किसान के बेटे ने बाइक के इंजन से बनाया मिनी एयरक्राफ्ट

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हरियाणा के हिसार जिले के एक युवा ने पुरानी बाइक के इंजन से उड़ने वाला एक यान तैयार कर लिया है। चंडीगढ़ से बीटेक की पढ़ाई कर चुके कुलदीप ने ऐसी मशीन बनाई है जो सिर्फ एक लीटर पेट्रोल के जरिए करीब 12 मिनट तक आसमान में हवा भरती है।

कुलदीप का मिनी एयरक्राफ्ट
कुलदीप का मिनी एयरक्राफ्ट
कुलदीप ने बताया कि इससे आसमान में 10 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरी जा सकती है। वे अब तक इससे दो हजार फीट ऊंची उड़ान भर भी चुके हैं। 

कुलदीप ने हवा में उड़ने के लिए गोवा से पायलट की ट्रेनिंग भी ली है। तीन महीने की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे वापस अपने सपने को साकार करने में लग गए।

भारत में कितना टैलेंट है इसका अंदाजा शायद आपको नहीं होगा। हरियाणा के हिसार जिले के एक युवा ने पुरानी बाइक के इंजन से उड़ने वाला एक यान तैयार कर लिया है। चंडीगढ़ से बीटेक की पढ़ाई कर चुके कुलदीप ने ऐसी मशीन बनाई है जो सिर्फ एक लीटर पेट्रोल के जरिए करीब 12 मिनट तक आसमान में हवा भरती है। इसे आप चाहे मिनी हेलीकॉप्टर कह लें या फिर पैराग्लाइडिंग फ्लाइंग मशीन। उन्होंने बताया कि इसे तैयार करने मं लगभग तीन साल का वक्त लग गया। कुलदीप ने इस मशीन में बाइक का इंजन फिट किया है।

हिसार के आदमपुर कस्बे की ढाणी मोहब्बतपुर में रहने वाले कुलदीप टाक के अंदर हवा में उड़ने वाली गाड़ी बनाने का जुनून सवार था। उन्होंने कुछ जुगाड़ के जरिए ये कारनामा कर लिया है। इस यान को बनाने में उन्हें तरीबन ढाई लाख रुपये का खर्च आया है। उन्होंने बताया कि इसमें 200 सीसी का बाइक का इंजन लगा है। उड़ान भरने के लिए इसमें लकड़ी के पंखे लगाए गए हैं वहीं छोटे छोटे टायर भी फिट किए गए हैं जिससे आसानी से जमीन पर लैंडिंग हो जाती है। कुलदीप ने बताया कि इससे आसमान में 10 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरा जा सकता है।

कुलदीप अब तक इससे दो हजार फीट ऊंची उड़ान भर भी चुके हैं। फिलहाल इस मशीन में केवल 1 ही व्यक्ति बैठ सकता है, लेकिन कुलदीप ने दावा किया है कि कुछ ही माह में ये मशीन 2 लोगों को लेकर उड़ेगी, जिसमें सबसे पहले वो अपने पिता को बैठाएगा। इसमें 5 लीटर का टैंक फिट किया गया है जिसे फुल भरने के बाद लगभग एक घंटे तक आसमान में उड़ा जा सकता है। कुलदीप के पिता गांव में ही खेती करते हैं।

इस सपने को साकार करने का श्रेय वह अपने परिवार को देते हैं। उनके पिता प्रहलाद सिंह टाक और सहयोगी सतीश आर्यनगर ने भी उसकी मेहनत को हौसला दिया। पिता प्रहलाद सिंह खेत में रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा देर रात इस मशीन को बनाने में लगा रहता था। हालांकि उन्होंने कई बार कुलदीप को इस काम के लिए मना भी किया लेकिन कुलदीप ने अपने जुनून के आगे हार नहीं मानी। कुलदीप ने हवा में उड़ने के लिए गोवा से पायलट की ट्रेनिंग भी ली है। तीन महीने की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे वापस अपने सपने को साकार करने में लग गए।

कुलदीप का यह पहला प्रयास नहीं था। वे इससे पहले भी एक एयरक्राफ्ट तैयार कर चुके हैं। लेकिन वो ट्रायल के दौरान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद कुलदीप ने फिर से पैराग्लाडिंग फ्लाइंग मशीन बनाने का निर्णय लिया और आज वे इसमें कामयाब हो गए। इस काम में कुलदीप को उनके दोस्त सतीश ने काफी मदद की। इस सफलता पर कुलदीप के घरवाले फूले नहीं समा रहे हैं। उनकी मां कमला ने बताया कि बेटे को हवा में उड़ता देखकर बहुत खुशी हो रही है।

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