दो दिलों को रेशमी साड़ी से बांधे 'हीया'

' हीया',उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की हथकरघा दस्तकारी से बनी साडि़यां और घरेलू सजावटी चीजें बनाता है

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कला-उद्यमियों में अपना अलग स्थान रखती हैं जोनाली सैकिया। हीया की संस्थापक। हीया उत्तर-पूर्वी भारत के कम चर्चित समुदायों के कलाकारों से साडि़यां और दस्तकारी के सामान बनवाती हैं। जोनाली ने हीया की शुरुआत से लेकर तमाम पहलूओं पर विस्तार से बातचीत की। जिनमें खासतौर से बताया कि उन्होंने अपना सामाजिक उद्यम खड़ा करने के लिए कार्पोरेट क्षेत्र क्यों छोडा, कैसे उन्हें परिवार की भरपूर सहायता मिली, और ‘हाथ से बनी चीज़ों’से आगे चलकर ‘दिलों से बने ’ बिलकुल अलग उत्पादों तक पहुंचने की उनकी दृष्टि क्या है।

योर स्टोरी : बात की शुरुआत में हमलोग जानना चाहते हैं कि हीया क्या करता है और आप किस समुदाय से मुखातिब रखती हैं।

जोनाली : हीया भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र जैसे कम चर्चित क्षेत्र की हथकरघा दस्तकारी से बने वस्त्रों से साडि़यां, महिलाओं के कपड़े और घरेलू सजावटी चीजें बनाता है। कारीगरों को प्रशिक्षण पाने में सहायता करना, आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण उपलब्ध कराना तथा कारीगरों और उनके बने सामानों एवं संस्कृति को जागरूकता और उत्पादों की उपलब्धता के जरिए मुख्य धारा में लाने का प्रयास करना भी हीया का काम है।

योर स्टोरी : हीया शुरू करने के पहले आप क्या कर रही थीं और आपने अपना रास्ता क्यों बदला?

जोनाली : यह कदम उठाने के पहले मैंनेे अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ लगभग 14 वर्षों तक कार्पोरेट क्षेत्र में काम किया।

मैं लगभग आठ वर्षों तक ऐक्सेंचर में थी - अपने शिक्षा व्यवसाय के अंतिम काम में। जहां बतौर डेलीवरी मैनेजर मेरे काम के लिए एशिया-प्रशांत देशों में विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण देने के लिए घूमना ज़रूरी था। उसके पहले मैं अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे AOL, केली सर्विसेज और NIIT में थी।

अपने कार्पोरेट जीवन में ढेर सारी योजनाओं, आयोजनों और पुरस्कारों के बीच मैंने महसूस किया कि मैं इस मशीन का बहुत मामूली पुर्जा हूं और अच्छी मशीनें मेरे बिना भी चल लेगी जबकि मैं किसी अन्य क्षेत्र में परिवर्तन ला सकती हूं जिसमें इसकी जरूरत है; और यही मेरी चाहत भी थी। मैं अपने अंदर ऐसे विचारों की तलाश में लग गई जिनके जरिए सांगठनिक, बाजार निर्माण, कौशल और क्षमता निर्माण की दृष्टि से हस्तक्षेप निहायत जरूरी था। नजर दौड़ाने पर मुझे महसूस हुआ कि पूर्वोत्तर हैंडलूम से शुरू करके पर्यावरण के अनुकूल, दुर्लभ दस्तकारी सामग्रियों के मामले में संभावना मौजूद है। जो आम तौर पर सभी जगह उपलब्ध नहीं हैं। खास कर उत्तर-पूर्व और असम के इलाके में देश में सर्वाधिक हथकरघे मौजूद हैं और बुनाई की सशक्त संस्कृति भी मौजूद है। विचार बुनाई के कार्य में लगे समूहों के लिए टिकाऊ जीविका का एक माॅडल खड़ा करने का था।

योर स्टोरी : अपने परिवार, जहां आप बड़ी हुईं और जिसने आपके कार्यारंभ पर प्रभाव डाला, उनके बारे में बताइए।

जोनाली : मेरा जन्म मेघालय के शिलौंग में हुआ और आरंभिक बचपन भी वहीं गुजरा। उसके बाद मेरा परिवार गुवाहाटी चला आया जहां मैं 2000 तक रही। इस बीच में थोड़े समय के लिए कोलकाता में भी रही। वर्ष 2001 में मैं बैंगलोर चली गई जहां मैं तब से अभी तक हूं। उत्तर-पूर्व में पलने-बढ़ने के कारण मैंने इस क्षेत्र में वस्त्र और रेशम के क्षेत्र की संपदा देखी है लेकिन मैं इस बात से नाराज़ थी कि वे इस क्षेत्र के बाहर उपलब्ध नहीं थे।

पांच बहनों और एक भाई वाला हमारा परिवार काफी बड़ा था। पिताजी सरकारी सेवा में थे और मां शिक्षिका। माता-पिता, दोनों हमलोगों की शिक्षा और पालन-पोषण को लेकर अत्यंत समर्पित थे। अपनी जिंदगी में धक्का लगने के कारण वे अधिक अवसर नहीं पा सके थे इसलिए वे लोग चाहते थे कि हमलोगों को अवसर मिले। उनलोगों ने हमलोगों को महत्वाकांक्षी, मेहनती और नम्र बनना सिखाया। मेरे परिवार में हर कोई सुशिक्षित है और मेरी एक बहन तो असम की दूसरी महिला चार्टर्ड एकाउंटेंट है। एक अन्य बहन एक प्रतिष्ठित अमेरिकी दवा कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी हैं। मैं अपने परिवार में पहली पीढ़ी की उद्यमी हूं। अपवाद मेरा भाई है जो अपनी चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म चलाता है।

अपना बचपन रेशमी धागों, हथकरघों और दस्तकारी के मामले में संपन्न स्थान पर गुजारने के कारण कंपनी में काम करने के दौरान मुझे खूबसूरत रेशम में दिलचस्पी पैदा हो गई जिन्हें मैं अपने मित्रों के लिए थोड़ा-बहुत ले जाया करती थी। वे उसे पसंद करते थे और मुझसे और अधिक लाने के लिए कहते थे। उसी समय पहली बार मैंने सोचा कि उत्तर-पूर्व के और अधिक उत्पादों के लिए बाजार तैयार करने तथा आर्थिक संभावनाओं में सुधार करने की गुंजाइश हो सकती है।

एक और वजह है - जिस स्थान पर बेहतर कारीगर मौजूद हों लेकिन अच्छी दृष्टि नहीं हो, वहां अच्छी किस्सागोई की जरूरत पड़ती है। उत्तर-पूर्व की तरह प्राकृतिक संसाधनों से धनी अन्य स्थान भी हैं लेकिन वे उपेक्षित और मुख्य धारा के बाजारों से कटे हैं। इसलिए मैं उस स्थान की कहानी उनकी ताकतों के जरिए कहना चाहती थी - उनके वस्त्रों और दस्तकारियों के जरिए दुर्लभ, अनोखे रेशम और बुनकारों की सौंदर्यपरक अभिव्यक्तियों की कहानी। यह पिरामिड की बुनियाद के लिए आर्थिक जीविका विकसित करने का एक पैमाना भी हो सकता था और बेहतर अधिसंरचना, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के जरिए उसके आंतरिक तौर पर सशक्तीकरण का भी।

योर स्टोरी : आपने जो देखा, उसके तकलीफदेह बिंदुओं और अवसरों के बारे में बताना आपने कैसे जारी रखा?

जोनाली : मैंने एरी रेशम की बनी कुछ चीजों का उत्पादन शुरू किया - ऐसे रेशम से जो हर मौसम में एक जैसे गुणों के लिए मशहूर है। मैं इससे बनी पोशाकें या स्टोल जैसी सहायक चीजें बनवाती थी और उन्हें प्रदर्शनियों में तथा ऑनलाइन बेचती थी जिसमें लोगों को रेशम के बारे में शिक्षित करना भी शामिल होता था क्योंकि इसके बारे में लोगों में अच्छी जागरूकता नहीं है। मुझे बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और मैंने और भी चीजें बनवाना तय किया। मैं मिशिंग, बोड़ो और नगा जैसे अन्य बुनकर समूहों के बीच भी काम करने चली गई। चूंकि उत्तर-पूर्व में प्रयुक्त होने वाले करघे अधिकांशतः पारंपरिक करघे हैं जिन पर कम चौड़े कपड़ों की बुनाई होती है इसलिए इनमें से अधिकांश पर एक बार में पूरी साड़ी नहीं बुनी जा सकती है। किसी साड़ी में संपन्न बुनकरों को सृजनात्मक रूप से शामिल करना पड़ता है। हीया की हर साड़ी अनोखी और पर्यावरण के अनुकूल तथा धागों से लेकर रंगों (कुछ तो प्राकृतिक रंग वाले वाले होते हैं) के चुनाव शुरू करके बुनाई तक, सब कुछ बहुत सावधानी से की गई कारीगरी वाली होती है। इसलिए हर हीया साड़ी के मामले में यार्न-टू यार्ड संकल्पना ने अच्छे ग्राहकों को आकर्षित किया है।

हीया की दृष्टि, विकास, कौशल विकास और उद्योग को प्रौद्योगिकी में सक्षम बनाने के लिए सशक्त और हर हाल में कारीगरों, ग्राहकों तथा कारीगरी का सम्मान सुनिश्चित करने की रही है।

योर स्टोरी : आपने कंपनी का नाम, लोगो और उसका आधार कैसे चुना?

जोनाली : ब्रांड नाम का चुनाव खास तौर पर उच्चस्तरीय टेक्सटाइल ब्रांड को ध्यान में रखकर और 'एथनिक', ‘हस्तनिर्मित’या ‘हाथ’नामधारी अन्य शब्दों से हटने के लिहाज से किया गया था। इसीलिए हमलोगों ने ब्रांड का नाम हीया रखा। हीया का अर्थ संस्कृत, असमी और बंगला में हृदय होता है और इसका आशय हुआ कि इस तरह के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के निर्माण में कारीगर अपना कलेजा पिरो देते हैं। चूंकि अच्छी गुणवत्ता वाले सारे हस्तनिर्मित उत्पाद - चाहे वे हाथ से बुने हो, दस्तकारी वाले हों, या हाथ से रंगे हुए हों - कारीगरों के जुनून और प्रेम से तैयार होते हैं। हीया इस बात को महत्व देना चाहता था। मैं हस्तनिर्मित से भी एक कदम आगे बढ़कर कहना चाहती हूं कि ये व्यवसाय के नाम और ट्रेडमार्क (निबंधन लंबित है), दोनो लिहाज से हृदयनिर्मित हैं।

लोगो बहुत सरल हैं लेकिन बहुत सावधानी और बारीकी से डिजाइन किया हुआ है। मैंने अपने एक ग्राफिक डिजाइनर सह प्रबंधन परामर्शदाता मित्र को जैसे ही इसके बारे में बताया, उन्होंने जरूरतों को समझा। लोगो में साधारण फौंट में अक्षर मौजूद हैं जिनमें से एक लाल से और बाकी सब भूरे रंग से लिखे हैं और उनके ऊपर हरे रंग से हृदय की आकृति बनी हुई है। अपूर्णताओं वाले हाथ से बुने उत्पादों की प्रकृति को दर्शाने के लिए, जो इनकी उत्पादों की खास पहचान होते हैं, अक्षरों के किनारे खुरदरे हैं। हरे रंग का हृदय दर्शाता है कि सारी सामग्रियां पर्यावरण के अनुकूल हैं और कुछ सजावट दिलचस्प टेक्सचर और मूल्यवर्धनों को दर्शाने के लिए की गई है।

हमलोगों ने काम की शुरुआत में अनुकूल परिस्थितियों और टेक्सटाइल/ डिजाइन के कारण बैंगलोर को आधारथल के बतौर चुना और रुचि और संवेदनशीलता के साथ-साथ बिक्री के कारण यहां के बाजार को भी हम नहीं भूले।

योर स्टोरी : आपके संस्थापक टीम में और कौन हैं तथा ये सब आपसे कैसे जुड़े?

जोनाली : मेरे अलावा, मेरे पति और मेरी बहनें संस्थापक टीम के अंग हैं और वे सलाहकार के तौर पर शामिल हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हमलोगों की रुचियां एक ही बिंदु पर आकर मिल गईं और दृष्टि तथा योजना के साथ वे साकार भी हो गईं। मेरी सबसे बड़ी बहन अमेरिका में एक कंपनी में वरिष्ठ मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव है और मुझे उनके काफी सहायता मिल जाती है। मेरे पति वरिष्ठ परामर्शदाता हैं और उनकी विशेषज्ञता वित्त तथा रणनीति में है। साथ ही, उनकी रुचि कला, संस्कृति और शिल्प में भी है। दो अन्य बहनें भी इस में शामिल हैं। गुवाहाटी में रहने वाली बहन उत्पादन में मेरी सहायता करती है और बैंगलोर में रहने वाली बहन उत्पादों की पैकेजिंग और बिक्री में।

हमारे साथ इस काम कुल 100 महिलाओं जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा, हमलोगों ने सिलाई की इकाई आउटसोर्स कर रखी है और हमारे साथ पार्टटाइम कर्मचारी भी है। हमलोग लगातार तलाश रहे हैं कि समान सोच वाले लोग लंबे समय के लिए जुड़ें और इसके विस्तार में मदद करें।

योर स्टोरी : आपकी मुख्य पेशकश क्या है? संस्थापना के बाद से इसका कैसा विकास हुआ है?

जोनाली : हमारी मुख्य पेशकश अपने तरह की खास हीया साडि़यां हैं जिनकी उत्तर-पूर्व के विभिन्न भागों की खास बुनाई होती है। हमारे पास भारतीय-पश्चिमी पोशाकों की एक रेंज और स्टोल जैसी सहयोगी चीजें भी हैं। इस साल हमलोग गृहसज्जा संबंधी कपड़े भी ला रहे हैं - कुशन कवर, मेजपोश सेट, रनर, दुपट्टे और स्टोल। आगे हमलोग पर्दे, कंबल, बेड स्प्रेड और इस तरह की अन्य चीजें भी जोड़ते जाएंगे।

योर स्टोरी : आपके लक्ष्य ग्राहक कौन हैं और आप उन तक कैसे पहुंच रही हैं?

जोनाली : मेरी लक्ष्य ग्राहक 30 से 60 वर्ष उम्र की अच्छी रुचि रखने वाली संवदेनशील महिलाएं हैं जो किसी स्टोरी के साथ जुड़ी हस्तनिर्मित वस्तुओं का स्वागत करती हैं। हमारे अधिकांश ग्राहक महानगरों और पहली तथा दूसरी श्रेणी के शहरों के निवासी और अप्रवासी भारतीय हैं।

बेचने के हमारे दो मुख्य तरीके हैं - ऑफलाइन, प्रदर्शनियों के जरिए तथा ऑनलाइन, सोशल मीडिया के जरिए। हमलोग अपना ई-कॉमर्स स्टोर स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं और ऐसे स्टोर की भी तलाश में हैं जिनके जरिए बिक्री कर सकें। अतः इस वर्ष हमारी बिक्री का नजरिया अधिक व्यवस्थित होगा।

योर स्टोरी : अपने क्षेत्र में आपका क्या प्रभाव पड़ रहा है? क्या आप किसी टेस्टिमोनियल के बारे में बता सकती हैं?

जोनाली : ग्राहकों के नजरिए से देखें, तो इन साडि़यों का कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है - दुर्लभ असमी, बोड़ो, नगा और मिशिंग बुनकरों की हाथ से बुनी डिजाइनर साडि़यां और मूगा तथा एरी रेशम जैसे विरल धागे। हर साड़ी की अपनी स्टोरी होती है जिसे हम ग्राहकों को बताते हैं। चूंकि महिलाएं अधिकांशतः मुख्य संकुलों और शैलियों की साडि़यां अनेक वर्षों से पहन रही होती हैं इसलिए ये साडि़यां अपनी नवीनता की वजह से अधिक आकर्षक होती हैं।

कारीगरों और बुनकरों के नजरिए से देखें, तो उनकी आय में 50 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत वृद्धि हुई है क्योंकि हम उनसे सीधा कारोबार करते हैं। संरचना के विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए हमलोग सरकार के साथ भी काम करते हैं। हमलोग डिजाइनिंग, रंग, लेखे, गुणवत्ता नियंत्रण और ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण जैसे विषयों पर उनके प्रशिक्षण सत्र चलाते हैं। हमलोग अपने स्थानों पर बुनकर समुदाय के चिकित्सा शिविर आयोजित करने के लिए भी उत्सुक हैं।

एक टेस्टिमोनियल लेक्सिकॉन पब्लिक रिलेशंस एंड कार्पोरेट कंसल्टेंट्स की मीरा कृष्णन का है : ‘‘मेरा विश्वास है कि हीया एक बड़ी पहल है क्योंकि यह हाथ से बुनी, हथकरघा की अल्पज्ञात खास चीजों को बड़े पैमाने पर अच्छे ग्राहकों के बीच ला रहा है। एक ग्राहक के रूप में हीया की साड़ी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है जिस पर अत्यंत बारीक मलमल से सजे हाथ से अद्भुत पैनल बने हैं। इसे पहनना और देखना सचमुच सुखद है!

योर स्टोरी : सामाजिक उद्यम के रूप में आपका बिजिनस मॉडल क्या है?

जोनाली : यार्न-टू-यार्ड संकल्पना के साथ हमलोग सीधा बुनकरों के साथ काम करते हैं - अधिकांशतः सहकारी समूहों और स्वयं सहायता समूहों के साथ।

हमलोग बुनकरों के विभिन्न समूहों तक जाते हैं, उनके कौशलों और क्षमताओं तथा उत्पादन सामथ्यों को समझने के लिए वहां कुछ दिन रहते हैं और उसके अनुसार काम शुरू करते हैं। जहां जरूरत हो वहां हम प्रशिक्षण देते हैं और संरचना तथा तकनीकी प्रशिक्षण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए हमलोग सरकार के साथ भी काम करते हैं। कुछ खास मामलों में हम धागे के रूप में कार्यशील पूंजी देकर भी उनकी मदद करते हैं। इस वर्ष हमलोग स्वास्थ्य शिविर और काउंसलिंग सत्र आयोजित करने की प्रक्रिया में हैं।

योर स्टोरी : इस स्पेस में और कौन मौजूद है और आप खुद को उनसे अलग कैसे करती हैं?

जोनाली : अगर प्रवेश में कम व्यवधान को ध्यान में रखें, तो इस स्पेस में ढेर सारे बड़े, मंझोले और छोटे प्लेयर मौजूद हैं। फैब इंडिया, मदर अर्थ, इंडियन रूट्स और क्राफ्ट्सविला जैसे बड़े प्लेयर कुछ समय पहले से ही हैं और सबके अपने विशिष्ट उत्पाद हैं। गुड अथ, रंग सूत्र, आइ-टोकरी और जेपोर जैसे कुछ अन्य प्लेयर अच्छा काम कर रहे हैं और अनेक छोटे प्लेयर भी मौजूद हैं। इनमें से अनेक मार्केटप्लेस मॉडल वाले हैं जो अन्य उत्पादों के माल बेचते हैं, वहीं कुछ उत्पादक सह विक्रेता हैं। हमारा मॉडल उत्तर-पूर्व के बुनकरों की खास पहचान के साथ गुणवत्तापूर्ण वस्त्र उत्पादों का उत्पादन करना है जो अन्य लोगों से हमलोगों को अलग करने वाली चीज है।

अगले चरण में, हमलोग शिल्पों पर भी काम करेंगे। लेकिन हमलोगों का विचार हमेशा कारीगरों के साथ मिलकर काम करना और गुणवत्ता तथा मात्रा, दोनो लिहाज से उत्पादन में सुधार करना और इस प्रकार इन अल्पचर्चित संकुलों की जीविका तथा अनन्य वस्त्रों और दस्तकारियों की पहचान में वृद्धि करना रहेगा।

योर स्टोरी : आपको फंडिंग कैसे मिली?

जोनाली : हमलोगों ने जो भी किया है, अपने बूते किया है क्योंकि अभी तक हमलोग व्यक्तिगत बचतों के सहारे काम कर रहे हैं। हालांकि विस्तार का समय आने पर हमलोग वैकल्पिक रास्ते तलाशना चाहेंगे।

योर स्टोरी : आपको अभी तक किस प्रकार का मीडिया कवरेज मिलता रहा है?

जोनाली: पूर्व में, हमलोगों के बारे में मार्च 2013 में टाइम्स ऑफ इंडिया के ह्वाइटफील्ड सप्लिमेंट में छपा था और अगस्त 2013 में हैदराबाद आधारित पत्रिका 'बिजिनस फॉर ऑल' में। इस साल हमलोगों के बारे में एक ऑनलाइन पत्रिका योरफैशनस्टोरीज.कॉम में छपा है।

योर स्टोरी : इस आरंभिक उद्यम ने आपको किस तरह बदला है? आपकी जीवनयात्रा में इससे क्या उतार-चढ़ाव आए हैं?

जोनाली : जिस दिन से मैंने इसकी शुरुआत की, मैंने बहुत कुछ सीखा है -किसी विचार का और उसको कार्यरूप देने का महत्व, लोगों को अपने साथ लाने और ध्यान देने तथा कठिन परिश्रम का महत्व, अपनी सहज स्थिति से बाहर जाने का और अपनी तथा दूसरों की गलतियों से सीखने का महत्व। मैं इस रूप में बदल गई हूं कि मैं समस्याओं और व्यवधानों को अलग ढंग से देखती हूं। वे तब तक वहां मौजूद रहेंगे जब तक उनके समाधान के लिए हाथ नहीं लगाया जाय। इसलिए हर समस्या एक अवसर भी है। और इससे भी महत्वपूर्ण बात है कि यह बात मेरी पकड़ में आ गई है कि उद्यमियों को धैर्यवान होना पड़ता है और उनके लिए अपने मामले में सच्चा होना जरूरी है।

उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं : जब उत्पादों को लोगों से सराहना मिलती है और बुनकर खुश होते हैं तो उत्साह पैदा होता है। और अपने पास पर्याप्त पैसा नहीं होता है और गांवों में उत्पादन अपेक्षित रूप से नहीं हो पाता है तो उत्साह कमजोर होता है।

योर स्टोरी : आप अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और प्रोफेशनल जिंदगी को, अपने काम और परिवार को कैसे संतुलित करती हैं?

जोनाली : मैं अपनी व्यक्तिगत, प्रोफेशनल और सामुदायिक, तीनों तरह की जिंदगी को संतुलित करने में मुख्यतः अपने पति के सहयोग के कारण सक्षम हूं। उन्होंने मुझे सपने देखने और अपनी अभिलाषा पूरी करने की छूट दे रखी है। वह मेरे सचेत रक्षक हैं और मुझसे सवाल पूछते हैं जिनके जवाब मुझे देने होते हैं। वह हर संभव तरीके से मेरे मेंटर, गाइड और पार्टनर हैं। मेरी नौ-वर्षीया बेटी और मेरी सबसे बड़ी बहन मेरी सबसे बड़ी आलोचक और मनोबल बढ़ाने वाली हैं। मेरी अन्य बहनों और बाकी परिवार का भी मुझसे जुड़ाव है और वे लोग मुझे पूरा सहयोग देते हैं।

योर स्टोरी : अगर आपके लिए अतीत में लौटकर दूसरा जीवन शुरू करना संभव होता, तो आप क्या अलग करतीं?

जोनाली : सारा कुछ सकारण घटित होता है। हालांकि मुझे कोई पश्चाताप नहीं है। मैं बस भविष्य के लिए सीख रही हूं। हालांकि पहले मुझे बेहतर जानकारी होती, तो मैं टीम के साथ शुरुआत करती जिससे कि सब कुछ तेजी से होता और अधिक उत्पाद तैयार होते। अब मैं महसूस करती हूं कि मेरे लिए अधिक लोगों तक पहुंचना, उनसे बातचीत करना, उनके साथ यात्रा करना और उनसे सीखना जरूरी है ताकि मैं अपनी योजनाओं को प्रभावी ढंग से निप्पादित कर सकूं।

योर स्टोरी : पाठकों के लिए आपकी क्या सलाह है?

जोनाली : अन्य उद्यमियों को मैं कहना चाहूंगी कि अगर आपके पास कोई ऐसा आइडिया हो जिसके बारे में आपको विश्वास हो कि आप उसे उद्यम में बदल सकते हैं, तो अच्छी तरह योजना बनाइए और उसे कार्यरूप देने के लिए कूद पडि़ए। अगर आप आश्वस्त नहीं हैं, तो बहुत अधिक पैसा या ऊर्जा लगाने के पहले एक मार्गदर्शी अर्थात पायलट योजना को आजमाकर देख लीजिए।

समाज के लिए कुल मिलाकर मैं कहना चाहूंगी कि हमलोगों के लिए हमलोगों के लिए अधिक बराबरी वाला समाज बनाना जरूरी है इसलिए हमलोग इसकी राह तलाशें। महज अच्छी कमाई करना, अपने परिवार पर खर्च करना और अच्छी जिंदगी गुजारना ही काफी नहीं है। अपनी जड़ को जानना और उसकी सराहना करना, उसकी अच्छाइयों को अपनाना और उन्हें मजबूत करना भी बहुत जरूरी है।