हेमंत ने बनाई देश की पहली दिव्यांग योगा आर्टिस्ट टीम

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वैसे तो आपने बहुत सारी एक्रोबेटिक योगा टीमें देखी होंगी। बच्चों को ऊंची ऊंची मिनारें और अजीब-ओ-गरीब करतब करते देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी नेत्रहीन बच्चों को एक्रोबेटिक योगा करते सुना है? नहीं सुना होगा, क्योंकि आज से पहले ऐसा कभी हुआ भी नहीं था। दुनिया के किसी कोने में भले ही हुआ हो, लेकिन अपने देश भारत में तो पहली ही बार हो रहा है, जिसका पूरा श्रेय योगा टीचर हेमंत कुमार शर्मा को जाता है, जिन्होंन 4 साल में दृष्टिबाधित बच्चों की योगा आर्टिस्ट टीम बना दी है और ऐसा वो किसी रूपये-पैसे के लालच में नहीं बल्कि नि:शुल्क करते हैं। अब ये टीम टीवी पर अपने करतब दिखाने को तैयार है... 

'इंडिया बनेका' के मंच पर दृष्टिबाधित बच्चों की योगा आर्टिस्ट टीम के साथ योगा टीचर हेमंत शर्मा
'इंडिया बनेका' के मंच पर दृष्टिबाधित बच्चों की योगा आर्टिस्ट टीम के साथ योगा टीचर हेमंत शर्मा
अखिल भारतीय नेत्रहीन संघ, रघुबीर नगर एवं एसडी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने ना सिर्फ एक्रोबेटिक योगा में अपनी दिव्यांगता के बावजूद महारत हासिल कर ली है, बल्कि विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल करके दुनिया को बता दिया है कि दिव्यांगों की छठी इंद्री (छठा सेंस) उनकी कमी की सारी कसर पूरी कर देती है।

भारत में बहुत सी एक्रोबेटिक योगा की टीमें आपने देखी होंगी जो एक दूसरे की मदद से अलग-अलग तरह की मीनारें चुटकियों में बना लेती हैं, लेकिन यही एक्रोबेटिक योगा जब कोइ बिना देखे करे तो आसान-सी दिखने वाली मीनारें बहुत मुश्किल हो जाती हैं।

एक्रोबेटिक योगा एक ऐसी कला है, जिसमें दो लोगों की आपसी समझ और दोनों के बीच का तालमेल बेहद ज़रूरी है। दोनों को बंद आंखों के साथ एक-दूसरे पर भरोसा करना होता है। ये भरोसा ही है जो योगा के सारे स्टैप्स बंद आंखों के साथ भी कामयाबी से करने की हिम्मत देता है। दांतों तले उंगलियां दबा देने पर मजबूर कर देने वाले इन स्टैप्स को खुली आंखों के साथ करना भी काफी मुश्किल होता है, ऐसे में बंद आंखों के साथ इसे मुमकिन कर दिखाना किसी चमत्कार से कम नहीं। दृष्टिबाधित बच्चों को एक्रोबेटिक सिखाने का काम हेमंत शर्मा करते हैं। बच्चों को ये ट्रेनिंग हेमंत नि:शुल्क देते हैं। हेमंत कहते हैं,

'पहले मुझे लगा ही नहीं कि ये बच्चे भी एक्रोबेटिक कर सकते हैं। चार साल पहले जब ये बच्चे यहां आये थे तब इन्हें बस ध्यान और आसन सिखाया जाता था। लेकिन मैंने पाया कि ये बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में जल्दी सीख लेते हैं। फिर मैंने इन्हें एक्रोबेटिक सिखाना शुरू किया और अब परिणाम सामने है।'

दृष्टिबाधित बच्चों की ये एक्रोबेटिक टीम फर्स्ट नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड, अनमोल अवॉर्ड के साथ-साथ फर्स्ट योगा ओपन नेशनल चैम्पियनशिप, मेरी आवाज सुनो, दिल्ली स्टेट योगा चैम्पियनशिप जैसी बहुत सी प्रतियोगिताओं में सामान्य वर्ग के छात्रों को कड़ी टक्कर दे चुकी है। टीम के बच्चों को काफी सराहना भी मिली है। किरण बेदी, सत्येंद्र जैन, संदीप कुमार, एक्टर प्रवीण कुमार, डॉ. केके अग्रवाल, महाबली सतपाल जैसे लोग इन बच्चों की कला की प्रशंसा कर चुके हैं। कलर्स टीवी पर इंडिया बनेगा नाम से एक टैलेंट शो का आयोजन हुआ जिसमें हेमंत शर्मा की इस एक्रोबेटिक टीम ने हिस्सा लिया और दर्शकों के साथ-साथ जर्जिस का भी दिल जीत लिया। इस प्रोग्राम का आयोजन दिल्ली के इंडिया गेट पर हुआ था, जिसमें योगा आर्टिस्ट ग्रुप के 12 छात्रों ने अपने ऐक्रोबेटिक योगा का प्रदर्शन किया था। इस प्रोग्राम का प्रसारण बहुत जल्दी कलर्स टीवी पर देखने को मिल सकता है।

योगा आर्टिस्ट ग्रुप के दिव्यांग छात्र पिछले 4 सालों से ऐक्रोबेटिक योगा सीख रहे हैं। योगा टीचर हेमंत शर्मा दिल्ली में रहते हैं। हेमंत दृष्टिबाधित इन बच्चों को हर दिन 2 घंटे ऐक्रोबेटिक सीखाते हैं।

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