कभी सड़क पर दुकान लगाने वाला यह शख़्स बना 18 करोड़ की रेस्तरां चेन का मालिक

1.8 करोड़ से शुरू किया था बिजनेस, आज है 18 करोड़ का टर्नओवर...

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विपरीत हालात और संसाधनों का अभाव, आम इंसानों के लिए असफलता का बहाना भी बन सकते हैं और सबब भी। लेकिन मेहनत को ही एकमात्र विकल्प समझने वाले शख़्स के लिए ये चीज़ें, कभी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकतीं। कुछ ऐसी ही कहानी है, तमिलनाडु के सुरेश चिन्नास्वामी की। 12 साल की उम्र से पिता की छोटी सी दुकान में काम करने से लेकर आज 18 करोड़ रुपए की रेस्तरां चेन चलाने तक का सफ़र, सुरेश ने अपनी मेहनत और लगन के दमपर ही तय किया।

सुरेश चिन्नास्वामी और उनका रेस्टोरेंट
सुरेश चिन्नास्वामी और उनका रेस्टोरेंट
सुरेश ने अपनी रेस्तरां की शुरूआत 1.8 करोड़ रुपए के निवेश से की थी। 2017-18 वित्तीय वर्ष में सुरेश के ब्रैंड का टर्नओवर 18 करोड़ रुपए तक था। सुरेश हर महीने अपने मुनाफ़े का 25 प्रतिशत अपने कर्मचारियों को बांटते हैं और इसलिए उनके कर्मचारी काम के माहौल से बेहद ख़ुश भी रहते हैं। 

विपरीत हालात और संसाधनों का अभाव, आम इंसानों के लिए असफलता का बहाना भी बन सकते हैं और सबब भी। लेकिन मेहनत को ही एकमात्र विकल्प समझने वाले शख़्स के लिए ये चीज़ें, कभी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकतीं। कुछ ऐसी ही कहानी है, तमिलनाडु के सुरेश चिन्नास्वामी की। 12 साल की उम्र से पिता की छोटी सी दुकान में काम करने से लेकर आज 18 करोड़ रुपए की रेस्तरां चेन चलाने तक का सफ़र, सुरेश ने अपनी मेहनत और लगन के दमपर ही तय किया। अपने हुनर को सही दिशा देकर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। आइए जानते हैं, सुरेश के संघर्ष और फिर लगातार सफलताओं की सीढ़ियां चढ़ने की कहानी....

सुरेश के पिता ने 1979 में खाने की दुकान चलाना शुरू किया था। वह अस्थाई दुकानों के सहारे किसी तरह अपने परिवार को पालते थे। सुरेश के पिता ने चेन्नई के बेसंत नगर बीच और मरीना बीच पर दुकानें लगाईं। इसके बाद उन्होंने 1987 में अडयार में एक किराए की जगह पर अपनी पहली स्थाई दुकान शुरू की। आस-पास के दिहाड़ी मजदूरों को अच्छे और सस्ते खाने का विकल्प देकर, उन्होंने अच्छी कमाई की। किन्हीं कारणों से सुरेश के परिवार को गांव लौटना पड़ा और उन्होंने वहीं पर एक छोटी सी दुकान शुरू की। इस दौरान सुरेश तीन साल तक स्कूल नहीं जा सके। सुरेश अपने पिता के साथ दुकान के कामों में हांथ बटाने लगे और उनका तीन साल बड़ा भाई खेती का काम देखने लगा।

गांव वापस आने का निर्णय ठीक साबित नहीं हुआ और सुरेश के पिता का काम डूबने लगा। पूरे परिवार को वापस चेन्नई आना पड़ा। सुरेश ने मान लिया था कि अब उन्हें ही अपने पिता का साथ देना है और इस बिज़नेस को आगे बढ़ाना है। पिता के साथ-साथ उन्होंने अपनी दुकान भी शुरू कर दी और इस दौरान उनकी उम्र महज़ 15 साल थी। सुरेश की दुकान, उनके पिता की दुकान से भी बेहतर कमाई करने लगी। इस दौरान ही सुरेश की ज़िंदगी ने एक अहम मोड़ लिया और सुरेश ने एक बुज़ुर्ग ग्राहक की सलाह पर दसवीं की परीक्षा का फ़ॉर्म भर दिया। किसी तरह वह परीक्षा में पास भी हो गए और उनकी पढ़ाई का सिलसिला भी दुकान के साथ ही चल पड़ा।

दोबारा पढ़ाई शुरू करना सुरेश के लिए आसान नहीं था। दिनभर दुकान का काम देखने के बाद और बेहद थक जाने के बाद पढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुरेश ने इस चुनौती को भी पार कर लिया। इस दौरान सुरेश को स्कूल में उलाहना का सामना भी करना पड़ा। सुरेश के साथी, उन्हें चिढ़ाते थे कि वह सड़क पर ठेला लगाते हैं और खाना बेचते हैं।

इसके बावजूद सुरेश रुके नहीं और 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने सांध्यकालीन कोर्स के माध्यम से कॉर्पोरेट सेक्रेटरीशिप में बीए की डिग्री ली। 1998 में उन्होंने मद्रास होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में दाखिला ले लिया। इसके बाद 2001 से 2003 के बीच उन्होंने मार्केटिंग से एमबीए की डिग्री पूरी की। एक क्रूज़ शिप में बतौर कुक नौकरी पाने के लिए उन्होंने केटरिंग और हॉस्पिटैलिटी के कोर्स भी किए। सुरेश की मेहनत रंग लाई और उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी क्रूज़ सर्विसों में से एक, कार्निवल क्रूज़ लाइन में नौकरी मिल गई। इसके बाद सुरेश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। क्रूज़ सर्विस के बाद उन्होंने ग्रैंड केमैन आईलैंड में होटल रित्ज़ कार्लटन में बतौर शेफ़ काम किया। अपनी कमाई को बढ़ाने के लिए सुरेश ने शेफ़ के साथ-साथ हाउसकीपिंग का काम भी किया। सुरेश ने 2013 तक होटल रित्ज़ कार्लटन में काम किया। इस समय तक वह मासिक रूप से 4-5 लाख रुपए कमाने लगे थे।

2013 में ही सुरेश अपनी पत्नी दिव्या के साथ चेन्नई वापस आ गए। सुरेश ने 2008 में दिव्या के साथ शादी की थी और इसके बाद से वे दोनों साथ ही काम कर रहे थे। विदेश से वापस आने के बाद, उन्होंने चेन्नई की एक रेस्तरां चेन में दो सालों तक काम किया और बिज़नेस को आगे बढ़ाया। यहीं से सुरेश के अंदर अपना ख़ुद का रेस्तरां शुरू करने का आत्मविश्वास आया। 2016 में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ ख़ुद की रेस्तरां चेन खोलने का फ़ैसला लिया और पेरंबूर के स्पेक्ट्रम मॉल के फ़ूड कोर्ट में 10 हज़ार स्कवेयर फ़ीट के एरिया में अपना रेस्तरां 'सैमीज़ डोसाकल्ल' शुरू किया। आने वाले कुछ महीनों में 3 करोड़ की लागत के साथ सुरेश ने अपने रेस्तरां की पांच ब्रांचें और खोल दीं। सुरेश के सभी रेस्तरां में बैंक्वेट हॉल और मेहमानों के लिए कमरों की सुविधा है। इन सुविधाओं के ज़रिए भी कंपनी पर्याप्त मुनाफ़ा कमाती है।

सुरेश ने अपनी रेस्तरां की शुरूआत 1.8 करोड़ रुपए के निवेश से की थी। 2017-18 वित्तीय वर्ष में सुरेश के ब्रैंड का टर्नओवर 18 करोड़ रुपए तक था। सुरेश हर महीने अपने मुनाफ़े का 25 प्रतिशत अपने कर्मचारियों को बांटते हैं और इसलिए उनके कर्मचारी काम के माहौल से बेहद ख़ुश भी रहते हैं। हाल में सुरेश की कंपनी में 400 कर्मचारी काम कर रहे हैं। बिज़नेस बढ़ाने के लिए सुरेश की स्पष्ट रणनीति है। वह अपने एक वेंचर का मुनाफ़ा, दूसरे की शुरूआत करने में लगा देते हैं और इसी तरह धीरे-धीरे उनकी चेन बढ़ती जा रही है। साथ ही, कुछ प्राइवेट इन्वेस्टर्स के साथ भी उनका संपर्क है और इसलिए किसी भी तरह की कमी के दौरान, इन इनवेस्टर्स के ज़रिए ही निवेश की व्यवस्था हो जाती है।

सुरेश के माता-पिता भी उनके काम की देखभाल करते हैं और समय-समय पर उनके रेस्तरां का दौरा करके, क्वॉलिटी चेक करते रहते हैं। फ़िलहाल उनका भाई, यूएस में बतौर सॉफ़्टवेयर इंजीनियर काम कर रहा है। सुरेश की पत्नी दिव्या, बच्चों के लिए योगा और म्यूज़िक क्लासेज़ चलाती हैं।

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