परिवार और दोस्तों के आशीर्वाद के साथ कर्नाटक में रजिस्टर्ड हुई पहली ट्रांसजेंडर शादी 

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ट्रांसजेंडर अक्कई पद्मशाली ऐक्टिविस्ट भी हैं। उन्होंने मंगलवार को दोस्तों और अपने परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में वासुदेव वी. के साथ शादी कर ली। रजिस्टट्रार अधिकारी ने उन्हें शादी का प्रमाणपत्र के साथ ही शादी की शुभकामनाएं भी दीं।

वासू और पद्मशाली की शादी
वासू और पद्मशाली की शादी
अपने परिवारवालों और दोस्तों की तरफ इशारा करते हुए अक्कई पद्मशाली ने कहा, 'सभी लोगों के आने से मुझे काफी खुशी हुई। इनका सपॉर्ट मेरे लिए काफी मायने रखता है।' 

बेंगलुरु में मंगलवार को सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के बाहर हमेशा की तरह कपल इंतजार में लगे हुए थे। लेकिन ये दिन थोड़ा खास था क्योंकि यहां एक कपल ऐसा भी था जिसे अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। ट्रांसजेंडर अक्कई पद्मशाली ऐक्टिविस्ट भी हैं। उन्होंने मंगलवार को दोस्तों और अपने परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में वासुदेव वी. के साथ शादी कर ली। रजिस्टट्रार अधिकारी ने उन्हें शादी का प्रमाणपत्र दिया और शादी की शुभकामनाएं भी दीं। कर्नाटक में पहली बार ऐसा हुआ कि किसा ट्रांसजेंडर कपल ने रजिस्ट्रार ऑफिस में अपनी शादी की हो।

हालांकि इस शादी को संपन्न कराने की काफी तैयारी करनी पड़ी थी। वासुदेव ने कहा कि उन्हें कई सारे डॉक्युमेंट्स तैयार करवाने पड़े। वहीं पद्मशाली ने कहा कि वह कई सारे मुद्दों में व्यस्त थीं। उन्होंने कहा, 'हमने सारी तैयारियां करने के बाद पिछले साल दिसंबर में शादी के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद तीस दिन का समय लगता है। जिस वजह से अब जाकर हमारी शादी संभव हो पाई।' उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ऐसी शादी को मान्यता देना काफी बड़ा और स्वागतयोग्य कदम है। सरकार को ट्रांसजेंडरों की शादियों को आसान करने के लिए कोई योजना भी लानी चाहिए।

वासु और अक्कई पद्मशाली (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
वासु और अक्कई पद्मशाली (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

अपने परिवारवालों और दोस्तों की तरफ इशारा करते हुए अक्कई पद्मशाली ने कहा, 'सभी लोगों के आने से मुझे काफी खुशी हुई। इनका सपॉर्ट मेरे लिए काफी मायने रखता है।' उन्होंने बताया कि कागजी कार्रवाई करने में काफी वक्त लगा, लेकिन सब लोगों ने उनकी हरसंभव मदद की। अक्कई राज्योत्सव पुरस्कार विजेता हैं और उन्होंने ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की खातिर लड़ने के लिए वनडीड एंड स्वतंत्र ऑर्गनाइजेशन की को-फाउंडर हैं। वह लैंगिक अल्पसंख्यक लोगों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जानी जाती हैं। कर्नाटक सरकार ने ट्रांसजेंडर लोगों को अधिकार देने के लिए पिछले साल अक्टूबर ने एक नीति लाई थी।

अक्कई पद्मशाली के हमसफर वासु मगदी इलाके में लॉन्ड्री का बिजनेस चलाते हैं। उन्होंने बताया, 'अक्कई से मेरी मुलाकात 2011 में हुई थी। तब हम अलग-अलग संगठनों के साथ LGBTQ अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे। हम अपने परिवार के साथ मगदी में रहते हैं। हम उसे एक ट्रांसवूमन की तरह नहीं बल्कि एक महिला की तरह ही देखते हैं।' पद्मशाली काम के सिलसिले में अक्सर बेंगलुरु आती रहती हैं। हालांकि पद्मशाली के लिए शादी करना आसान नहीं था। उन्होने बताया कि वह शादी जैसी संस्था में यकीन ही नहीं रखती हैं। लेकिन दोस्तों की सलाह पर उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की और इसमें दोनों के परिवार वालों ने समर्थन भी दिया।

पद्मशाली ने बताया कि बाकी दक्षिण भारतीय राज्यों में ऐसी शादी को रजिस्टर करने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकतर ट्रांसजेंडर लोग अपनी शादी को पब्लिक नहीं करना चाहते क्योंकि उन्हें समाज से बहिष्कृत होने का डर रहता है। इसके अलावा कई सारी कानूनी अड़चनें भी आती हैं जिससे ऐसी शादियां संभव नहीं हो पातीं। पद्मशाली की शादी में आईं केरल की एक ट्रांसवूमन ने बताया कि वह अपने दोस्त के यहां रहती हैं क्योंकि कोई भी उन्हें घर देने को ही राजी नहीं है।

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