राजस्थान की वो बहादुर महिला एसीपी जिन्होंने ढहाया आसाराम का अभेद्य दुर्ग

आसाराम का अभेद्य दुर्ग ढहाने वाली एसीपी चंचल...

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आज सजायाफ्ता आसाराम जेल की रोटियां तोड़ने के लिए मजबूर है लेकिन उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने में एक जांबाज महिला पुलिस अधिकारी का सबसे बड़ा रोल रहा है। वह हैं राजस्थान पुलिस की एसीपी चंचल मिश्रा।

चंचल मिश्रा (फोटो साभार- पत्रिका एवं भास्कर)
चंचल मिश्रा (फोटो साभार- पत्रिका एवं भास्कर)
दुष्कर्म के आरोप लगने के बाद लाखों समर्थकों वाले आसाराम को दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तार करना आसान काम नहीं था लेकिन ऐसा कर दिखाया राजस्थान की महिला पुलिस अधिकारी चंचल मिश्रा ने। इस पूरे मामले की चार्जशीट भी चंचल मिश्रा ने ही तैयार की थी।

कुकर्म में सजायाफ्ता आसाराम अब जेल की रोटियां तोड़ रहे हैं। अब मीडिया में भी उनके एक-से-एक कारनामे सामने आने लगे हैं। ऐसे में एक रोचक-रोमांचक प्रकरण है महिला आइपीएस की बहादुरी का। डीएसपी चंचल मिश्रा ने आसाराम मामले में हाथ नहीं डाला होता, इस छुपेरुस्तम बाबा के गिरेबां तक कानून के हाथ शायद ही आसानी से पहुंच पाते। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के आसाराम मामले में जांच अधिकारी एवं राजस्थान की एसीपी चंचल मिश्रा पर शार्प शूटर के हमले की साजिश का अभी हाल ही में खुलासा हुआ है। उनको पिछले दिनो चार सशस्त्र पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में कोर्ट में पेश होना पड़ा।

चंचल मिश्रा को आसाराम के समर्थकों की ओर से भी लगातार धमकियों मिलती रही हैं। आसाराम के शिष्य और शार्प शूटर कार्तिक हल्दर ने चंचल मिश्रा पर हमले की साजिश का खुलासा किया था। उसने पुलिस को बताया था कि गवाहों की हत्या कराने और एके-47 खरीदने के लिए पूरे देश से आसाराम के सेवकों ने 25 लाख रुपए इकट्ठे किए थे। एसीपी चंचल मिश्रा इस समय राजस्थान में मांडल की डीएसपी हैं। इससे पहले वह जोधपुर में तैनात थीं। जोधपुर पोस्टिंग के दौरान ही उन्होंने आसाराम की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अब याद करिए फिल्म 'सिंघम' का एक डॉयलॉग - ‘गलत क्‍या इसे जानने से फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है गलत को सही करने से।’ दुष्कर्म के आरोप लगने के बाद लाखों समर्थकों वाले आसाराम को दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तार करना आसान काम नहीं था लेकिन ऐसा कर दिखाया राजस्थान की महिला पुलिस अधिकारी चंचल मिश्रा ने। इस पूरे मामले की चार्जशीट भी चंचल मिश्रा ने ही तैयार की थी। वकीलों के मुताबिक इस मामले की सबसे मजबूत कड़ी चार्जशीट ही रही। इसके चलते ही आसाराम को एक बार भी जमानत नहीं मिल पाई। गवाही के दौरान भी चंचल मिश्रा सख्ती से डटी रहीं। चंचल मिश्रा बताती हैं कि हम जब आसाराम को पकड़ने गए तो वह हजारों समर्थकों से घिरा हुआ था।

जब आश्रम के लोगों ने हमें सहयोग नहीं दिया तो हमें सख्ती भी करनी पड़ी, लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस व राजस्थान पुलिस के अधिकारियों के बीच समन्वय बहुत अच्छा था और इसी कारण यह गिरफ्तारी हो पाई। गौरतलब है कि राजस्थान में इस ऑपरेशन की रणनीति जोधपुर के तत्कालीन डीसीपी अजयपाल लांबा ने तैयार की थी। वह बताते हैं कि चुनौतियां तो कई तरह की थीं, क्योंकि आसाराम का कद बहुत बड़ा था। इस केस का सबसे मजबूत पहलू नाबालिग पीड़िता के बयान थे। पीड़िता के बयान को साबित करने वाले सभी तथ्यों व सबूतों को सतर्कता के साथ जुटाया गया और चार्जशीट बहुत अच्छी बनाई गई।

लड़की ने जोधपुर से लगभग 38 किलोमीटर दूर आसाराम के मणई गांव स्थित आश्रम का एकदम सटीक नक्शा बताया, जहां उसका शोषण किया गया था। तब लगा कि कोई व्यक्ति मौका-ए-वारदात का नक्शा बिना वहां का रास्ता कैसे बता सकता है। वहीं से जांच शुरू की। बाद में पता चला कि मेरठ के एक परिवार ने भी स्थानीय पुलिस से आसाराम के खिलाफ ऐसी ही शिकायत की थी। जब पुलिस उस परिवार से मिलने गई तो परिवार ने शिकायत करने से इनकार कर दिया। इस पर पुलिस का शक और गहरा हो गया।

इसके बाद पुलिस को बड़ी सफलता 31 अगस्त को हाथ लगी। तब तक आसाराम का कुछ पता नहीं था। फिर भी चंचल मिश्रा के नेतृत्व में पांच पुलिस अफसरों और छह कमांडो की एक टीम इंदौर स्थित आसाराम के आश्रम जा धमकी। तभी जोधपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कह देने पर कि आसाराम पुलिस के रडार पर है, वह बौखलाकर कर भोपाल एयरपोर्ट पर पहुंच गया। यह सब मीडिया को भी बता दिया गया। पत्रकार आसाराम का पीछा करने लगे। इसी बीच आसाराम अपने इंदौर स्थित आश्रम में पहुंच गया लेकिन उसे ये पता नहीं था कि चंचल मिश्रा पूरी टीम के साथ पहले से डंटी हुई थीं। राजस्थान पुलिस फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही थी।

बाबा ने इंदौर को बहुच सोच समझकर अपने बचने का सबसे सुरक्षित ठिखाना मान रखा था। उस दिन आश्रम में भी तैयारियां कुछ ऐसी ही दिखीं. खंडवा रोड स्थित इंदौर के इस आश्रम में हजारों की संख्या में भक्त जुटे थे। माहौल रोज से अलग था। आश्रम के अंदर के कार्यकर्ता हर आदमी को घूरकर देख रहे थे। सब पर नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान राजस्थान पुलिस ने गूगल मैप से आश्रम का चप्पा-चप्पा छान मारा था।

चंचल मिश्रा के नेतृत्व में वह सादी वर्दी में सक्रिय थी। इससे आश्रम के अंदर की रिपोर्ट आने लगी। बाकी जगहों पर वर्दीधारी तैनात थे। आश्रम के आसपास सड़कों से लेकर अंदर तक हरी मैटें बिछा दीं, फिर उस पर समर्थकों को लिटा दिया गया ताकि पुलिस की गाड़ियां आश्रम के अंदर ना आ सकें पर पुलिस ने इस तरह के खेलों को खत्म करने के पर्याप्त बंदोबस्त कर रखे थे। 31 अगस्त की सुबह एसीपी चंचल मिश्र के नेतृत्व में जोधपुर पुलिस आश्रम के भीतर पहुंची. साथ में थे इंदौर के डीआईजी राकेश गुप्ता भी, जो इंदौर पुलिस की कमान संभाल रहे थे। आश्रम के पदाधिकारी ये मानने को तैयार नहीं थे कि आसाराम वहां मौजूद है। आसाराम के इंदौर आश्रम पहुंचने और उसकी गिरफ्तारी को रोकने के लिए दो लाख समर्थकों को इंदौर आने का आह्वान पहले ही कर दिया गया था। खंडवा रोड स्थित आश्रम के बाहर समर्थकों का भारी जमावड़ा लगा हुआ था। इनको कंट्रोल करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

चंचल मिश्रा के पास पक्का इनपुट था कि आसाराम 30 अगस्त की रात भोपाल से देवास होते हुए इंदौर आश्रम आ गया है। बाद में नारायण साईं ने खुद भी बता दिया कि आसाराम यहीं हैं। अब दोनों ही अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा चैलेंज था कि कोई अफरातफरी न मचे। समर्थकों को काबू में रखा जा सके। आरोपी आसाराम भाग न सके। पुलिस को कुछ गुप्त रास्तों के बारे में पता चला था तो उनको निपटाने के इंतजाम भी कर लिए गए थे। आसाराम ने दिन में खुद को एक कोठरी में बंद कर लिया। पुलिस चाहती थी कि आसाराम को मना लिया जाए और बिना बवाल उसे गिरफ्तार कर लिया जाए। इसके लिए कई शांतिदूत भेजे गए। पर काम नहीं बना। आसाराम सरेंडर करने को तैयार नहीं था।

अब चंचल मिश्रा ने अपना अभियान तेज किया। डीएम आकाश त्रिपाठी और एसपी अनिल कुशवाहा मौके पर आ गए। कमरों के अंदर तलाश शुरू हुई। आखिरकार पुलिस उस कमरे के बाहर पहुंच गई, जहां आसाराम ने खुद को बंद कर रखा था। चंचल मिश्र ने चिल्लाते हुआ कहा – दरवाजा खोल दो आसाराम वरना दरवाजा तोड़ दूंगी। आसाराम समझ गया कि अब कुछ नहीं हो सकता। उसने दरवाजा खोला। पुलिस के पैरों पर गिरकर कहने लगा जितने चाहो, पैसे ले लो, जो चाहो मांग लो पर गिरफ्तारी टाल दो। बात न बनते देख आत्महत्या की धमकी देने लगा। आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हजारों समर्थकों के बीच उसे ले जाया गया।

कुछ समर्थक पुलिस की गाड़ी के आगे लेट गए, पर पुलिस की तैयारी के आगे सब फेल हो गया। आसाराम के सारे नाटक, सारी तैयारियां धरी रह गईं। उसने कहा कि वो अपनी मर्सिडीस से जाना चाहता है। पुलिस ने इससे इनकार कर दिया और अपनी गाड़ी में लेकर गई। चंचल मिश्रा उसे लेकर सीधे एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां से उसे फ्लाइट से जोधपुर ले जाया गया। अब तो वह अदालत से सजायाफ्ता हो चुका है लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एसीपी चंचल मिश्रा की जांबाजी ने ये साबित कर दिया कि कानून की रक्षा के लिए उन्होंने एक तरह से मानो अपना जीवन ही दांव पर लगा दिया। उसी का नतीजा था कि आसाराम को जहां होना चाहिए था, वहां अदालत ने उसे भेज दिया।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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