छत्तीसगढ़ की वो पहलें जिनसे राज्य में स्टार्टअप को मिल रहा है बढ़ावा

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यह लेख छत्तीसगढ़ स्टोरी सीरीज़ का हिस्सा है... 

'कोयस एज कंसल्टिंग' की 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब डिजिटल पहलों की बात आती है, तो छत्तीसगढ़ का नाम भारत के सभी राज्यों में से चौथे स्थान पर आता है। काफी लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद का शिकार रहा यह राज्य अब अपने अतीत में न जाकर आने वाले भविष्य को बेहतर बनाने के सपने देख रहा है।

छत्तीसगढ़ फिलहाल खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन, उपकरण निर्माण, कपड़ा और परिधान जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं जिनका दोहन अभी नहीं किया गया है। 

'कोयस एज कंसल्टिंग' की 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब डिजिटल पहलों की बात आती है, तो छत्तीसगढ़ का नाम भारत के सभी राज्यों में से चौथे स्थान पर आता है। काफी लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद का शिकार रहा यह राज्य अब अपने अतीत में न जाकर आने वाले भविष्य को बेहतर बनाने के सपने देख रहा है। राज्य की सरकार भी जनता को सुविधाएं देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। स्टार्टअप एक ऐसा ही क्षेत्र है जिसके लिए सरकार ने काफी कदम उठाए हैं।

सरकार के प्रयासों में छत्तीसगढ़ इनोवेशन और उद्यमिता विकास नीति तैयार करना शामिल है जिसका लक्ष्य वीसी/वित्तीय संस्थानों और एंजेल निवेशकों द्वारा वित्त पोषित कम से कम 100 इनक्यूबेटर और एक्सेलेरेटर स्थापित करना है। जिसकी मदद से अटल इनोवेशन मिशन को सही से लागू करना या एमएसएमई-स्टार्टअप सुविधा सेल शुरू करने की सुविधा प्रदान करना हैं। सरकार की मदद से स्थानीय स्तर पर स्टार्टअप इकोसिस्टम को काफी लाभ मिला है। 

आईये जानते हैं, कुछ ऐसी ही दिलचस्प पहलों के बारे में:

ग्रामीण डिजीप्रेन्योर शिखर सम्मेलन

जनवरी 2018 में आयोजित हुए इस शिखर सम्मेलन में 7,000 से अधिक गांव-स्तर के उद्यमियों की भागीदारी देखी गई। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक और बायोटेक प्रोमोशन सोसाइटी (सीएचआईपीएस) के सहयोग से राज्य सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने इन उद्यमियों और आम सेवा केंद्रों (सीएससी) के प्रमुखों को प्रदर्शित करने पर ध्यान केंद्रित किया। सीएससी देश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस चलाने के लिए एक अखिल भारतीय पहल है। ये ऐसे केंद्र हैं जहां लोग आवश्यक सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं, स्वास्थ्य देखभाल, वित्तीय, शिक्षा और कृषि सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

इसी साल अप्रैल में, छत्तीसगढ़ ने देश के दूसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इनक्यूबेटर '36इंक' का उद्घाटन किया। राज्य में पहली सरकार द्वारा समर्थित स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर '36इंक' को 30,000 वर्गफीट में फैला हुआ है। खास बात ये है कि इसमें 200 वर्कस्टेशन हैं। इस सेंटर में भारत के अलावा विदेश के विशेषज्ञों की टीम रहती है जहां से स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा गाइडेंस हासिल कर सकते हैं।

अभी इसमें 43 स्टार्टअप काम कर रहे हैं। ये स्टार्टअप एडटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी, ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्पों से जुड़े हैं। इनक्यूबेटर सेंटर में स्टार्टअप के लिए कई विशेष प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें Fabled भी शामिल है, जो एमआईटी Fablab नेटवर्क का हिस्सा है। इस सेंटर में 3 डी प्रिंटर से लेकर एक सीएनसी (कंप्यूटर संख्यात्मक नियंत्रण) मशीन, लेजर कटर और अन्य टूल्स की सुविधा होगी ताकि त्वरित गति से प्रोटोटाइप का निर्माण किया जा सके। सेंटर में एक मल्टीमीडिया लैब, एक इलेक्ट्रॉनिक्स टेस्टिंग लैब और इंटरनेट ऑफ थिंग्स लैब भी है।

2015 में, 'NASSCOM 10,000' स्टार्टअप कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, शीर्ष उद्योग निकाय ने छत्तीसगढ़ में अपना गोदाम भी स्थापित किया जहां स्टार्टअप को अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन और सपोर्ट हासिल हो सकता है।

निवेश आकर्षित करना

छत्तीसगढ़ फिलहाल खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन, उपकरण निर्माण, कपड़ा और परिधान जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं जिनका दोहन अभी नहीं किया गया है। सरकार इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए कार्य कर रही है और फूड पार्क, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर, इंजीनियरिंग पार्क, धातु पार्क, सौर एसईजेड विकसित करके इन्फ्रास्ट्रक्चर भी मुहैया करवा रही है। अभी तक इन क्षेत्रों में निवेश के लिए 23,000 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

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