"डोनेट फॉर डिग्निटी", स्कूली लड़कियों के लिए उपहार

काला चार्लु का मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन की दिशा में ठोस प्रयास

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काला चार्लु ने अपनी बेटी की सड़क दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु को महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के एक मिशन में बदल दिया.

पिछले पाँच सालों से वो "Multiple Initiatives Towards Upliftment" (MITU) नामक संस्था की संस्थापक-ट्रस्टी हैं. यह संस्था मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के हर पहलु पर कार्य करती है. और इसके साथ ही अपसाइकिलिंग के माध्यम से रोजगार सृजन का काम भी करती है.

कला एक अद्भुत व्यक्तित्व हैं. उनकी पढाई बहुत ही व्यापक और उदार रही है. वो बताती है -

"मैंने गृह विज्ञान में बीएससी किया है और साथ ही मैं डायटेटिक्स में डिप्लोमा भी हूँ. मैंने बास्केट बॉल और रायफल शूटिंग में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया है.मैं पांच बहनों में सबसे छोटी हूँ और मेरे पिता हम सबका पालन पोषण और देखभाल अलग-अलग और स्वतंत्र तरीके से होने देना चाहते थे."

जब मैं अपने पति के रिटायरमेंट के बाद अपने 90 वर्षीय पिता के साथ बंगलोर आयी तो मेरी बेटी भी अपने छोटे बच्चे के साथ बंगलौर आयी. हमें लगा की अब सब कुछ व्यवस्थित हो गया है. वो आगे कहती है" अपनी 26 वर्षीय पुत्री मैत्री की मार्ग दुर्घटना में हुयी मृत्यु की दुःख से पार पाने की लिए मैं कुछ सेवा कार्य किया करती थी. लेकिन इस से न तो मुझे संतोष मिल पाता था न ही मैं जिनकी सेवा करती थी उन्हें. इस तरह की अनुभव के बाद उन्हें लगा कि कुछ अलग व्यवस्थित तरीके से किये जाने की आवश्यकता है. और मैंने एक संस्था के गठन का निर्णय किया. और इस प्रकार से "Multiple Initiatives Towards Upliftment" (MITU) का जन्म हुआ.

उनके परिवार और आसपास के लोगों ने उनकी इस पहल का प्रसन्नतापूर्वक स्वागत किया. वो कहती हैं," मैंने अपने जीवन में स्वयं अपनी किसी पसंद पर कभी सवाल नहीं उठाया. "Multiple Initiatives Towards Upliftment" (MITU) की कुछ उपलब्धियां बताते हुयी काला कहती हैं -

"मैंने जब २००९ में शुरुआत की थी तो मेरे सामने कोई बहुत स्पष्ट लक्ष्य नहीं था. तभी मैंने "गूँज" और उसके मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के बारे में पढ़ा. शुरू में हमने दर्जियों के यहाँ की कतरनों से सेनेटरी पैड बनाने का प्रयास किया लेकिन शीघ्र ही हमें यह एहसास हो गया की यदि हम इसे मुफ्त में भी लोगों को देंगें तभी उपभोक्ता इस का इस्तेमाल नहीं करेंगें. इस लिए हमने कम मूल्य के सेनेटरी पैड मुहैया करना शुरू किया. हमारा "डोनेट फॉर डिग्निटी" अभियान सफल रहा और हम बंगलौर के कई विद्यालयों और संस्थानों में सस्ते सेनेटरी पैड की आपूर्ति की शुरुआत कर सके."

काला आगे जोड़ती है - 

"२०१२ में "Multiple Initiatives Towards Upliftment" (MITU) को मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन का सन्देश प्रसारित करने का एक अवसर मिला. और २०१४ तक यह तुमकुर जिले के सभी सरकारी स्कूलों तक पहुँच गया. हमने हाल में ही १७ विद्यालयों में इस्तेमाल किये हुए पैड के निपटान के लिए इनसिनेटर बनाये हैं."

उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती प्रियजनों की मृत्यु थी. मेरी पुत्री की अकाल मौत ने एक ऐसा घाव दे दिया था, जिसको भरने में बहुत वक़्त लगा. इसके बाद 98 साल के पिता का अशक्त हो कार बिस्तर पकड़ लेना, इन सबसे गुजरना सच में बहुत मुश्किल था. आपका एक अपना इतनी कम उम्र में चला जाय और कोई इतने लम्बे समय तक जीवित रहे!

उनकी सबसे बड़ी शक्ति उनके पिता द्वारा समय समय पर दी गयी सलाह रही है. "उन्होंने जब भी कभी मैं असमंजस में पड़ी या किसी मामले को लेकर स्पष्ट नहीं रही तो सदैव मुझे सही सलाह दी. उन्होंने मुझे प्राथमिकताएं तय करने और उन्हें पूरा करने में भी मेरा मार्गदर्शन किया." काला बताती हैं.

""Multiple Initiatives Towards Upliftment" (MITU) का सञ्चालन करते हुए मुझे यह अहसास हुआ है कि जूनून, विश्वास और ईमानदारी से आप आश्चर्यजनक उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं. मैंने सीखा है कि अच्छे उद्देश्य के लिए मदद हर दिशा से और अनपेक्षित रूप से आ जाती है. मैं मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के काम से जुड़े होने के कारण अपने को कृतार्थ मानती हूँ." वो कहती हैं.

उनकी भविष्य कि योजनाओं में को एक मूल्य आधारित, नियम एवं संस्कृति से संचालित होने वाले संगठन के रूप में देखना चाहती है. "हमने कपडे वाले सेनेटरी पैड फिर से बनाना शुरू किया है. और इसे भारत तथा विदेशों में शहरी महिलाओं को उपलब्ध कारा रहे है, जिन्हे मुलायम रुई के कपडे के बने पैड पसंद है" वो कहती हैं.

मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन का उनका यह प्रयास महिलाओं की गरिमा स्थापित कर पाने में एक मील का पत्थर साबित होगा.

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