनो भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव को लेकर हार्दिक पांड्या पर एक और वाकया सुर्खियों में रहा। मीडिया से रू-ब-रू कपिलदेव ने कहा कि कोई भी व्यक्ति मेरी तुलना हार्दिक पांड्या से न करे। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगर हार्दिक पांड्या ने सेंचुरियन टेस्ट में की गई बेवकूफी अगर भविष्य में दोहराई तो उनसे मेरी तुलना नहीं की जानी चाहिए। पंड्या इस तरह की बेवकूफी भरी गलतियां करना जारी रखते हैं तो वो मेरे साथ तुलना के हकदार नहीं हैं। गौरतलब है कि कपिल देव सेंचुरियन टेस्ट की दूसरी पारी में पंड्या के आउट होने के तरीके से खफा थे। दूसरी पारी में पांड्या लुंगी नजीडी की एक बाहर जाती हुई गेंद को स्लिप के ऊपर से मारने के चक्कर में विकेट कीपर क्विंटन डि कॉक को कैच दे बैठे थे।

उस दिन पंड्या के रन आउट होने के बाद क्रिकेट प्रेमियों के बीच जमकर आलोचना हुई थी। जिस समय युवा ऑलराउंडर हार्दिक के साथ सेंचुरियन के सुपरस्पोर्ट पार्क में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन ऐसा हुआ, वह लापरवाही और आरामतलबी से टहलते नजर आए थे। कपिलदेव ने उस लापरवाही को हार्दिक का घमंड करार दिया था। महान क्रिकेट कप्तान सुनील गावस्कर ने भी हार्दिक के अंदाज को गलत कहा था।

देश की शीर्ष क्रिकेट हस्तियों को हार्दिक की वह गलती नागवार भले गुजरी हो लेकिन उनके इस मोकाम तक पहुंचने में जिस तरह के संघर्ष का उनका इतिहास रहा है, संसाधनहीन परिवारों से आने वाले नए खिलाड़ियों के लिए वह प्रेरक माने जाते हैं। इतनी मजबूत नींव उनके जीवन में ऐसे ही नहीं पड़ गई थी। उनकी काबिलियत को सबसे पहले रिक्की पोंटिंग और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों ने पहचाना था। अब हार्दिक पांड्या अपनी बेमिसाल बॉलिंग और बैटिंग में हैरतअंगेज आक्रमकता के लिए पसंद किए जाते हैं। उन्होंने भारत के मशहूर क्रिकेटर रहे किरण मौरे से इस खेल की बारीकियां सीखी हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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