चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ फंड्स इकट्ठा करने के लिए इंग्लिश चैनल पार करेंगी लिया चौधरी

लंदन में बिजनेस करने वाली भारतीय मूल की लिया चौधरी ने ऐसा काम करने के बारे में सोचा है जिससे न जाने कितने लोग प्रेरित हो सकते हैं...

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भारत में लगभग 12 लाख बच्चे चाइल्ड ट्रैफिकिंग से प्रभावित हैं। ज्यादातर बच्चे यौन शोषण का भी शिकार होते हैं। ब्रिटिशन एशियन ट्रस्ट ने भारत के एक संगठन प्रेरणा के साथ गठजोड़ किया है। इंग्लिश चैनल पार करने वाले लोगों के इकट्ठा फंड्स से भारत में तीन नाइट केयर सेंटर और शेल्टर होम बनाए जाएंगे।

इंग्लिश चैनल को पार करेंगी लिया चौधरी
इंग्लिश चैनल को पार करेंगी लिया चौधरी
 इस चैलेंज को अब तक सिर्फ 1,500 लोगों ने पूरा किया है। लिया यह सफर 13 घंटे में पूरा करेंगी। इस सफर में उन्हें जेलीफिश, शिप टैंकर्स और समुद्र में चलने से होने वाले दर्द से भी जूझना पड़ेगा।

लंदन में बिजनेस करने वाली भारतीय मूल की लिया चौधरी ने ऐसा काम करने के बारे में सोचा है जिससे न जाने कितने लोग प्रेरित हो सकते हैं। लिया ने भारत में बाल तस्करी रोकने के लिए फंड्स इकट्ठा करने की योजना बनाई थी। वह इंग्लिश चैनल को पार करके इस नेक काम के लिए फंड इकट्टा करेंगी। बुधवार को वह ड्रूवर से ग्रुएलिंग तक 35 किलोमीटर की दूरी को तय करेंगी। इससे जुटाए जाने वाला फंड ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट को जाएगा। यह ट्रस्ट प्रिंस चार्ल्स द्वारा स्थापित किया गया है।

लिया चौधरी लंदन में प्रोफेनल चाइल्डकेयर सर्विस चलाती हैं, जिसका नाम 'पॉप अप, पार्टी & प्ले' है। उन्होंने कहा, 'मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है कि मैं यह चुनौती स्वीकार करने वाली पहली ब्रिटिश एशियन महिला हूं। इस चैलेंज को अब तक सिर्फ 1,500 लोगों ने पूरा किया है।' लिया यह सफर 13 घंटे में पूरा करेंगी। इस सफर में उन्हें जेलीफिश, शिप टैंकर्स और समुद्र में चलने से होने वाले दर्द से भी जूझना पड़ेगा।

लिया के परिवार के लोग और दोस्त एक सपोर्ट बोट पर उनके साथ-साथ चलेंगे, लेकिन चैनल स्विमिंग असोसिएशन नियमों के मुताबिक वे इस चैलेंज के दौरान किसी से संपर्क नहीं रख सकेंगी। लिया पिछले 6 महीनों से फंड्स जुटाने के प्रयास में लगी हैं। उन्होंने अभी तक 35,000 पाउंड इकट्ठा भी कर लिए हैं। इन पैसों को भारत में बाल तस्करी के विरुद्ध चलने वाले अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत में लगभग 12 लाख बच्चे चाइल्ड ट्रैफिकिंग से प्रभावित हैं। ज्यादातर बच्चे यौन शोषण का भी शिकार होते हैं। ब्रिटिशन एशियन ट्रस्ट ने भारत के एक संगठन प्रेरणा के साथ गठजोड़ किया है। इंग्लिश चैनल पार करने वाले लोगों के इकट्ठा फंड्स से भारत में तीन नाइट केयर सेंटर और शेल्टर होम बनाए जाएंगे। वहीं बाल तस्करी की शिकार लड़कियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बनाए जाएंगे। लिया कहती हैं, 'जब मैंने बच्चों से बात की तो उनके जवाब ने मुझे काफी प्रेरित किया। कोई बच्चा फुटबॉलर बनना चाहता है तो कोई डॉक्टर। इतनी मुश्किलों के बाद भी सबसे अच्छी बात है कि वे पॉजिटिव रहते हैं। यही वजह रही कि मैंने ट्रेनिंग में काफी मेहनत की।'

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