तलाक और हलाला के खिलाफ निदा खान की जंग

तीन तलाक और निकाह हलाला के खिलाफ लड़ने वाली बरेली (उ.प्र.) की निदा खान...

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महिला किसी भी जाति-समुदाय की हो, उसकी अपनी एक जात है स्त्री-जात, घरेलू हिंसा, तीन तलाक के फतवों, बहु-विवाह, पुरुष वर्चस्व जैसे तमाम अलग-अलग मोरचों पर लड़ती हुई स्त्री-जात। तीन तलाक और निकाह हलाला के खिलाफ बरेली (उ.प्र.) की निदा खान भी लड़ रही हैं। वह कहती हैं - 'मैं इस लड़ाई को दूर तक ले जाऊंगी। इन मौलवियों के मन में डर बैठाना बहुत जरूरी है। मेरी मांग है कि शरई अदालतों में औरतों को भी काजी बनाने की व्यवस्था होनी चाहिए।'

निदा खान (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
निदा खान (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
निदा खान को लगातार धमकियां मिल रही हैं। उनको चेतावनी दी जा रही है कि वह तीन दिन के भीतर देश छोड़ दें वर्ना उन पर पत्थरों से हमला किया जाएगा। बरेली की अदालत से निदा को राहत मिली है। 

बरेली (उ.प्र.) की निदा खान की शादी आला हजरत खानदान के उस्मान रजा खां उर्फ अंजुम मियां के बेटे शीरान रजा खां से 16 जुलाई 2015 को हुई थी। आठ माह के भीतर ही पांच फरवरी 2016 को शीरान ने उनको तीन तलाक दे दिया। उसके बाद निदा ने अदालत का सहारा लिया है। अब वह खुद तलाकशुदा हैं और तीन तलाक के खिलाफ आवाज भी उठा रही हैं।

बरेली की विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत के दारुल इफ्ता से शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने फतवा जारी किया है, 'अगर निदा खान बीमार पड़ती हैं तो उन्हें कोई दवा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। उनकी मौत हो जाती है तो न ही कोई उनके जनाजे में शामिल होगा, न नमाज अदा करेगा। अगर कोई उनकी मदद करता है तो उसे भी यही सजा मिलेगी। उनसे तबतक कोई मुस्लिम संपर्क नहीं रखेगा, जब तक वह सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांग लेती हैं और इस्लाम विरोधी स्टैंड को छोड़ती नहीं हैं।'

निदा खान को लगातार धमकियां मिल रही हैं। उनको चेतावनी दी जा रही है कि वह तीन दिन के भीतर देश छोड़ दें वर्ना उन पर पत्थरों से हमला किया जाएगा। बरेली की अदालत से निदा को राहत मिली है। अदालत ने शौहर द्वारा उन्हें दिए गए तीन तलाक को अवैध घोषित कर दिया है। उनके शौहर शीरन की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने घरेलू हिंसा के केस पर स्टे लगाने की मांग की थी।

निदा अपनी ही लड़ाई नहीं लड़ रहीं, बल्कि वह अपने एनजीओ 'आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी' की अध्यक्ष की हैसियत से तलाकशुदा अन्य महिलाओं की भी मदद कर रही हैं। उन्होंने तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ भी अभियान छेड़ रखा है। निदा कहती हैं- 'फतवा जारी करने वाले पाकिस्तान चले जाएं। हिन्दुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है। यहां दो कानून नहीं चलेंगे। किसी मुस्लिम को इस्लाम से खारिज करने की हैसियत किसी की नहीं है। सिर्फ अल्लाह ही गुनहगार और बेगुनाह का फैसला कर सकता है। फतवा जारी कर उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया गया है। समाज से उनका बहिष्कार होने लगा है। उनके घर पर फतवा जारी होने से पहले रोजाना नियाज करने के लिए मौलवी आया करते थे। जब से फतवा जारी कर उन्हे इस्लाम से खारिज किया गया है, तब से उनके घर कोई भी मुफ़्ती या मौलवी नियाज के लिए नहीं आ रहा है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में मिलने के लिए प्रॉपर समय लूंगी। इस बारे में उनसे अपील करूंगी।'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने शाहजहांपुर दौरे के वक्त निदा खान से मिलेंगे। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहत नकवी इस दौरान निदा खान के साथ रहेंगी। भाजपा की ओर से निदा को पीएम से मिलने का आधिकारिक न्यौता मिल चुका है। यद्यपि निदा की लड़ाई को खूब सियासी रंग भी दिए जा रहे हैं। राज्‍यसभा सांसद अमर सिंह ने एक विडियो मेसेज ट्वीट किया है- 'मुल्‍लाओं की नजर तीन तलाक की पीड़‍िता निदा खान काफिर होंगी लेकिन वह मां, बीवी, महबूबा भी हैं। उन तमाम महिलाओं की नजर में इस बहन की इज्‍जत और बढ़ गई जो तीन तलाक और निकाह हलाला से पीड़‍ित हैं। मुझे ताज्‍जुब होता है जब कई नेता इस्‍लाम के आला हजरतों से राय मांगते हैं। नेता वह नहीं है, जो लोगों की राय पर चले बल्कि नेता वह है, जो लोगों को अपनी राय पर चलने के लिए मजबूर कर दे। बड़े दिनों बाद देश को एक ऐसा नेता (नरेंद्र मोदी) मिला है, जो राय देता है, नोटबंदी, तीन तलाक और हलाला पर। इस नेता की लोग बात मानें तो ठीक नहीं तो वह मनवाने की क्षमता रखता है।'

निदा के खिलाफ ये भी फतवा जारी किया गया था- 'जो भी निदा के बाल काटकर लाएगा, उसे 11786 रुपए का इनाम दिया जाएगा।' एक्टर फरहान अख्तर ने ट्वीट किया कि यूपी पुलिस से उनको सुरक्षा मिलनी चाहिए। अब उनको पुलिस सुरक्षा मिल गई है। इसके साथ ही बरेली के एसपी सिटी अभिनंदन सिंह ने दरगाह आला हजरत के दारुल इफ्ता से फतवा जारी करने वाले शहर काज़ी और शहर इमाम समेत फतवा सुनाने वाले चार अन्य मौलवियों के खिलाफ थाना बारादरी पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। फतवा जारी करने वाले मौलवियों और मुफ्ती के खिलाफ केस दर्ज हो गया है। हालांकि फतवे की कॉपी में निदा के बजाए 'हिंदा' नाम लिखा है। इससे पहले निदा ने एसपी ऑफिस पहुंचकर अपने खिलाफ फतवा जारी करने वाले दरगाह आला हजरत के मुफ़्ती और मौलवियों के खिलाफ तहरीर दी थी। एसपी बताते हैं कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर संघर्षरत निदा कहती हैं- 'सोच-समझकर महिलाओं के वजूद को खत्म करने की धर्म के ठेकेदारों द्वारा साजिश चल रही है। हम बेशक 21वीं सदी और शिक्षित समाज की दुहाई दें लेकिन वास्तविकता यही है कि फतवा जारी होने के बाद से ही मेरा सामाजिक बहिष्कार हो गया। मैं और मेरा परिवार डर के साए में जी रहे हैं। लगता है कि कभी भी कहीं से कोई भीड़ आकर कुछ भी कर सकती है। शरीयत में जो हमारे हुकूक हैं, वे दरअसल हमें मिले ही नहीं। इन उलेमाओं ने शरीया को अपनी जागीर बना लिया है। महिलाओं से रंजिश लेने के लिए फतवे जारी किए जा रहे हैं। इन्हें मुस्लिम महिलाओं का शिक्षित होना, उनका काम करना, यहां तक कि गूगल इस्तेमाल करना नागवारा है। दरअसल, ये मुस्लिम महिलाओं को सशक्त होते देखना ही नहीं चाहते। मैं अपनी ट्रस्ट के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं की मदद कर रही हूं, उन्हें अधिकारों को लेकर जागरूक बना रही हूं। यही बात इनके गले नहीं उतर रही।'

निदा कहती हैं, 'हम आजाद मुल्क में रह रहे हैं। ये होते कौन हैं, मुझे इस्लाम से बेदखल करने और मुल्क छोड़ने का फरमान जारी करने वाले। इस्लाम में महिलाओं को जो हक दिए गए हैं, असल में हमें उनसे महरूम रखा गया है। इन पाखंडी मौलवियों ने इस्लाम का मजाक बनाकर रख दिया है। किसी को यकीन नहीं होगा, बरेली में हालात ऐसे हैं कि इन मौलवियों ने हलाला को बिजनेस और बरेली को तालिबान बना दिया है। मैं इस लड़ाई को दूर तक ले जाऊंगी। इन मौलवियों के मन में डर बैठाना बहुत जरूरी है। मेरी मांग है कि शरई अदालतों में औरतों को भी काजी बनाने की व्यवस्था होनी चाहिए।'

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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