भारतीय मूल की 10 वर्षीय रिया बनी ‘चाइल्ड जीनियस’ रोज़ाना 10 घंटे पढ़कर की थी तैयारी

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भारतीय मूल की 10 वर्षीय एक लड़की ने एक लोकप्रिय टेलीविजन क्वीज स्पर्धा जीतकर ब्रिटेन के सबसे मेधावी बच्चे का खिताब जीता है। रिया छह सही जवाबों के साथ कल चैनल चार पर ‘चाइल्ड जीनियस 2016’ में आगे रही और नौ अंक से प्रतिस्पर्धी सैफी से मुकाबला ड्रा रहा क्योंकि वे निर्णायक मुकाबले में सीधे सवाल जवाब के चरण में पहुंच गए।

फोटो-चौनल 4
फोटो-चौनल 4

रिया अमेरिका से अपने परिवार के साथ छह साल पहले ब्रिटेन आयी थी और अब पश्चिम लंदन में रहती है। कठिन सवालों के चार सप्ताह के दौर के अंत में ‘एलीमोसिनेरी’ शब्द का उसने सही जवाब देकर खिताब पर अपना दावा जता दिया जिसका मतलब होता है परोपकार से जुड़ा। जीतने के बाद रिया ने कहा, ‘‘इसके मायने हैं जल्दी उठा जाए, पढ़ाई कर देर से सोया जाए। यह सच में सही लगता है, सचमुच अच्छा। ’’

भारतीय मूल की नौ साल की रिया कुछ दिन पहले उस समय सुर्खियों में रहीं, जब उन्होंने इस शो की बाल प्रतिभाओं की सूची में स्थान हासिल किया था, जहाँ ब्रिटेन के सबसे अक्लमंद बच्चे के खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा हुई। 

रिया ने चैनल 4 की ‘चाइल्ड जीनियस’ सीरीज में ब्रिटेन के सबसे अक्लमंद बच्चे का खिताब पाने के लिए प्रतिस्पर्धा में भाग लिया और जीत दर्ज की। इसके लिए वह 8000 बच्चों में आगे निकलने में कामयाब रहीं। इस कार्यक्रम के लिए खुद को तैयार करने के लिए वह रोज़ाना 10 घंटे पढ़ती रहीं।

रिया ने प्रतियोगिता के लिए चुने जाने के बाद कहा था, ‘‘बाल प्रतिभा करना संभवत: मेरे जीवन का सबसे आश्चर्यजनक अनुभव है। कई बार यह तनावभरा था, लेकिन यह अविश्वसनीय था। मैंने बच्चों में कुछ दोस्त बनाए।’’ महज सोलह साल की उम्र में उसकी मां सोनल विश्वविद्यालय पहुंची थीं और उन्होंने अपनी बच्ची की शिक्षा के लिए चिकित्सक की नौकरी छोड़ दी।-पीटीआई 

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