स्वच्छ भारत योजनाएं देश को बनायेंगी आर्थिक तौर पर मजबूत

यदि सरकार की स्वच्छ भारत व डिजिटल इंडिया जैसी नवोन्मेषी पहलों का कार्यान्वयन सफलतापूर्वक होता है, तो भारत ‘दुनिया में एक आधुनिक आर्थिक शक्ति’ बनेगा : प्रणब मुखर्जी

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है, कि स्वच्छ भारत जैसी योजनाओं से भारत देश आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर कर सामने आ सकता है। अगर सरकार की स्वच्छ भारत व डिजिटल इंडिया जैसी नवोन्मेषी पहलों का कार्यान्वयन सफलतापूर्वक होता है तो भारत ‘दुनिया में एक आधुनिक आर्थिक शक्ति’ बनेगा। भारत इस समय दूसरी हरित क्रांति की दहलीज पर खड़ा है इसलिए देश को आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए फसलों की उपज बढाने के बारे में इस्राइल से सीखना होगा। राष्ट्रपति ने यह बात उद्योग मंडल सीआईआई के एग्रोटेक सम्मेलन के उदघाटन के मौके पर कही।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

प्रणव मुखर्जी ने कहा, कि ‘हमारी सरकार ने आर्थिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में अनेक नयी पहलें की हैं, विशेषकर मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, स्मार्ट इंडिया डिजिटल इंडिया। इन सभी योजनाओं का सफल कार्यान्वयन इस प्राचीन सभ्यता को दुनिया की संपन्न, गतिशील व आधुनिक आर्थिक शक्ति में बदलेगा। आधुनिक आर्थिक शक्ति बनने के लिए हमारे संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल तथा कृषि त्पादकता को उच्च स्तर पर लाने की जरूरत है। हमें इस्राइल से सीखने की जरूरत है जिसने कम खपत वाली सिंचाई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कतरे हुए उच्चतम फसल उत्पादकता हासिल की है।’ उन्होंने देश को खाद्य अधिशेष व जल अधिशेष राष्ट्र बनाने के लिए इस्राइल के प्रयासों की सराहना की।

सीआईआई के कार्य्रकम में इस्राइल के राष्ट्रपति रूवन रिवलिन विशिष्ट अतिथि थे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध प्रगाढ़ बनाने से से दुनिया में जादू हो सकता है क्योंकि दोनों देशों में व्यापक वृद्धि की संभावनाए हैं। जब इस्राइली कंपनियां व भारतीय किसान मिलते (नेटवर्किंग करते) हैं तो वे मिलकर जादू करते हैं। हर देश का आगे बढ़ने का अपना तरीका होता है। भारत ने नवोन्मेष में दुनिया की अगुवाई की है अब इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।’ साथ ही रिवलिन ने यह भी कहा, कि खाद्य सुरक्षा की महत्ता इस्राइल ने भारत से ही समझी है। हल्के फुल्के अंदाज में रिवलिन ने कहा कि उन्हें हिंदी शब्द ‘जुगाड़’ से प्यार हो गया है। इस्राइल की स्थिति भी जुगाड़ वाली ही है। हमारे काम व नवोन्मेश के तरीकों में ‘जुगाड़’ है।’ उल्लेखनीय है कि भारत व इस्राइल ने 2006 में कृषि भागीदारी संबंधी समझौता किया था।

अभी कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, कि जीएसटी समेत तरह-तरह के जो सुधार किए जा रहे हैं उनसे राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के एक दूसरे के साथ निवेश और कारोबार के अवसरों को आकषिर्त करने में अपास में प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। उम्मीद है कि इन पहलों से मध्यावधि और दीर्धकाल में रोजगार अवसर बढेंगे और इससे अर्थव्यवस्था की वृद्धि के आवेग तेज होंगे। मुझे विश्वास है कि आईआईटीएफ (व्यापार मेले) से भारत की कंपनियों की छाप और मजबूत होगी। इन ब्रांडों को पहले अपने घरेलू बाजार में ही मजबूत अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा करनी होगी तथा उसके बाद देश के बाहर के बाजारों में कदम रखना होगा।’ उन्होंने कहा कि यह व्यापार मेला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गयी मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों के परिप्रेक्ष्य में देश में निवेश के बड़े अवसरों की झांकी प्रस्तुत करता है जिनकी कोई बराबरी नहीं है। हाल में आयोजित ब्रिक्स और बिम्सटेक शिखर सम्मेलनों से अच्छी सद्भावना उत्पन्न हुई है, जो पूरी दुनिया में देशों के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत हमेशा से ही पड़ोसी देशों में स्थिरता और वृद्धि का पक्षधर रहा है। विकास के लिए सहयोग की भागीदारी में जनता को सर्वोपरि रखना हमारा दर्शन है।

उधर दूसरी तरफ एक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है, कि भारत देश को 2020 तक परियोजना आधारित उद्योगों में सालाना चार लाख नए परियोजना पेशेवरों की जरूरत होगी, जिससे विभिन्न उद्योगों में कुशल पेशेवरों की मांग को पूरा किया जा सके। उद्योग के जानेमाने विशेषज्ञ पीएमआई इंडिया के प्रबंध निदेशक राज कलाडी ने यह राय व्यक्त की है। उनके अनुसार, भारत को श्रमबल की बढ़ती कुशल पेशवरों की मांग को पूरा करना होगा। सरकार की मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत तथा स्मार्ट शहर जैसी पहल की वजह से देश को करीब चार लाख परियोजना प्रबंधकों की जरूरत होगी।’ वह पीएमआई इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। तीन दिन के इस सम्मेलन का आयोजना पीएमआई मुंबई चैप्टर तथा पीएमआई पुणे डेक्कन चैप्टर द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल देश में परियोजना प्रबंधन कौशल वाले 38,000 मान्य परियोजना प्रबंधक हैं।

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