छोटे और गरीब किसानों की तरफ मदद के हाथ बढ़ाता ‘जननी एग्री सर्व’

ग्रामीण स्तर पर 3 से 5 गांवों के लिये अपने जननी कियोस्क खोलकर किसानों की करते हैं सहायताबुवाई से लेकर फसल की कटाई तक आवश्यक हर प्रकार की जानकारी और उत्पाद करवाते है मुहैयाकिसानों को बैंकों से लोन दिलवाने के अलावा उनकी फसल का बीमा करवाने में भी करते हैं मददवर्ष 2007 में संचालन प्रारंभ करने के बाद से अबतक 10 हजार से अधिक किसानों की कर चुके है मदद

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योरस्टोरी के साथ के विशेष बातचीत में सुंदरा राजन हमें बताती हैं कि कैसे Janani AgriServe (जननी एग्रीसर्व) अभिनव, नवीनतम और अनुकूलित कृषि उत्पादों और सेवाओं को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाने के लिये कृषि विज्ञान और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करता है।


कृपया हमें अपनी परियोजना के बारे में विस्तार से बताएं

‘जननी एग्रीसर्व’ कृषि वस्तुओ (Agri Commodities) के खरीददारों और सीधे किसानों के खेतों के बीच एक कृषि मूल्य श्रृंखला (Agri Value Chain) तैयार करता है जो एक बिल्कुल अनोखे और नवीनतम सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्लेटफार्म पर संचालित होती है और इसकी मदद से कृषि श्रृंखला के नेटवर्क में जुड़े सभी पक्ष समकेतिक रूप से आपस में अपनी व्यापार संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं।


यह पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित होती है?

एक ग्रामीण स्तर का कियोस्क (3 से 5 गांवों के 1500 से 2000 किसानों के लिये एक कियोस्क) स्थापित किया जाता है जिसे एक स्थानीय फ्रेंचाइज़ी संचालित करता है। यह फ्रेंचाइज़ी एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ), स्थानीय कृषि व्यवसाई, स्वयं सहायता समूह या किसान सहकारी समितियों में से कोई भी हो सकता है। परिचालन क्षमता और प्रबंधन प्रयोजनों के बेहतर संचालन के लिये इन ग्राम स्तरीय कियोस्क को मंडल/तहसील/ब्लाॅक स्तर पर एग्रीगेट किया जाता है। एक मंडल स्तरीय एग्रीगेशन केंद्र को सिर्फ एक कृषि स्नातक या फिर प्रबंधन में स्नातक द्वारा ही खोला और संचालित किया जाता है। जिला स्तर पर अपने प्रत्येक कार्य के संचालन के लिये ‘जननी’ जिला केंद्रो पर अपने लोगों को ही तैनात करता है।

इन कियोस्कों से निम्नलिखित सेवाएं प्रदान की जाती हैंः


  1. छोटे किसानों के लिये कृषि परामर्ष - बुवाई से पहले से लेकर फसल के कटने तक लगातार - साप्ताहिक आधार पर - किसान की फसल के लिये विशेष रूप से - डिजिटल रूप से फसल की स्थिति के डेटा को इकट्ठा करने से (जैसे पौधे की वृद्धि, रोग के लक्षण, संयंत्र के रंग के परिवर्तन के रूप में, मिट्टी की स्थिति ...) लेकर उसे हैदराबाद में कृषि प्रयोगशाला में कृषि वैज्ञानिकों के लिए भेजने तक - ये कृषि वैज्ञानिक इस डाटा का विश्लेषण करते हैं और फसल की समस्या का समाधान खोजते हैं - इसके बाद कियोस्क के माध्यम से संबंधित किसान को एक एसएमएसस या प्रिंटआउट भेजा जाता है जिसमें उसे समस्या के बारे में विस्तार से बताते हुए अगले सप्ताह में अपनाने वाले समाधान की जानकारी दी जाती है - यह चक्र एक सक्रिय आधार पर जारी रहता है - इस सेवा के लिये हमारी परियोजना ने आईआईआईटीएच (इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फाॅर इंर्फामेशन टेक्नोलाॅजी, हैदराबाद) की ई-सागू और भारत सरकार के आईटी मंत्रालय से जुड़े मीडियालैब एशिया के साथ हाथ मिलाया है - इस सेवा के माध्यम से किसानों को खेती की अपनी लागत को कम करने और उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करने में मदद मिलती है - इस सहायता के चलते एक किसान औसतन प्रति सीजन प्रति एकड़ 5000 रुपये अतिरिक्त कमाने में सफल रहता है।
  2. कृषि के लिये आवश्यक चीजों की आपूर्ति - बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृमिनाशक, पोषकतत्व - ‘जननी’ इन वस्तुओं को सीधे उत्पादकों से खरीदता है और फिर अपने कियोस्क के माध्यम से किसानों को बेचता है - इस प्रकार से ये किसानों तक सही समय पर और सस्ते दामों में उच्च गुणवत्ता की वस्तुएं पहंचा देते हैं।
  3. मार्केटिंग लिंकेज सेवाएं - आईसीटी प्लेटफार्म किसानों को सीधे कृषि वस्तुओं के खरीददारों के साथ जोड़ देता है - जैसे निर्यातकों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, बड़े प्रारूप रिटेल चेन और मंडियों इत्यादि -कृषि सलाहकार सेवा के माध्यम से एकत्र डाटा जननी के कुशलता से इस सेवा की योजना बनाने में सक्षम बनाता है और वह भी समय से पहले।
  4. कृषि वित्त और बीमा सेवा - जननी किसानों को संगठित वित्तीय संस्थाओं से वित्तीय और बीमा सेवाओं का लाभ उठाने के लिए सक्षम बनाता है - जननी इन संस्थानों के लिए व्यापार संवाददाता के रूप में कार्य करता है और इधर-उधर भागदौड़ किये बिना इन सेवाओं को प्राप्त करने में किसानों की मदद करता है - जननी सभी आवेदनों को संसाधित करता है, आवश्यक परिश्रम करता है, यह सुनिश्चित करता है कि प्राप्त किया गया ऋण किसान के खाते में ही आए और और समय में देय राशि एकत्र करने में वित्तीय संस्था की मदद करता है - आईसीआईसीआई बैंक इस सेवा में शामिल हमारे प्रमुख भागीदारों में से एक है। बिल्कुल इसी तरह की सेवा कृषि बीमा प्रयोजनों के लिए भी प्रारंभ करने का इरादा है।
  5. कृषि/ग्रामीण सूचना सेवा - जननी स्थानीय कृषि और ग्रामीण/वाणिज्यिक जानकारी किसानों को स्पोकेन वेब मॉड्यूल के माध्यम से प्रदान करने के लिए आईबीएम के साथ काम कर रहा है।
  6. पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सर्विसेज - इसमें किसानों के लिए पैकेजिंग, परिवहन, भंडारण और गोदाम वित्तीय सेवाएं शामिल हैं।
  7. गुणवत्ता आश्वासन सेवाएं - जननी एक नई तकनीक पर काम कर रहा है जो किसान को उनके उत्पादों को विभिन्न उद्योगों की गुणवत्ता के मानकों के अनुसार छांटने और ग्रेड करने में सक्षम बनाएगी ताकि वह अपने डत्पाद को अधिक दामों पर बेचने में सफल रहे।

उपरोक्त सभी सेवाएं किसानों को उचित और प्रतिस्पर्धी दामों पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इस सेवाओं और ट्रेडिंग मार्जिन से कमाया हुआ पैसा पूर्व सहमत अनुपात के आधार पर ग्रामीण कियॉस्क, मंडल एग्रीगेटर और जननी द्वारा बांट लिया जाता है। ग्रामीण स्तर के कियोस्क खोलने में करीब 3 लाख रुपये और मंडल स्तर पर करीब 8 लाख रुपये का निवेश लगता है जिसमें कार्यशील पूंजी भी शामिल है। जननी विभिन्न गठबंधन सहयोगियों के साथ समझौता ज्ञापनों/वितरण समझौतों/अनुबंध/सम्पर्क खेती करार और सेवा प्रदाता एजेंसी के समझौतों में प्रवेश करती है और जिला केन्द्र से अपने कार्यों को संचालित करती है। इस पूरे कार्य का संचालन जननी और आईबीएम इंडिया द्वारा तैयार किये गए एक नवीन आईसीटी मंच के माध्यम से किया जाता है।


यह विचार कैसे और कहां से आया?

जननी वर्ष 2004 में आंध्रप्रदेश में शुरू हुई ई-सागू प्ररियोजना, जिसका जिक्र ऊपर किया गया है, का ही एक हिस्सा है। ई-सागू को अधिक व्यवहार्य बनाते हुए एक वाणिज्यिक समाधान तलाशने के लिये हम किसानों के साथ मिलकर काम कर रहे थे तभी हमें महसूस हुआ कि सिर्फ सलाहकार सेवाओं से उनका काम नहीं चलेगा और इनके अलावा उन्हें अन्य सेवाओं और उत्पादों की भी दरकार है। इन जरूरतों को समझने और जानने में हमें 4 वर्षों का समय लगा और अंत में एक व्यापार माॅडल के साथ हम मैदान में थे।

अबतक हमने इस व्यापार माॅडल को अपने स्वयं के 3 पायलट कियोस्क में प्रारंभ किया है ताकि हम इस व्यापार माॅडल की लाभप्रदता के साथ-साथ इसकी अवधारणा की सफलता का सबूत भी पेश कर सकें। जनानी एग्रीसर्व अब आंध्रप्रदेश से बाहर अपने पंख फैलाते हुए देश के अन्य राज्यों में भी विस्तार करने की योजना तैयार कर रहा है।


इसे कब प्रारंभ किया गया था?

जानानी का पहला कियोस्क वर्ष 2007 में खोला गया था और हमारे तीनों पायलट कियोस्क वर्ष 2010 में पूर्ण रूप से संचालन में आ पाए थे। ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि हम समय के साथ सेवाओं को जोड़ने के अलावा विभिन्न भागीदारों के साथ प्रयोग करने में व्यस्त थे।


अबतक मिली प्रतिक्रिया कैसी रही है?

किसानों ने हमारी इन सेवाओं के मूल्य की बहुत सराहना की है और 5 से 7 साल की अवधि में हमने करीब 10,000 किसानों की सफलतापूर्वक सेवा की है।


इस समूची प्रक्रिया में हितधारकों के रूप में कौन-कौन शामिल है?

छोटे किसान, कृषि व्यापार संगठन (इनपुट निर्माता, खरीददार, वित्तीय और बीमा संगठन, कृषि सेवा प्रदाता), सरकार, कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान संगठन।


क्या आप मौद्रिक हैं? आपके राजस्व का क्या माॅडल है?

हमारी प्रत्येक सेवा और उत्पाद का एक निश्चित मूल्य है। हमारा राजस्व सेवा शुल्क, ट्रेडिंग मार्जिन और कमीशन इत्यादि के माध्यम से अर्जित किया जाता है। ग्राम स्तरीय कियोस्क पहले भी बिक चुके हैं। हमारी इस परियोजना को बैंकों ने बहुत पसंद किया है और हमारे एक फ्रेचाइज़ी को इंडियन बैंक से लोन भी मिला है। ग्राम स्तरीय कार्य करने के लिये हमारे एक फ्रेचाइज़ी को भारत सरकार के उपक्रम नाबार्ड द्वारा सबसीडी भी प्रदान की गई है।


एनएसआईएच के एक फानलिस्ट होने का अहसास?

यह निश्चित रूप से बेहतरीन और परिपूर्ण है। हमें बहुत खुशी है कि हमारे प्रयासों को कई प्रमुख संस्थानों क्षरा सराहा जा रहा है और मान्यता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा फाइनल तक पहुंचना हमें आवश्यक आत्मविश्वास और दृढ़ता भी प्रदान करता है। एनएसआईएच ने हमें अपने इन उद्यम को दुनिया को सामने लाने के लिये एक बेहतरीन मंच प्रदान किया है और हमें पूरा विश्वास है कि निवेशक हमारी मदद के लिये आगे जरूर आएंगे।