सफलता और विस्तार के लिए लगातार डटे रहने का 'श्रेय' है 'OYO ROOMS'

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भारत के अधिकांश महानगरों में रहने वाले लोगों के लिये चमकते हुए लाल रंग के बोर्ड पर मोटे अक्षरों में सफेद रंग से लिखा हुआ ‘ओयो (OYO)’ एक बिल्कुल आम दृश्य है। और ओयो के इस अविस्मरणीय विस्तार के लिये बहुत हद तक जिम्मेदार है एक 25 वर्षीय नौजवान। इनका नाम है श्रेय गुप्ता।

अपने बेहतरीन स्टार्टअप कर्मचारी, विस्तार के एवीपी श्रेय गुप्ता के बारे में बात करते हुए ओयो रूम्स के संस्थापक और सीईओ रितेश अग्रवाल कहते हैं, 

‘‘श्रेय हमारे साथ पिछले वर्ष उस समय जुड़े थे जब हमारे पास सिर्फ 20 प्राॅपर्टी थी। उन्होंने हमारी अधिकतर बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व बहुत शानदार तरीके से किया। उन्होंने नई प्राॅपर्टीज को ओयो के मानकों के अनुसार ढालते हुए ट्रांसफाॅर्मेशन वर्टिकल का निर्माण किया और इसके बाद विस्तार की टीम का एक हिस्सा बन गए। हमनें सिर्फ 6 महीनों के अंतराल में ही 100 से भी अधिक शहरों में अपने कदम फैलाये।’’

ओयो रूम्स का मकसद लोगों को देशभर में उस समय एक मानकीकृत अनुभव प्रदान करवाना है जब वे अपने घर से बाहर होते हैं। वर्ष 2014 में कंपनी का एक हिस्सा बनने वाले श्रेय के जिम्मे देशभर में फैले ओयो के नेटवर्क में मानकों की स्थापना करते हुए उन्हें लागू करने का काम करते हुए यह सुनिश्चित करना है कि उनके साथ जुड़ने वाले उपभोक्ता को बेहतरीन अनुभव प्राप्त हो। ओयो के संस्थापक रितेश अग्रवाल को प्रारंभ में ही श्रेय का साहसी अंदाज भा गया था। श्रेय ने बीते वर्ष ओयो को दूसरे राउंड का निवेश मिलने के बाद रितेश को ट्विटर के माध्यम से बधाई देने के लिये संपर्क किया था और इसके एक महीने बाद ही वे इस 15 सदस्यीय टीम का एक हिस्सा बनने में सफल रहे।

रितेश कहते हैं, ‘‘उस समय जब अधिकतर लोग यह समझने में नाकामयाब ही रहे थे कि हम ओयो रूम्स के माध्यम से क्या करने का प्रयास कर रहे हैं तब श्रेय ने इस अवधारणा पर जुआ खेलने का फैसला किया। उन्होंने समस्या की जड़ को समझा और जैसे हमारी पूरी संस्थापक टीम उसके समाधान की तलाश में लगी थी वे भी उसी जुनून से समाधान खोजने में लगे।’’

गर्व से लबरेज श्रेय बताते हैं कि सिर्फ 18 महीनों में ही ओयो रूम्स सिर्फ एक शहर के 12 होटलों के मात्र 200 कमरों के आंकड़े को पार पाते हुए 150 शहरों के 3500 होटलों के 40 हजार कमरों के आंकड़े को छूने में सफल रहा है। इसके अलावा इन्होंने विशेष रूप से सिर्फ महिलाओं के लिये ओयो वी भी प्रारंभ किया है। श्रेय कहते हैं, ‘‘ये 18 महीने मेरे लिये प्रेरणा से भरपूर रहे हैं।’’

मील के पत्थर

श्रेय के जीवन का प्रारंभिक दौर वाराणसी में गुजरा और उन्होंने बीता दशक गुड़गांव में बिताया। दिल्ली के श्रीराम काॅमर्स काॅलेज से वाणिज्य में स्नातक करने के बाद वर्ष 2011 में उन्होंने बेन एंड कंपनी के साथ अपने करियर का आगाज किया। हालांकि इसके मात्र दो वर्ष बाद ही उन्होंने बीजेपी के लोकसभा चुनाव के वार रूम का एक हिस्सा बनने का फैसला किया। वे आगे बताते हैं, 

‘‘एक ‘सुरक्षित’ नौकरी के आराम को छोड़कर चुनाव अभियान का हिस्सा बनना मेरे जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण पल था। इसकी वजह से ही मैं खुद को जोखिम उठाने के काबिल बनाने में कामयाब रहा और इसी के चलते मैं उस समय बिल्कुल नयी ओयो रूम्स के साथ जुड़ने का निर्णय ले पाया।’’

उनके जीवन का दूसरा महत्वपूर्ण पल तब आया जब उन्होंने वर्ष 2013 में हाफ मैराथन में भाग लिया। इस मैराथन में हिसा लेने के दौरान वे प्रशिक्षण की महत्ता समझने में कामयाब रहे और इसके अलावा इसने उन्हें सामने आने वाली चुनौतियों के बावजूद निरंतर आगे बढ़ने के लिये भी प्रेरित किया।

स्टार्टअप्स के साथ काम करना

हालांकि श्रेय स्टार्टअप्स के साथ काम करने की पैरोकारी करने का कोई मौका नहीं छोड़ते लेकिन उनका मानना है कि एक काॅर्पोरेट के साथ काम करने के दौरान कोई भी व्यक्ति एक अपेक्षाकृत धीमी गति के वातावरण में नए कौशल सीखने में सफल होता है। यहां पर सीखे हुए कौशल किसी भी स्टार्टअप के साथ काम करने के दौरान, जहां आप करते हुए ही सीखने में सफल होते हैं, काफी मदददगार साबित होते हैं। काॅर्पोरेट में समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित करने और प्रक्रियाओं के निर्माण की एक निश्चित प्रक्रिया होती है। वे हंसते हुए कहते हैं, ‘‘मेरे अंदर ये सभी कौशल बहुत अच्छी तरह से समाहित हैं।’’ लेकिन एक बहुत तेजी से आगे बढ़ते हुए स्टार्टअप में सफल होने के लिये आपको कई छिपी हुई योग्यताओं का स्वामी भी होना पड़ता है।

श्रेय ओयो के अपने प्रारंभिक दिनों, जब इस स्टार्टअप का संचालन बेहद ही सीमित था, के एक अनुभव को साझा करते हैं। अगस्त 2014 में इन्हें सिर्फ 48 घंटे के नोटिस पर 200 लोगों की बुकिंग मिली जिसका सीधा सा मतलब था 100 से भी अधिक कमरे। श्रेय कहते हैं-- 

‘'उस दौरान हमारे पास कुल मिलाकर 300 से कुछ अधिक कमरे थे और उस समय हमारे पास सिर्फ 50 कमरे ही तैयार और उपलब्घ थे। 100 से भी अधिक रात्रिकालीन कमरों का सीधा सा मतलब हमारी दैनिक बिक्री का 40 फीसदी था और हम किसी भी कीमत पर इस मौके को खोना नहीं चाहते थे। हमारे पास यह आॅफर रात्रि में करीब 10 बजे आया। पहले दिन हमारी बिजनस डवलपमेंट टीम गुड़़गांव के डीएलएफ फेज 2 की 3 नई प्राॅपर्टियों के साथ हाथ मिलाने में कामयाब रहे। उसी शाम 5 बजे तक हम इस प्राॅपर्टी की डील फाइनल कर चुके थे। हमारे सामने बिल्कुल साफ लक्ष्य था कि हमें सिर्फ 24 घंटो के समय में इन कमरों को अपने मेहमानों के लिये बिल्कुल तैयाार करना है। इन कमरों को मानको के अनुसार तैयार करने का काम पहले ही दिन सुबह सवेरे प्रारंभ कर दिया गया। सुबह 10 बजे एक व्यक्ति को रनर, तकिये, चादरें और तौलिये इत्यादि खरीदने का काम सौंपा गया। इसके बाद हमें अगली सुबह आने वाले मेहमानों के लिये 50 कमरों की साफ-सफाई करके उन्हें रहने लायक बनाना था। एक दूसरी टीम के सदस्य ने सारी रात काम किया और लाॅलीपाॅप की तरह दिखने वाले गोलाकार बोर्ड जिन्हें हम ओयो डाॅलाॅप्य कहते हैं तैयार करवाए। इन्हें दूसरे दिन मेहमानों के पहले जत्थे के आने से मात्र घंटे पूर्व ही दोपहर के 1 बजे तक स्थापित किया गया। मैंने बाकी की टीमों का प्रबंधन करते हुए 20 कमरों की साफ-सफाई इत्यादि पर पैनी नजर रखी। हमनें पहले दिन शाम को 4 बजे कमरों की सफाई का काम प्रारंभ किया और अगले दिन दोपहर 1 बजे तक कमरे रहने के लिये बिल्कुल तैयार थे। आखिरकार सिर्फ 6 लोगों की एक टीम तीन नए होटलों का प्रबंध करते हुए उन्हें मेहमानों के रहने लायक बनाने में कामयाब रही। हम इतनी तेजी से आगे बढ़ने में यकीन करते हैं और वही अनुभव आज भी हमारे काम करने के तरीके को परिलक्षित करता है।’’

संस्थापक का कथन

रितेश का कहना है कि श्रेय के पास प्रक्रिया और धकमपेल के बीच संतुलन स्थापित करने की काबिलियत है और यह एक ऐसा गुण है जो किसी भी स्टार्टअप कर्मचारी को बहुमूल्य बनाती है। रितेश कहते हैं, 

‘‘उन्हें यह बहुत अच्छे तरीके से पता है कि उन्हें कब गियर बदलना है और जब आवश्यकता हो वे काम पूरे करने के काबिल हैं। ओयो पर हम जो भी तैयार करते हैं उसकी एक बेहद मजबूत बुनियादी प्रक्रिया है और जब वे काम नहीं करती हैं तो हम इन प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाते हैं। समस्याओं को सुलझाने के इस दृष्टिकोण ने हमें तेजी से आगे बढ़ने में मदद की है और यही हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।’’

ओयो के आॅप्टिमस प्राइम यानि श्रेय गुप्ता एक संदेश के साथ विदा लेते हैं। 

‘‘आप जो भी कर रहे हैं उसे करते रहें और आपको लगता है कि किसी काम को अलग तरीके से किया जाना चाहिये तो उस बारे में बोलने से पीछे मत हटिये।’’


लेखिकाः तनवी दुबे

अनुवादकः निशांत गोयल