शालिनी ने 'हैंग आउट' के जरिए दिया बच्चों को परफेक्ट गिफ्ट

- 14 साल अमेरिका में रहने के बाद भारत लौटकर शालिनी ने रखी 'हैंग आउट' की नींव- बच्चों का स्वस्थ मनोरंजन करना है 'हैंग आउट' का लक्ष्य- जल्द ही विस्तार की भी है योजना

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भारत तेजी से तरक्की की ओर बढ़ता चला जा रहा है। चाहे तकनीक हो, अर्थव्यवस्था हो, खेल हो, शिक्षा हो आज भारत हर क्षेत्र में दुनिया के विकसित देशों को कड़ी टक्कर दे रहा है। विकास की जिस रफ्तार पर भारत आज चल रहा है वो काफी तेज है और पूरी दुनिया भारत का लोहा मान रही है। लेकिन इस सबके बावजूद भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जो काफी बेसिक हैं लेकिन इन पर काम करने की बेहद जरूरत है। बच्चों के लिए पढ़ाई जितनी जरूरी है खेल और मनोरंजन भी उतना ही जरूरी है और यहीं भारत दुनिया के विकसित मुल्कों से पीछे हो जाता है। संक्षेप में कहा जाए तो यहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है जिसके कारण टेलेन्ट होते हुए भी बच्चे पीछे रह जाते हैं।

शालिनी विज
शालिनी विज

14 साल अमेरिका में बिताने के बाद जब शालिनी विज भारत आईं उस समय उनका बच्चा काफी छोटा था। उसी दौरान शालिनी को सेहत संबधी दिक्कतें भी आईं और वे अपना इलाज करवाने लगीं। अमेरिका में एक लंबा अरसा बिताने के बाद भारत में रहना थोड़ा कठिन था क्योंकि दोनों देशों की लाइफस्टाइल में काफी अंतर था। भारत आने के बाद वे अपने पूरे परिवार के साथ थीं और उनके लिये ये काफी सुखद था।

शालिनी भारत में अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा व तालीम देना चाहती थीं वे उन्हें चीजों को अनुभव करवाना चाहती थीं जिससे उनका चौमुखी विकास हो सके उन्होंने पाया कि भारत में अच्छे खेल के मैदानों की कमी थी। इसके अलावा बच्चों के लिए कोई गेम जोन भी नहीं था जहां जा कर बच्चे इंज्वाय कर सकें और कुछ सीख सकें। यहां का मौसम भी काफी खराब था और कई बीमारियों की जड़ था इसलिए कई बार बच्चों का बाहर खुले में खेलना भी उनकी सेहत के लिए सही नहीं था।

शालिनी जानती थीं कि बच्चों के लिए इन सब का कितना महत्व होता है इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों न वे इस दिशा में काम करें और बच्चों के खेल और मनोरंजन के लिए कुछ ऐसी चीज तैयार करें जहां बच्चे अपनी पूरे परिवार के साथ इंज्वाय कर सकें और कुछ नया सीख सकें।

2 साल की रिसर्च के बाद शालिनी ने तय कर लिया था कि उन्हें क्या करना है। उनके पास उनके प्रोजेक्ट का पूरा खाका था और फिर उन्होंने नीव रखी हैंग आउट की। हैंग आउट को दिल्ली में लांच किया गया यह एक फन सेंटर है जहां बच्चे अपने परिवार के साथ आकर वहां पर विभिन्न खेलों का लुफ्त उठा सकते हैं ये खेल मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी हैं। यहां पर कैफेटेरिया भी है जहां पर बच्चे अपने मनपसंद खाने का लुफ्त भी उठा सकते हैं। शालिनी का ये प्रयास काबिलेतारीफ था, बहुत जल्द ही हैंग आउट लोगों की फेवरेट डेस्टीनेशन बन गई। शालिनी बताती हैं कि हैंगआउट के कैफेटेरिया में परोसा जाने वाले खाने का भी वे लोग खास खयाल रखते हैं वो पौष्टिक होने के साथ-साथ बच्चों की पसंद का भी होता है। यहां का मेन्यू लगातार बदलता रहता है। इसके अलावा आप यहां पर पार्टी भी ऑर्गनाइज कर सकते हैं। यहां पर बहुत क्रियेटिव और असान खेल हैं जिन्हें छोटे बच्चे भी खेल सकते हैं साथ ही कई बेहतरीन वीड़ियो गेम्स भी हैं जो अमूमन बाकी किसी जगह देखने को नहीं मिलते। खिलौनों पर प्रयोग किया गए मैटीरियल भी काफी सॉफ्ट है और हर प्रकार से बच्चों के लिए सेफ, इस काम में सारे सेफ्टी पैरामीटर्स का ध्यान रखा गया है।

अभी हैंग आउट के 3 सेंटर्स हैं जो दिल्ली, एनसीआर और पंजाब में हैं और जल्द ही शालिनी और उनकी टीम कई और सेंटर्स का प्लान कर रही हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे यहां अपने परिवार के साथ आकर इंज्वाय कर सकें।

शालिनी ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और पर्सनल मैनेजमेंट की पढ़ाई की है बिजनेस कैसे किया जाता है वे उसके गुर जानती हैं। साथ ही एक केयरिंग मां होने के नाते उन्हें बच्चों की जरूरतों के बारे में भी पता है। उन्हें ये भी पता है कि भारतीय पेरेंट्स अपने बच्चों की किस तरह परवरिश करना चाहते हैं और वे अपने बच्चों के लिए कितने प्रोटेक्टिव होते हैं इन सब चीजों को ध्यान में रखकर ही शालिनी अपने काम में लगी हुई हैं।

शालिनी बताती हैं कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एक परूष प्रधान इंडस्ट्री है और यहां पर काम करना और टिके रहना आसान काम नहीं है शुरूआत में उन्हें काफी दिक्कतें भी आई लेकिन ये सारी दिक्कतें उनकी मेहनत और लगन के सामने काफी बौनी साबित हुईं। उनका कॉन्सेप्ट नया था जिसपर पहले काम नहीं हुआ था तो उन्होंने हर कदम काफी फूक फूक कर रखा ताकि गलती की कोई गुंजाइश न रहे। उनके परिवार और मित्रों ने उनका हर कदम पर साथ दिया और उनके हर निर्णय पर उनका समर्थन किया जिससे शालिनी को काफी फायदा हुआ। आज शालिनी के पास 13 साल का अनुभव है उन्होंने अमेरिका की भी कई कंपनियों जैसे कोले कॉरपोरेशन, डिस्कवरी जोन और कैलोडर में काम किया है । इसके अलावा उन्होंने बतौर डायरेक्टर एमएफ एंटरटेनमेंट और एम्यूजमेंट, हैंग आउट और बॉउन्सी टॉउन में काम किया है।

जैसे जैसे शालिनी का बिजनेस बढ़ रहा है वैसे वैसे ही उनकी जिम्मेदारियां भी बड़ रही हैं। उनके पास एक बेहतरीन टीम है जिसे उन्होंने खुद ट्रेन किया है। शालिनी मानती हैं कि उनके लिये ये केवल एक बिजनेस नहीं है बल्कि ये उनका सपना और जुनून है।

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