एचएसबीसी की मानें तो 2028 तक अमेरिका और जापान को पीछे कर देगा भारत

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फाइनैंशल सर्विसेज कंपनी एचएसबीसी का कहना है कि साल 2028 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की हालात थोड़ी चिंताजनक जरूर है, लेकिन मध्य अवधि के दौरान भारत को उसकी छिपी क्षमता का प्रदर्शन का मौका दिया जाना चाहिए।

 भारत प्रमुख क्षेत्रों में धीमी विकास दर का सामना कर रहा है। एक दूसरा भारत वह है। इस भारत की असली तस्वीर तीन साल बाद दिखाई देगी। वह दौर आर्थिक विकास के लिहाज से ज्यादा आकर्षक होगा।

भले ही कुछ सुधारों के कारण देश की जीडीपी ग्रोथ प्रभावित हुई हो लेकिन मध्यम अवधि में संभावना उत्साहजनक दिखायी देती है। वृद्धि प्रवृत्ति को देखते हुए भारत अगले दशक में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन सकता है। एचएसबीसी की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विस कंपनी के अनुसार हालांकि पिछले साल के कुछ सुधारों से आर्थिक वृद्धि के रास्ते में मुश्किलें आई है जिससे संभवत: अल्पकाल में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर कम हुई है। लेकिन मध्यम अवधि में उन सुधारों से भारत की क्षमता का पूरा उपयोग होना चाहिए।

इस रिपोर्ट के मुतिबिक भारत 2028 तक जापाना और जर्मनी जैसे देश को भी पिछाड़ सकता है। हालांकि एचएसबीसी का कहना है कि उसके लिए भारत को रिफॉर्म्स और सोशल सेक्टर पर ध्यान देना जारी रखना होगा। एचएसबीसी ने एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा, हालांकि आज वैकि जीडीपी का केवल 3 प्रतिशत है, लेकिन भारत की वृद्धि की प्रवृत्ति को देखने से लगता है कि यह अगले दशक में जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार भारत दो दुनिया में फंसा है। एक जहां वृद्धि धीमी है, दूसरे जहां आर्थिक वृद्धि सुधर रही है।

एचएसबीसी ने कहा, पहला भारत को चालू विा वर्ष और अगले वित्त वर्ष 2017-18, 2018-19 में देखा जाएगा। यहां भारत मुख्य क्षेत्रों में कमजोर वृद्धि का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे विचार से दूसरा भारत विा वर्ष 2019-20 और उसके बाद दिखेगा। यहां भारत और आकर्षक होगा। इसके आधार पर एचएसबीसी का मानना है कि भारत की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत रहेगी जो पिछले विा वर्ष 2016-17 के 7.1 प्रतिशत के मुकाबले कम है। वहीं 2018-19 में इसके 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं 2019-20 में यह बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो जाएगी।

रिपोर्ट का कहना है कि जनकल्याण की योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। भारत को इकनॉमिक ग्रोथ और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में काम करते रहने की जरूरत है। देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू विा वर्ष की पहली तिमाही में 5.7 प्रतिशत पर आ गयी जो तीन साल का न्यूनतम स्तर है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नरमी के बीच नोटबंदी का प्रभाव है। एचएसबीसी का मानना है कि 2019-20 के बाद मौजूदा सुधारों के कारण उत्पन्न अल्पकालीन बाधाएं दूर हो जाएंगी।

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