सिगरेट पीने से सिर्फ कैंसर ही नहीं होता, रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ता है बुरा असर

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जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें समझाने के लिए काफी प्रयास किये गये, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि सरकार भी इस स्थिति से निपटने के लिये काफी प्रयास कर रही है, जिसके कारण हर साल फेफड़ों के कैंसर और श्वसन से संबंधित दूसरी बीमारियों के कारण हजारों लोगों की मृत्यु हो जाती है।

सांकेतिक तस्वीर
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पुरुषों और महिलाओं दोनों में सिगरेट पीने से हार्मोन की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। धूम्रपान से महिलाओं में एट्रोजन का स्तर कम हो जाता है जिसके कारण हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका बढ़ जाती है।

हर कोई जानता है कि धूम्रपान करना सेहत के लिए खतरनाक है और इससे कैंसर होने का खतरा रहता है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि धूम्रपान से रीढ़ की हड्डी पर भी बुरा असर पड़ता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें समझाने के लिए काफी प्रयास किये गये, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि सरकार भी इस स्थिति से निपटने के लिये काफी प्रयास कर रही है, जिसके कारण हर साल फेफड़ों के कैंसर और श्वसन से संबंधित दूसरी बीमारियों के कारण हजारों लोगों की मृत्यु हो जाती है। बॉम्बे हॉस्पिटल के मुंबई स्पाइन स्कॉलियोसिस एंड डिस्क रिप्लेसमेंट सेंटर के हेड डॉ. अरविंद कुलकर्णी हमें बताने जा रहे हैं इस के बारे में।

धूम्रपान के प्रतिकूल प्रभावों में निकोटिन की लत, फेफड़ों और दूसरे प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ना, आर्टियोस्लेरोसिस (धमनियों का कड़ा हो जाना) और हृदय रोग, इसके साथ ही जीवनकाल कम हो जाना समिलित हैं। सिगरेट में तंबाकू की सूखी पत्तियां और सुगंध होती हैं जिसमें लगभग 4000 रसायन होते हैं। इसमें से कुछ पदार्थ हानिरहित होते हैं जब तक कि इन्हें जलाया नहीं जाता और सांस के साथ शरीर में अंदर नहीं लिया जाता। सिगरेट के धुएं को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है- सुनिश्चित कण और गैसें।

धूम्रपान करने वाले इस बात की अनदेखी कर देते हैं कि इससे उनकी रीढ़ की हड्डी विकृत हो जाएगी, जो एक लंबे समय तक चलने वाला रोग है। जैसे कि हम जानते हैं धूम्रपान करने वालों की शारीरिक क्षमता धूम्रपान न करने वालों की तुलना में कम होती है, इसका मुख्य कारण फेफड़ों की सक्रियता कम होना है। सिगरेट पीने से शरीर में रक्त की मात्रा कम और हानिकारक पदार्थों, जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है। ये हृदय और रक्त नलिकाओं पर धूम्रपान के प्रभाव के साथ संयुक्त होकर, शारीरिक गतिविधियों को सीमित कर सकते हैं।

हड्डियां एक जीवित उत्तक हैं जो शरीर के दूसरे तंत्रों द्वारा उपलब्ध कराए गये कार्यों और समर्थन पर निर्भर होती हैं। जब ये तंत्र सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं, हड्डियां स्वयं अपना पुनर्निमाण नहीं कर पाती हैं। हड्डियों का निर्माण विशेषरूप से शारीरिक सक्रियता और हार्मोनों की गतिविधि के द्वारा प्रभावित होता है, जो दोनों सिगरेट पीने से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होते हैं।

पुरुषों और महिलाओं दोनों में सिगरेट पीने से हार्मोन की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। धूम्रपान से महिलाओं में एट्रोजन का स्तर कम हो जाता है जिसके कारण हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका बढ़ जाती है। ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियों की शक्ति कम हो जाती है, वो आसानी टूटने वाली हो जाती हैं। तो यह साइलेंट डिसीज कईं रीढ़ की हड्डियों और कुल्हों के फै्रक्चर के लिये उत्तरदायी है।

सिगरेट में जो विषैले तत्व होते हैं वो हड्डियों और मुलायम उतकों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। जब हम रीढ़ की हड्डी के बारे में बात करते हैं, जो कशेरूका, उपास्थियों से बनी अकशेरूकी डिस्क, संयोजी उतक, छोटी मांसपेशियों और तंत्रिकाओं से मिलकर बनी होती है। हमें यह विस्तृत रूप से समझ में आने लगता है कि कैसे धूम्रपान हमारी रीढ़ की हड्डी की कार्य करने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।

रीढ़ की हड्डी के सभी भाग धूम्रपान से प्रभावित होते हैं। नीचे कुछ और खतरे दिये जा रहे हैं जिनके बारे में अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं है:

अकशेरूकी डिस्क: जो डिस्क पास वाली कशेरूका को अलग करती है, उसे बहुत कम मात्रा में रक्त की आपूर्ति होती है। धूम्रपान करने से रक्त का संचरण और कम हो जाता है, जिसके कारण इन डिस्कों के लिये पोषक तत्वों को अवशोषित करना असंभव हो जाता है जिनकी इन्हें स्वस्थ रहने के लिये आवश्यकता होती है।

कशेरूका: धूम्रपान के कारण हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिसके कारण कशेरूका में ऑस्टियोपोरोसिस, फैसेट डिसीज, स्पाइनल आर्थराइटिस और दूसरी स्थितियां विकसित होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है जिससे रीढ़ की हड्डी में विकृति आ जाती है।

संयोजी उतक: निकोटिन कोलेजन के स्तर को कम करता है, जिससे मुलायम उतकों और उपास्थियों का लचीलापन कम हो जाता है। टेंडन और लिगामेंट्स कमजोर और आसानी से चोटिल होने वाले हो जाते हैं।

मांसपेशियां: मांसपेशियों पर धूम्रपान के सामान्य हृास के प्रभाव के अलावा, तंबाकू फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है, शारीरिक गतिविधि को कठिन बना देता है। इस निष्क्रियता के फलस्वरूप मांसपेशियों का मास कम हो जाता है।

तंत्रिकाएं: जब उपास्थि, कशेरूका और अकशेरूकाओं के बीच की डिस्क कमजोर पड़ जाती है, डिस्क फूलने या उसमें आंतरिक वृद्धि होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे रीढ़ की तंत्रिकाओं पर दबाव पड़ सकता है।

सांकेतिक तस्वीर
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रीढ़ की हड्डी को ठीक करने की एक प्रक्रिया स्पाइनल फ्यूजन है, जो एक सर्जरी वाली प्रक्रिया है जिसका उपयोग रीढ़ के हड्डियों वाले भाग (जैसे कशेरूका) को जोड़ने के लिये किया जाता है। फ्यूजन के ठीक होने के लिये, रीढ़ की हड्डी के भागों के बीच में नई हड्डियों का विकास अवश्य होता है। कभी-कभी फ्युजन के साथ एक और सर्जिकल तकनीक का उपयोग किया जाता है जिसे स्पाइनल इंस्टुमेंटेशन कहा जाता है। इंस्टुमेंटेशन में कईं हार्डवेयर जैसे रॉड, हुक्स, वायर्स और स्क्रिव का उपयोग किया जाता है जिन्हें रीढ़ की हड्डी से जोड़ा जाता है। ये सभी हार्डवेयर चिकित्सीय रूप से डिजाइन किये हुए होते हैं। ये यंत्र रीढ़ की हड्डी को तुरंत स्थायित्व देते हैं और उसे एक उचित स्थिति में रखते हैं जब तक कि फ्युजन अच्छा न हो जाए।

स्पाइनल फ्युजन (इसे आर्थोडेसिस भी कहा जाता है) सर्विकल, थोरैसिक या लंबर स्तरों पर भी किया जा सकता है। इसे ठीक होने में कईं महीने लग जाते हैं। कईं स्पाइनल सर्जरियों की लंबे समय तक सफलता, सफलतापूर्वक हुए स्पाइनल फ्युजन पर निर्भर करती है। अगर फ्युजन ठीक नहीं होता है, स्पाइनल सर्जरी को दोबारा करना होता है। एक असफल फ्युजन को नोनुनियॉन या सुडोआर्थोसिस कहते हैं। कईं निश्चित कारक स्पाइनल फ्युजन की सफलता को प्रभावित करते हैं। इनमें से कुछ तत्व हैं मरीज की उम्र, दूसरी मेडिकल कंडीशंस जैसे डायबिटीज, आस्टियोपोरोसिस और सिगरेट पीना। धूम्रपान आधारभूत शारीरिक तंत्रों की सामान्य गतिविधियों को गड़बड़ा देता है जो हड्डियों के निर्माण और विकास में योगदान देते हैं। जैसा की पहले उल्लेख किया गया है, फ्युजन के ठीक होने के लिये नई हड्डी का विकास आवश्यक है।

ऑपरेशन के पश्चात होने वाला संक्रमण - धूम्रपान रोग प्रतिरोधक तंत्र और शरीर की दूसरी सुरक्षा प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करता है, जिसके कारण ऑपरेशन के बाद मरीज में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि, धूम्रपान छोडऩे के बारे में कहना उसे वास्तव में छोडऩे की तुलना में आसान है। लेकिन कुछ टिप्स हैं जिन्हें अपनाकर इसे छोडऩा थोड़ा आसान हो सकता है। जो धूम्रपान छोडऩा चाहता है उन्हें ढेर सारा पानी या कैफीन रहित तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्यों कि कैफीन से निकोटिन का सेवन करने की इच्छा बढ़ सकती है। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और रात में लगभग आठ घंटे की नींद लें। कईं लोग जब थकान या उर्जा की कमी महसूस करते हैं तब वो कईं सिगरेट पी जाते हैं। चूंकि धूम्रपान करने की लत और हमारी आदतों के बीच गहरा संबंध है, अपनी जीवनशैली और लाइफस्टाइल को बदलने का प्रयास करें। अपना लंच अलग स्थान पर बैठकर खाएं, अपने कुत्ते को किसी और रास्ते पर घुमाने ले जाएं या टीवी देखने के बजाय किताब पढ़ें।  

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