अपनी रूचि के हिसाब से डिजाइनर केक का वन स्टॉप सेंटर ‘रसनाबेक’

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रसनाबेक डॉट कॉम और ऐप के जरिये करें ऑर्डर

अनूठे डिजाइन और क्रिएटिविटी का कमाल

साल 2010 में शुरू हुआ ‘रसनाबेक’


शौक जब जुनून बन जाता है, तो उसका नतीजा खूबसूरत होता है। कुछ ऐसा ही हुआ रसना गुलाटी और संदीप धमीजा के साथ। इन दोनों के शौक भले अलग अलग थे, लेकिन रास्ता एक था, तभी तो ये दोनों मिलकर आज 'रसनाबेक' नाम से केक स्टूडियो और बेकरी चला रहे हैं। एनसीआर साइबर सिटी गुड़गांव में इनके बनाये केक की मिठास और उसके डिजाइन का कोई मुकाबला नहीं है।

रसनाबेक की सह-संस्थापक और डिजाइनर रसना गुलाटी ने वडोदरा के एमएस विश्वविद्यालय से फूड एंड न्यूट्रिशन में एमएससी किया है। इस काम को शुरू करने से पहले रसना गुलाटी एक एमएनसी और उसके बाद दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में न्यूट्रिशन के तौर पर काम करती थीं। दूसरी ओर 'रसनाबेक' केक स्टूडियो के दूसरे सह-संस्थापक संदीप धमीजा का बेकिंग से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं था। संदीप, रसना गुलाटी के पारिवारिक दोस्त रहे हैं। उन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कस्टमर सर्विस के अलावा कई एडवरटाइजिंग एजेंसियों में काम किया है। संदीप हमेशा चाहते थे कि वो अपना खुद का कारोबार करें। तो वहीं रसना गुलाटी बेकिंग के अपने जुनून को दुनिया के सामने लाना चाहती थीं। जिसके बाद दोनों ने मिलकर तय किया कि क्यों ना इसे कारोबार की शक्ल दी जाए। और साल 2010 में 'रसनाबेक' केक स्टूडियो की शुरूआत हुई।

रसना गुलाटी
रसना गुलाटी

रसना गुलाटी बताती हैं कि उनके पिता भारतीय सेना में थे और घर में उनकी मां अकसर बेकिंग करती थीं। अपनी मां को देखते देखते धीरे धीरे उनका रूझान बेकिंग की ओर होने लगा और कब ये शौक में बदल गया उनको पता ही नहीं चला। रसना गुलाटी का कहना है कि वो हर वक्त चाहती थीं कि कुछ नये तरीके से बेकिंग का काम किया जाए। तब वो केक और पेस्ट्री से हटकर कुछ नया करना चाहती थीं। धीरे धीरे रसना गुलाटी का रूझान केक को डिजाइन करने में बढ़ने लगा। इसके लिए उन्होने केक डिजाइन से जुड़ी ढेर सारी किताबें पढ़नी शुरू की। साथ ही इंटरनेट और टीवी की मदद से इस बात को जानने की कोशिश करती थी कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और प्रोफेशनल लोग किस तरह केक को डिजाइन करते हैं। अपनी कोशिशों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए रसना गुलाटी ने इस दौरान ना सिर्फ केक के नए नए डिजाइन सीखे बल्कि केक बनाने की अलग अलग रेसेपी को भी सीखा। रसना गुलाटी बताती हैं कि जब वो न्यूट्रिशन के तौर पर काम कर रही थीं तब भी उन्होने केक डिजाइन और उसकी रेसेपी से जड़ी जानकारियां इकट्ठा करने का काम नहीं छोड़ा।

संदीप धमीजा
संदीप धमीजा

करीब दस साल पहले उन्होने शाम के वक्त दिल्ली में अपने घर के आसपास स्टॉल लगाने का काम शुरू किया। यहां पर ये ब्राउनी, छोटे केक, चॉकलेट सॉस बेचने का काम करती थीं। उनका कहना है कि ये काम उन्होने इसलिये शुरू किया ताकि वो लोगों के टेस्ट को समझ सकें। रसना की मेहनत रंग लाने लगी और लोगों को उनके बनाये केक काफी पसंद आने लगे। जिसके बाद उन्होने होली, दिवाली, दशहरा, क्रिसमस और त्यौहारों के दूसरे मौकों पर अलग अलग जगहों पर अपने स्टॉल लगाने का काम शुरू किया। इन स्टॉल में वो गिफ्ट देने के लिए खुद के बनाये केक हेम्पर बेचने का काम करती थीं। उनका ये आइडिया काम कर गया जिसके बाद उन्होने न्यूट्रिशन की नौकरी के साथ साथ अपने घर से केक की सप्लाई का काम शुरू कर दिया।

रसना गुलाटी अब जान गई थीं कि ये वो वक्त है जब अपने सपने को पूरा किया जा सकता है। इसलिए उन्होने इसे कारोबार का शक्ल देने का फैसला लिया। लेकिन रसना कारोबार की बारिकियों को नहीं जानती थीं। वहीं दूसरी ओर संदीप तब कुछ नया कारोबार शुरू करने के बारे में सोच रहे थे। ऐसे में दोनों ने तय किया कि क्यों ने अपनी सोच को हकीकत में बदला जाए और साल 2010 में इन दोनों ने मिलकर ‘रसनाबेक’ की शुरूआत की। संदीप जो ‘रसनाबेक’ में सेल्स और सर्विस का काम संभालते हैं उनका कहना है कि उन्होने अपने काम की शुरूआत फेसबुक पेज के सहारे की। धीरे धीरे उनके इस काम ने रफ्तार पकड़ी और आज ‘रसनाबेक’ का गुड़गांव के सेक्टर-49 में केक स्टूडियो और बेकरी तो है ही साथ ही साथ ये लोग रसनाबेक डॉट कॉम नाम से अपनी वेबसाइट और ऐप के जरिये भी केक के ऑर्डर पूरे करते हैं। संदीप के मुताबिक ऐप का ऐनरोइड वर्जन पहले से ही बाजार में आ चुका है जबकि आईओएस वर्जन भी जल्द बाजार में आने वाला है।

रसना गुलाटी का कहना है कि किसी के लिए भी केक बनाने से पहले वो उसकी पसंद जानने की कोशिश करते हैं। जिसके बाद उनको कई तरह के विकल्प दिये जाते हैं। संदीप के मुताबिक “हम लोगों की सोच को केक के जरिये हकीकत में बदलने का काम करते हैं।” ‘रसनाबेक’ में शुरूआती पूंजी रसना और संदीप ने मिलकर लगाई है। आज भी जो कमाई होती है उसमें से वो बड़ा हिस्सा अपने कारोबार के विस्तार पर खर्च करते हैं। ‘रसनाबेक’ के डिजाइनर केक गुड़गांव में ना सिर्फ आम लोग पसंद कर रहे हैं बल्कि कॉरपोरेट सेक्टर की कई कंपनियां इनकी नियमित ग्राहक हैं। इसके अलावा लोगों की डिमांड पर दिल्ली में भी डिजाइनर केक सप्लाई किये जाते हैं। संदीप का कहना है कि आज केक सिर्फ जन्मदिन के मौके पर ही लोग नहीं खरीदते, बल्कि कई दूसरे मौके पर भी केक खरीदने का चलन बड़ा है।

क्वालिटी और डिजाइन ‘रसनाबेक’ की यूएसपी है। केक का डिजाइन रसना ही करती हैं। इसके लिए इनके पास एक छोटी सी टीम भी है। रसनाबेक में 8 लोग काम कर रहे हैं। इन लोगों के बनाये डिजाइनर केक 12 सौ रुपये से शुरू होते हैं जो 10 हजार रुपये तक जाते हैं। शुरूआत में इन लोगों को हर रोज एक केक का ऑर्डर ही मिलता था लेकिन धीरे धीरे काम में विस्तार होता गया आज ये संख्या 20 से अधिक पहुंच गई है। ‘रसनाबेक’ की योजना आने वाले वक्त में दिल्ली और दूसरे शहरों में भी अपने आउटलेट खोलने की है। इसके लिए इनको तलाश है निवेशकों की, ताकि काम में और विस्तार दिया जा सके।

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