पिता और ससुर को बीमार देख युवा ने शुरू किया डायबिटीज से लड़ने के लिए स्टार्टअप

स्टार्टअप शुरू करने के लिए डायबिटिक पिता और ससुर से मिली प्रेरणा...

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पिता और ससुर दोनों को डायबिटीज़ से ग्रस्त देखने के बाद कार्तिकेय जोशी ने इस बीमारी से जुड़े उन पहलुओं को भी देखा जो परिशानियों का सबब बन जाती हैं मरीज़ों के लिये।

साभार: सोशल मीडिया
साभार: सोशल मीडिया
डायबिटीज़ पर काबू पाने के लिये कार्तिकेय ने अमिताभ नागपाल और पार्थ सार्थीपति के साथ मिलकर लाइफ इन कंट्रोल की स्थापना की।

गुड़गांव में स्थापित इस सेट-अप में एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है जहां डॉक्टर मरीज़ के लिये एक ऐसा कार्यक्रम या रूटीन तैयार करते हैं, जिससे मरीज़ को डायबिटीज़ से होने वाले रिस्क को कम किया जा सके।

पिता और ससुर दोनों को डायबिटीज़ से ग्रस्त देखने के बाद कार्तिकेय जोशी ने इस बीमारी से जुड़े उन पहलुओं को भी देखा जो परिशानियों का सबब बन जाती हैं मरीज़ों के लिये। जिन लोगों को इस बीमारी को झेलना पड़ता है, उन्हें इसके साथ होने वाले रिस्क से भी कई तरह की सावधानियां बरतने की ज़रूरत होती है, क्योंकि छोटी से छोटी चूक भी डायबिटीज़ को जानलेवा बना देती है। बकौल कार्तिकेय, “यहां मुझे इस बात का एहसास हुआ कि टेक्नोलॉजी एक ऐसी चीज़ है आज हमारे पास जिससे हम इस बीमारी पर काबू पा सकते हैं या इसके जटिलताओं से खुद को दूर रख सकते हैं। क्योंकि बात सिर्फ दवाईयों की नहीं है, लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव भी ज़रूरी हैं।“

डायबिटीज़ पर काबू पाने के लिये कार्तिकेय ने अमिताभ नागपाल और पार्थ सार्थीपति के साथ मिलकर लाइफ इन कंट्रोल की स्थापना की। गुड़गांव में स्थापित इस सेट-अप में एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है जहां एक डॉक्टर मरीज़ के लिये एक ऐसा कार्यक्रम या रूटीन तैयार करते हैं, जिससे मरीज़ को डायबिटीज़ से होने वाले रिस्क को कम किया जा सके।

डायबिटीज़ ही क्यों?

भारत में डायबिटीज़ से ग्रसित लोगों की संख्या बहुत बड़ी है। पूरी दुनिया के 70 मिलियन पीड़ितों में भारत में केवल इतने में मरीज़ है को वो इस बिमारी के ग्रसित होने वाले देशों में दूसरे नम्बर पर है। एक रिसर्च के मुताबिक अगले 20 सालों में यह आंकड़ा 120 मिलियन तक पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, भारत में होने वाली हर सातवीं मौत डायबिटीज़ से होती है। कार्तिकेय मानते हैं कि इन मरीजों की ज़िंदगी की कुछ साल और कम से कम सही मैनेजमेंट से बढ़ाया ही जा सकता है।

कैसे काम करता है यह?

लाइफ इन कंट्रोल का काम करने का तरीका कुछ ऐसा है कि क्लिनिक के लोग मरीज़ से संपर्क साधते हैं, उन्हें कॉम्प्लीकेशन्स के बारे में जानकारी देते हैं। मरीज़ के लाइफस्टाइल को मैनेज करने के तरीके बताए जाते हैं, और उसके बाद मरीज़ जब उनके साथ जुड़ जाता है, तो डॉक्टर और मरीज़ को एक एप्लीकेशन के ज़रिये कनेक्ट करवा दिया जाता है।इस एप के ज़रिये मरीज़ अपनी हर जानकारी 24*7 डॉक्टर के साथ साझा कर सकता है, और डॉक्टर ज़रूरत के हिसाब से मेहिकेशन और लाइफस्टाइल में बदलाव करते हैं। B2B2C मॉडल पर काम करने वाले इस फाउंडेशन के साथ अब कई मरीज़ जुड़ चुके हैं और उन्होंने अपनी ज़िंदगी में कई बेहतर बदलाव महसूस किये हैं।

लाइफ इन कंट्रोल में एक कोचिंग प्लैटफॉर्म भी शुरू किया है जिसमें हर मरीज़ को एक निजि कोच दिया गया है, जो उनकी लाइपस्टाइल का ख्याल रखे, उनकी डायट और वर्कआउट को भी देखे। फिलहाल हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, पुणे और लखनऊ में लाइफ इन कंट्रोल के सेंटरों पर 40,000 से ज्यादा मरीज़ों का इलाज और रूटीन देखा जा रहा है। 100 डॉक्टरों की टीम के साथ एप के ज़रिये हर मरीज़ बेहतर ज़िंदगी जी रहा है। वेल्दी थेराप्यूटिक्स AI एप के ज़रिये टाइप2 डायबिटीज के मरीज़ों को विशेष आकलन किया जाता है तो डायबेटाकेयर नाम के एक एप और एक डिवाइस के साथ मरीज़ की सेहत का हर दिन का डाटा रिकॉर्ड किया जाता है। हेल्थपिक्स और डायबेटो नाम के भी ऐसे एप लगातार मरीजों के लिये काम कर रहे हैं।

पर कार्तिकेय मानते हैं कि मरीजों को सबसे ज्यादा लाभ उनके क्लिनिकल सेट-अप से हो रहा है। बहुत जल्द इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में हाथ आज़माने वाली है लाइफ इन कंट्रोल ताकि और ज्यादा मरीज़ों तक लाब पहुंचाया जा सके। कुछ इंश्योरेंस कम्पनियों के साथ बात भी जारी है। कोशिश यह है कि टीम में डॉक्टरों की संख्या और बढ़ाई जाए और ज्यादा से ज्यादा मरीज़ों को डायबिटीज़ से होने वाले खतरों के बारे में जानकारी देकर उनकी जिंदगी के अनमोल लम्हों को कुछ और लंबा बना दिया जाए। मेट्रो सिटि तक पहुंच बनाने की चाहत रखने वाले कार्तिकेय चाहते हैं कि वो विदेशों में डायबिटीज़ के मरीज़ों की सेवा करें। पर सबसे पहले कोशिश होगी भारत के एक-एक डायबिटीज़ के मरीज़ तक अपने 50,000 डायबिटोलोजिस्ट के साथ पहुंचे और इस बीमारी से डटकर मुकाबला करें।

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