गरीब बच्चों को JEE मेंस और NIT की फ्री कोचिंग दे रहा है छत्तीसगढ़ का 'एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट'

ये ट्रस्ट 42 स्कूली बच्चों को उनके मुकाम तक पहुंचाने के लिए स्वयं के खर्चे पर प्राइवेट कोचिंग करा रही है।

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग में एक ट्रस्ट ने सरकारी स्कूल के मेधावी लेकिन गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है। बच्चों को इंजीनियर-डॉक्टर के एग्जाम के लिए कोचिंग दिलावाई जा रही है। ये समिति 42 स्कूली बच्चों को उनके मुकाम तक पहुंचाने के लिए स्वयं के खर्चे पर प्राइवेट कोचिंग करा रही है। सभी बच्चे हिंदी मीडियम के विद्यार्थी हैं।

फोटो साभार: thebetterindia
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इस ट्रस्ट के द्वारा जिन बच्चों को कोचिंग कराई जा रही है, उनमें से कुछ ने सीजी बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। दो बच्चों ने 90 प्रतिशत से ज्यादा और 20 बच्चों ने 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।

रिक्शा, ठेला, खोमचे चलाने वाले या फिर दिहाड़ी मजदूरी करने वालों के सरकारी स्कूल में पढ़ रहे मेधावी बच्चों के सपनों को साकार करने में 'एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट' ने अनुकरणीय पहल की है। जिला शिक्षा विभाग के मिशन बेटर एजुकेशन की पहल पर समिति मेधावी बच्चों को विशेष कोचिंग दिलाते हुए उनकी फीस भी भर रही है। जिन बच्चों को कोचिंग कराई जा रही है, उनमें से कुछ ने सीजी बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। दो बच्चों ने 90 प्रतिशत से ज्यादा और 20 बच्चों ने 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।

42 मेधावी बच्चे ले रहे हैं विशेष कोचिंग

जेईई मेंस और एनआईटी की कोचिंग 42 मेधावी बच्चों को सिविक सेंटर भिलाई के एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर में दिलाई जा रही है। इनमें शहरी क्षेत्र से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे हैं।

इस तरह हुआ था चयन

जेईई मेन्स व नीट की कोचिंग के लिए जिला शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के संस्था प्रमुखों से ऐसे बच्चों की सूची तैयार कराई थी, जिन्होंने दसवीं बोर्ड व ग्यारहवीं में 80 या इससे ज्यादा अंक हासिल किए थे। इस सूची के हिसाब से बच्चों को जेईई मेन्स व नीट की प्रवेश परीक्षा के फार्म भी भरवाए गए। उसके बाद शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक शाला में ऐसे 93 बच्चों का स्क्रीन टेस्ट एक्सपर्ट कोचिंग संस्थान ने लिया। इस टेस्ट में 42 बच्चे सफल हुए।

सरकारी स्कूल के दो बच्चों का चयन JEE मेन्स में

सरकारी स्कूल के इन बच्चों को कोचिंग देने का नतीजा भी सामने आने लगा है। जिन बच्चों को कोचिंग दी जा रही हैं उनमें दो बच्चों का चयन जेईई मेन्स 2017 में भी हुआ है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला स्कूल रानीतराई के फलेन्द्र कुमार और शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला उतई की हिमानी गायकवाड़ ने जेईई मेन्स में सफलता हासिल की है। अब उन्हें जेईई एडवांस की कोचिंग मिल रही है।

ट्रस्ट कर रहा है ढाई लाख रुपए खर्च

भिलाई एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट कोचिंग ले रहे बच्चों को जरूरी शैक्षणिक सामग्री भी मुहैया करा रहा है। ट्रस्ट के मुताबिक इन बच्चों की कोचिंग के लिए कोचिंग संस्थान को ढाई लाख रुपए भुगतान किया जा रहा है। आगे भी बच्चों के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है ताकि उनकी आर्थिक समस्या पढ़ाई में बाधक न बने।

गरीब बच्चों का कॅरियर संवारने की कोशिश

एजुकेशन ट्रस्ट के टीचर सज्जी के मुताबिक 'हमारा ट्रस्ट गरीब वर्ग के मेधावी बच्चों के लिए कार्य कर रहा है। इस बार सरकारी स्कूलों के ऐसे बच्चों को जेईई मेन्सनीट कोचिंग अपने खर्चे पर दिलाई जा रही है। हमारी कोशिश बच्चों का कॅरियर संवारने की है।'

मिशन बेटर एजुकेशन के पहलकर्ता आशुतोष चावरे के मुताबिक, 'मिशन बेटर एजुकेशन के तहत भिलाई एजुकेशन ट्रस्ट से सामुदायिक सहभागिता निभाने के लिए पहल की गई। ट्रस्ट ने गरीब मेधावी बच्चों की प्रतिभा को तराशने का बीड़ा उठाया है। ये एक सराहनीय और प्ररेणादायी कदम है।'

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