खाना बनाने के शौक को यू-ट्यूब पर दिखा कर आर्थिक समृद्ध बन रहीं महिलाएं

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यू-ट्यूब पर रेसिपी अपलोड कर देश-दुनिया की तमाम गृहिणियां आज लाखों की कमाई कर रही हैं। अपने किचन में वह रोजाना ही शौकिया खाना बनाने में तरह-तरह के प्रयोग करती रहती हैं। वह एक तरह से किचन की साइंटिस्ट होती हैं। उनकी यही कुशलता उनकी ऊंची कमाई का जरिया हो सकती है, बशर्ते वह इसे रोजाना यू-ट्यूब पर अपलोड कर दिया करें।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
चूंकि महिलाओं का अधिकांश समय रसोई घर में ही बीतता है, अपने परिवार को खुश रखने के लिए वे रोज नए-नए डिश बनाती ही रहती हैं, यही शौक उनकी कला है तो उसे पेशे के तौर पर अपनाने में हर्ज क्या है? 

वैसे तो आज मेट्रो शहरों में ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना लाखों लोगों के लिए सामान्य सी बात हो गई है, आज के युवा भी अन्य चीजों की तरह फूड के मामले में भी नए-नए इनोवेशन को हाथोहाथ ले रहे हैं लेकिन महिलाओं में इस कला के प्रति स्‍वाभाविक रुझान होता है, ऐसे में उनके लिए यह एक अच्छा बिज़नेस साबित हो रहा है। मास्टर शेफ का खिताब जीत चुकीं पंकज भदौरिया कहती हैं कि लोग कुकिंग को साधारण काम समझते हैं पर उन्हे इसी शौक ने यहां तक पहुंचाया है। मास्टर शेफ में जाने के लिए उन्होंने टीचिंग का जॉब ठुकरा दिया। वह कहती हैं कि अब कुकिंग एकेडमी के जरिए लड़कियां चॉकलेट मेकिंग सीखकर घर से ही चॉकलेट का बिजनेस कर रही हैं तो कुछ बेकरी प्रोडक्ट बनाकर अच्छी अर्निंग कर रही हैं। कई लड़कियां तो बड़े होटलों में बतौर शेफ काम भी कर रही हैं।

आज से लगभग सोलह साल पहले खाना खजाना शो में यूपी की पहली विनर का खिताब जीत चुकीं नीलिमा कपूर कहती हैं कि पाक कला में कुशल गृहिणियां अपने किचन की साइंटिस्ट होती हैं क्योंकि वह खाना बनाने पर हर रोज रिसर्च करती हैं। अचार या जैम को सुरक्षित रखने की कला एक कुशल गृहिणी ही अच्छी तरह जानती है। आज वह न केवल कुकरी शो में बतौर जज बल्कि कई कंपनियों के साथ जुड़कर काम भी कर रही हैं। साथ ही कुकरी-बेकरी क्लास भी चलाती हैं।

भोजन-नाश्ता, रेसिपी आदि आज महिलाओं के लिए एक खास तरह के बिजनेस में डेवलप हो चुकी हैं। सुविधा ये है कि इसको घर से ही शुरू किया जा सकता है। इसके लिए न तो अतिरिक्त लागत की आवश्यकता होती है, न अतिरिक्त समय की। इसे अपने रसोई घर से ही किया जा सकता है। चूंकि महिलाओं का अधिकांश समय रसोई घर में ही बीतता है, अपने परिवार को खुश रखने के लिए वे रोज नए-नए डिश बनाती ही रहती हैं, यही शौक उनकी कला है तो उसे पेशे के तौर पर अपनाने में हर्ज क्या है? छोटे स्केल पर फूड ऐप या टिफ़िन का बिज़नेस शुरू किया जा सकता है। तकनीकी और कानूनी पेचीदगियों के कारण अक्‍सर महिलाएं इस बिजनेस से छिटक जाती हैं।

अब तो फूड लाइसेंस लेने की प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है। इसके लिए सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन करते हुए सभी जरूरी डाक्‍यूमेंट्स अपलोड करने होते हैं। इसके बाद एफएसएसएआई की टीम प्री-इंस्‍पेक्‍शन के लिए जाकर देखती है कि फूड बिजनेस के लिए जरूरी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर है या नहीं। प्री-इंस्‍पेक्‍शन संतोषप्रद होने पर हरी झंडी मिलती है। फिर डिश तैयार होने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद यह टीम पोस्‍ट इंस्‍पेक्‍शन के लिए आती है। इस दौरान यह टीम कच्‍ची सामग्रियों के साथ ही तैयार भोजन की क्‍वालिटी जांचती है। अगर यह जांच भी संतोषप्रद रहती है तो फिर उसे फूड प्रोडक्‍शन का लाइसेंस मिल जाता है। लाइसेंस लेने में महज दो-तीन हजार रुपए लगते हैं। जांच के लिए अलग से कोई देय नहीं। फूड क्‍वालिटी बनी रहे और इस प्रक्रिया में साफ-सफाई और सेहत का उचित ख्‍याल रखा जाए, इसके लिए एफएसएसएआई की जांच टीम हर छह महीने पर जांच-पड़ताल के आती-जाती रहती है।

महिलाएं अपनी पाक कला को बिजनेस का रूप देकर अच्छी कमाई कर सकती हैं। कमाई के लिए उस हुनर को आजमाने के तौर पर महिलाएं रेसिपी की वीडियो बना कर यू-ट्यूब पर अपलोड कर सकती हैं। जानकर यह आश्चर्य होगा कि आज यू-ट्यूब पर सबसे अधिक रेसीपी के वीडियो सर्च किए जाते है। रेसीपी वीडियो अपलोड कर तमाम महिलाएं खूब पैसे कमा रही हैं। वीडियो बनाना बहुत ही आसान है। बस एक स्मार्ट फोन होना चाहिए, जो आजकल सबके पास होता है। स्मार्ट फोन की मदद से वीडियो बनाए जा सकते हैं। इसके लिए अलग से कुछ नहीं करना है। जब अपने परिवार वालों के लिए कोई नई डिश तैयार करें तो उसे अपने मोबाइल कैमेरे से शूट कर लें और यू-ट्यूब पर अपलोड कर दें। वीडियो अपलोड करने से पहले अपना यू-ट्यूब चैनल बनाना होगा। इसके लिए अपना एक एकाउंट होना चाहिए, तभी वीडियो उस पर अपलोड हो सकता है। वीडियो अपलोड होते ही जितने अधिक से अधिक लोग उसे देखेंगे, उतनी कमाई होती जाएगी। इस तरह से पूरी दुनिया में नाम तो होने के साथ ही अच्छी इनकम भी होने लगती है। विभिन्न कुकरी प्रतियोगिताओं में दर्जनों बार वह विनर रह चुकीं सुमन वैश्य कहती हैं कि हर गृहिणी चाहती है कि परिवार को हर दिन कोई नई रेसिपी बनाकर खिलाए।

महिलाएं किचन में रोजाना ही नए-नए स्वाद खोजती रहती है। वह भी हमेशा किचन में तरह-तरह के एक्सपरीमेंट करती रहती हैं। साथ ही वह टीवी चैनलों में और अन्य कुकरी कांटेस्ट में बतौर जज भी शामिल होती रहती हैं। कुकरी कांटेस्ट में दर्जनों बार विनर रह चुकीं नंदिनी दिवाकर कहती हैं कि खाना बनाते समय किस मसाले का क्या रिएक्शन होगा, यह भी एक गृहिणी अच्छी तरह जानती है। मछली बनाते समय यदि इसमें दूध डाल दें तो इसका उल्टा रिएक्शन होता है। इसे खाने से शरीर में खुजली होने लगती है। दही मिलाने से मछली और चिकन का स्वाद दोगुना हो जाता है। पान, नींबू, अंगूर और शहतूत के पत्तों के अलावा गुलकंद को भी रेसिपी में इस्तेमाल किया जा सकता है।

आज के जमाने में महिलाओं के लिए कुकिंग न केवल शौक रह गया है बल्कि लोगों को खुशी देने और भरपूर आय का जरिया भी हो चुका है। अलग तरह की रेसिपी को सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाकर भी कमाई की जा सकती है। यदि रेसीपी एकदम युनिक है, पारम्परिक है, किसी राज घराने से संबंधित है या किसी खास देश से संबंधित है तो पहचान बनाने में अधिक समय नहीं लगता है। एक न्यूज चैनल पर एक भारतीय महिला द्वारा तैयार रेसीपी एकदम युनिक और पारम्परिक लगने पर पूरी दुनिया में उसकी धूम मच गई। आज उसके 50 लाख से भी अधिक सब्स्क्राइबर्स हैं। आंध्रप्रदेश की एक अस्सी साल की दादी मां अपने ट्रेडिशनल रेसीपी की वीडियो अपलोड करती रहती हैं। उनके भी लाखों सब्स्क्राइबर्स और व्यूवर हो चुके हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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