जाति-धर्म से ऊपर उठकर वोट देने के लिए यह इंजीनियर साइकिल से घूमकर कर रहा अपील

चुनावों में मतदाताओं को जाति धर्म से ऊपर उठकर वोट देने के लिए एक इंजीनियर युवा साइकिल से अपने मिशन पर निकला है...

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अखिल रोज सुबह 8 बजे अपनी यात्रा पर निकलते हैं और शाम को 6 बजे विराम दे देते हैं। इसके बाद वे विश्राम करते हैं। अखिल की ये यात्रा 35 से 40 दिनों में समाप्त होगी। उन्होंने अपनी साइकिल पर नारे लगा रखे हैं जिनमें जाति, लिंग धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर वोट न देने की अपील की गई है।

अपनी साइकिल पर अखिल (फोटो साभार- टाइम्स ऑफ इंडिया)
अपनी साइकिल पर अखिल (फोटो साभार- टाइम्स ऑफ इंडिया)
अखिल ने मैसूर की विश्वैश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने पूरे कर्नाटक में अकेले साइकिल चलाने का प्लान बनाया है। अखिल सुलिया ताल्लुक के जलासुर के रहने वाले हैं। 

देश की राजनीति से लेकर समाज, सब जाति और धर्मों में बंटा हुआ है। हम चाहे जितनी विकास की बातें कर लें, लेकिन वोट देते वक्त समाज के लोगों की सारी प्रतिबद्धता विकास से हटकर प्रत्याशी की जाति या उसके धर्म पर टिक जाती है। हर एक छोटे-बड़े चुनाव में जाति का मसला आ ही जाता है। इस साल कर्नाटक में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और इन चुनावों में मतदाताओं को जाति धर्म से ऊपर उठकर विकास के लिए वोट देने के लिए एक इंजीनियर युवा साइकिल से अपने मिशन पर निकला है। उस इंजिनियर का नाम है अखिल के. गौड़ा है।

अखिल कहते हैं कि भारत की राजनीति में जाति और धर्म का ही बोलबाला है। साफ-सुथरी राजनीति की कल्पना करना काफी मुश्किल है। उन्होंने वोट फॉर क्लीन पॉलिटिक्स' के नाम से एक मुहिम शुरू की है, जिसमें वे पूरे राज्य में 3,000 किलोमीटर तक साइकिल चलाएंगे और लोगों को सोच समझकर वोट देने की अपील करेंगे। अखिल ने मैसूर की विश्वैश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने पूरे कर्नाटक में अकेले साइकिल चलाने का प्लान बनाया है। अखिल सुलिया ताल्लुक के जलासुर के रहने वाले हैं। उन्होंने इसी जनवरी महीने की 12 तारीख से ये मुहिम शुरू की है।

अखिल ने मैसूर से अपनी साइकिल यात्रा प्रारंभ की थी और हुनसुर, मदिकेरी, पुत्तरु, मंगलुरु, उडुपी, कुंडापुर, करवर, हुबली, बीजापुर और कोलार-बेंगलुरु रूट के जरिए वे घूम चुके हैं। अभी तक उन्होंने 500 किलोमीटर की यात्रा की है। अखिल रोज सुबह 8 बजे अपनी यात्रा पर निकलते हैं और शाम को 6 बजे विराम दे देते हैं। इसके बाद वे विश्राम करते हैं। अखिल की ये यात्रा 35 से 40 दिनों में समाप्त होगी। उन्होंने अपनी साइकिल पर नारे लगा रखे हैं जिनमें जाति, लिंग धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर वोट न देने की अपील की गई है। वे कहते हैं कि अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी है और एकजुट होना है तो हमें जाति और धर्म से ऊपर उठना पड़ेगा।

उन्होंने लोगों को मिस कॉल की सर्विस का भी ऑप्शन दे रखा है। सहमत होने पर वे लोगों से 7877778850 पर मिस कॉल करने की अपील करते हैं। अखिल ने बताया, 'लोगों को जाति और धर्म के नाम पर वोट देने के लिए बहकाया जाता है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण विकास की बात नहीं की जाती है। न ही उनसे किसानों की भलाई के नाम पर वोट मांगे जाते हैं।' वे कहते हैं कि मैं सिर्फ जागरूकता लाने के लिए प्रयास कर सकता हूं। बाकी की चीजें लोगों को खुद समझनी होगी।

अखिल बताते हैं कि अभी तक लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और उनके प्रयास को सराहा जा रहा है। उनके पास भारी संख्या में मिस कॉल भी आई हैं। इसीलिए उन्हें यह काम करने में मजा आ रहा है और प्रोत्साहन भी मिल रहा है। उन्होने आगे कहा, 'मैंने मैसूर युवा संगठन की स्थापना की है। यह प्रोग्राम पहले संगठन के बैनर तले की आयोजित हुआ था। मेरी टीम में लगभग 200 सदस्य हैं और हम इस प्रोग्राम को आगे भी ले जाने के लिए संघर्षरत हैं।'

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