महिला की तरफ से, महिलाओं के लिए, 'ज़ुबैदा' सदैव...

- महिलाओं के लिए एक महिला की ओर से सशक्त प्रयास, तैयार की इंफेक्शन रोकने के लिए एक किट।- सन 2012 में किट का निर्माण किया गया।- मात्र दो साल में कंपनी ने 11 देशों में 60 हजार से ज्यादा किट बेचीं।

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भारत सहित दुनिया भर में महिलाओं के सशक्तिकरण की बात चल रही है। सरकारी व गैर सरकारी संगठन इस मुहिम में बढ़ चढ़कर आगे आ रहे हैं। इनके प्रयासों का असर भी हमें देखने को मिल रहा है लेकिन अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां पहुंचना और वहां की महिलाओं की समस्याओं को समझना बाकी है। जहां एक साथ कई लोग इस प्रयास में लगे हैं वहीं चेन्नई के एक मध्य वर्गीय परिवार में जन्मी जुबैदा भी इस दिशा में काम कर रही हैं। वे महिलाओं की एक ऐसी समस्या के विषय को लेकर गंभीर हैं जिस पर प्राय: लोगों का ध्यान नहीं जाता।

जुबैदा की कंपनी प्रसव के दौरान महिलाओं की सेहत संबंधी समस्याओं को ध्यान में रहते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स की किट तैयार करती हैं जो इस दौरान इस्तेमाल होते हैं ताकि इस दौरान इंफेक्शन से बचा जा सके। यह किट डिलीवरी के दौरान होने वाली अनियमितताओं से बचाव में सहायक सिद्ध हो रही है और साथ ही इस दौरान हाइजीन का भी पूरा ख्याल रखने के लिए तैयार की गई है।

जुबैदा के मन में बचपन से ही महिलाओं के लिए सहानुभूति रही है। वचपन से वे इस बात को मानती रही हैं कि महिलाएं काफी मेहनती होती हैं लेकिन उन्हें उनका पूरा हक नहीं मिलता जिसकी वे अधिकारी हैं। जुबैदा ने अपने आस-पास भी यही माहौल देखा कि लड़कियों को ज्यादा पढऩे नहीं दिया जाता था। लेकिन जुबेदा बाई ने इसका विरोध किया और इंजीनियरिंग करने स्वीडन चलीं गई उसके बाद 24 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया और वे फिर कनाडा चलीं गईं। लेकिन बहुत शीघ्र ही वे भारत वापस आ गईं। भारत आकर उन्होंने रूलर इनोवेटर्स नैटवर्क ज्वाइन किया और महिलाओं के लिए काम करने में जुट गईं। वे गांव की महिलाओं की स्थिति देखकर काफी दुखी थीं वे औरतों से मिलतीं, उनसे बातें करतीं, उनकी समस्याओं से रू-ब-रू होतीं और उन समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करतीं। बातचीत के दौरन जो सबसे चौंकने वाली बातें सामने आ रही थी वो थीं प्रसव के दौरान इतनी अनियमितताएं बरती जा रही थीं बच्चे के जन्म के समय महिलाओं को इंफेक्शन का खतरा बढ़ता जा रहा था। जिस कारण महिलाओं को कई तरह की परेशानियां हो रहीं थीं। वहीं कई बार महिलाओं व शिशुओं की मृत्यु तक की घटनाएं सामने आ रही थीं। जुबैदा इस बात को भलीं भाति जान चुकी थीं कि इस विषय पर बिल्कुल बेसिक स्तर पर काम करने की जरूरत है। और अब वे यह भी जान चुकी थीं कि उन्हें क्या करना चाहिए ताकि इस दिशा में सुधार हो।

जुबैदा को उनके पति हबीब अनवर का पूरा साथ मिला। हबीब साहब हर कदम पर जुबैदा के साथ खड़े थे। फिर जुबेदा ने 'बाइज' की शुरूआत की। और महिलाओं के लिए एक किट तैयार की जिसमें बच्चे होने के दौरान प्रयोग की जाने वस्तुएं थीं जैसे कैंची, बच्चे को साफ करने का कपड़ा, दस्ताने, साबुन, सैनीटाइजर इत्यादि को किट में शामिल किया। ताकि इस दौरान इंफेक्शन होने के खतरे से बचा जा सके।

सन 2012 में किट का निर्माण किया गया और इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र दो साल में कंपनी ने दुनिया के 11 देशों में 60 हजार से ज्यादा किट बेचीं। किट की कीमत काफी कम रखी गई है ताकि गरीब से गरीब भी इसे आसानी से खरीद सकें। यह एक ग्लोबल प्रोडक्ट था और विश्व भर से इसकी भारी डिमांड आने लगी। जुबैदा बताती हैं कि उन्हें इसके वितरण की दिशा और काम करने की जरूरत है ताकि इसे हर जरूरतमंद महिला तक पहुंचाया जा सके।

आज जुबैदा एक सफल सोशल एंटरप्रन्योर हैं। वे अब ऐसे ही कुछ और प्रोडक्ट्स और किट लोगों के लिए निकालना चाहती हैं। सन 2015 में कंपनी ने 50 हजार प्रोडक्ट्स बेचने का लक्ष्य बनाया है। साथ ही सन 2018 तक कंपनी 5 मिलियन उत्पाद बाजार में लाना चाहती है जिससे 25 मिलियन लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया जा सके।

अपनी कंपनी के माध्यम से जुबैदा लोगों को जागरुक करती रहती हैं। भारत में हर वर्ष 20 मिलियन बच्चों का जन्म होता है ऐसे में उनके उत्पाद की मांग बढऩा लाजमी है। उनकी कंपनी एक फोर प्रॉफिट कंपनी है जो लोगों की सहायता में दिन रात लगी हुई है।