‘Schoolguru’ उच्च शिक्षा का बेजोड़ विकल्प

8 राज्यों के 11 विश्वविद्यालयों से गठजोड़1लाख से ज्यादा छात्र ‘Schoolguru’ से जुड़े145 लोग देखते हैं ‘Schoolguru’ का काम2014 में 2 मिलियन डॉलर का मिला निवेश

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देश में उच्च शिक्षा का विस्तार तेजी से हो रहा है। तभी तो भारतीय शिक्षा के बाजार में करीब 50 प्रतिशत हिस्सा उच्च शिक्षा का ही है। इसी बात का अंदाजा ‘Schoolguru’ के संस्थापकों ने साल 2012 में ही लगा लिया था। स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी प्रोत्साहन मिलने के बावजूद ये लोग जानते थे कि भौतिक तौर पर मूलढांचा अपना स्तर बनाने में कामयाब नहीं हो पाएगा। इस समस्या का हल इन लोगों को दूरस्थ शिक्षा में नजर आया। आज ‘Schoolguru’ की कोशिश है कि उनके बनाये उत्पादों का सामाजिक स्तर पर असर पड़े।

‘Schoolguru’ (बाएं से दाएं) सह-संस्थापक शांतनु रूज, अनिल भट्ट, कार्यकारी निदेशक अमिताभ तिवारी
‘Schoolguru’ (बाएं से दाएं) सह-संस्थापक शांतनु रूज, अनिल भट्ट, कार्यकारी निदेशक अमिताभ तिवारी

हालांकि इसके सह-संस्थापक शांतनु रूज के लिए ये नया क्षेत्र नहीं था। 18 साल तक उद्यमी रहे शांतनु ने अपनी उद्यमशीलता की शुरूआत Paradyne से की उसके बाद उन्होने Broadlyne को खड़ा किया। जो विभिन्न कॉलेज और शैक्षिक संस्थानों के लिए इंटरप्राइजेज रिसोर्स प्लानिंग का काम करता था जिसे बाद में उन्होने ‘Glodyne Technoserve’ को बेच दिया। इसी तरह कंपनी के दूसरे सह-संस्थापक रवि रंगन ने भी अपनी कंपनी ‘Comat Technologies’ को ‘Glodyne Technoserve’ को बेच दिया जिसके बाद ये दोनों लोग एक साथ आ गए।

शिक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मजबूत पृष्ठभूमि और उद्यमियता का अनुभव ‘Schoolguru’ को शुरू करने में बड़ा मददगार साबित हुआ और जल्द ही इन लोगों को साथ मिला अनिल भट्ट का। जो अपने आप में अनुभवी पेशेवर थे। शुरूआत में चंद पैसों से शुरू हुए इस उद्यम को डेढ़ साल बाद साल 2014 में 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ। ‘Schoolguru’ प्रौद्योगिकी प्रबंधन का प्लेटफॉर्म है जो सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की सेवाएं देता है। ये न केवल दाखिले, फीस और पूछताछ से जुड़ी सेवाएं संभालती है बल्कि लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, पाठ्यक्रम से जुड़ी प्रबंधन प्रणाली के लिए विश्वविद्यालयों को इन-हाउस स्टॉफ देता है।

‘Schoolguru’ की टीम
‘Schoolguru’ की टीम

इस उद्यम का दावा है कि ये दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देते हैं, जो नियमित रूप से डिग्री प्रदान करने का काम करते हैं। जैसे बीए, बीसीए, एमसीए। इसके अतिरिक्त कंपनी नियमित पाठ्यक्रमों के साथ कौशल और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की जानकारी भी देती है। छात्र को मुद्रित अध्ययन सामग्री के अलावा ऐप से जुड़ा मेमोरी कार्ड भी दिया जाता है। जिसमें खास तौर से निर्मित कोर्स की जानकारी होती है। इसके अलावा ऐप से ये भी पता चल जाता है कि छात्र नियमित तौर पर इंटरनेट का इस्तेमाल करता है या नहीं।

फिलहाल ये स्टार्टअप 8 राज्यों के 11 बड़े विश्वविद्यालयों के साथ जुड़ा है। इन राज्यों में कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तराखंड शामिल हैं। जो 170 अलग अलग तरह के कार्यक्रम 9 विभिन्न स्थानीय भाषाओं चलाता है। इन विश्वविद्यालयों के अलावा 4 और विश्वविद्यालयों के साथ बातचीत अपने अंतिम दौर में है। 5 सदस्यों के साथ शुरू हुए इस उद्यम में 145 लोग अपने सेवाएं दे रहे हैं। जो 11 अलग अलग जगहों से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।

जब भी कोई छात्र ऑनलाइन अपना पंजीकरण कराता है तो फीस को विश्वविद्यालय और Schoolguru के बीच 30 फीसदी से 50 फीसदी तक बंटवारा होता है। साल दर साल ये मॉडल कामयाबी की सीढ़ी चढ़ते जा रहा है तभी तो साल 2013 में जहां इनके पास 1500 छात्र थे वहीं उनकी संख्या साल 2014 तक 6000 हो गई। जबकि साल 2015 के अंत तक इन लोगों ने 1.5 छात्रों को अपने साथ जोड़ने का लक्ष्य रखा है। जबकि इस साल की शुरूआत के 4 महिनों में ही ये संख्या 1 लाख की संख्या को पार कर गई है। साल 2014 में Schoolguru की आय 3.5 करोड़ रुपये थी जिसको बढ़ाकर अब 20 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।

रवि रंगन, सह-संस्थापक, Schoolguru
रवि रंगन, सह-संस्थापक, Schoolguru

अगले दो सालों के अंदर स्टार्टप की योजना 25 विश्वविद्यालयों को अपने साथ जोड़ने की है खास बात ये है कि देश की नहीं विदेशों के विश्वविद्यालयों को भी अपने साथ जोड़ने की योजना है। खासतौर से अफ्रीका और मध्य-पूर्व के देशों पर इन लोगों की नजर है। फिलहाल Schoolguru सीरीज-बी निवेश के तहत 3 मिलियन डॉलर के निवेश के रास्ते तलाश रहे हैं।

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