भारत के एजुकेशन सिस्टम को अंतर्राष्ट्रीय बनाने की मुहिम में जुटीं अजीत अगारकर की पत्नी

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फ़ातिमा अगारकर केए ऐडुअसोसिएट्स नाम से एक स्टार्टअप चलाती हैं, जो थ्योरी के साथ-साथ बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान में सक्षम बनाने के उद्देश्य के साथ काम करता है। यह एक ऐसा एजुकेशनल स्टार्टअप है, जो भारत के एजुकेशन सिस्टम को ग्लोबल सिस्टम के ट्रेंड्स के साथ लेकर चलता है।

अजीत और फातिमा
अजीत और फातिमा
 फ़ातिमा ने अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई भारत में पूरी की और इसके बाद मास्टर डिग्री के लिए विदेश चली गईं। इस वजह से उन्हें भारत और विदेश के एजुकेशन सिस्टम के बीच के अंतर के बारे में पता चला और उन्होंने इस अंतर को गंभीरता से समझा। 

भारत के बेहद लोकप्रिय और शानदार तेज़ गेंदबाज़ या यूं कहें कि ऑलराउंडर, अजीत अगारकर तो आपको याद ही होंगे! आज हम आपको उनकी 'ऑलराउंडर' पत्नी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लोकप्रियता और स्टारडम के कारकों से परे हटकर पूरी शिद्दत के साथ भारत के एजुकेशन सिस्टम को नए प्रयोगों के साथ बेहतर बनाने की जुगत में लगी हुई हैं। फ़ातिमा अगारकर केए ऐडुअसोसिएट्स नाम से एक स्टार्टअप चलाती हैं, जो थ्योरी के साथ-साथ बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान में सक्षम बनाने के उद्देश्य के साथ काम करता है। यह एक ऐसा एजुकेशनल स्टार्टअप है, जो भारत के एजुकेशन सिस्टम को ग्लोबल सिस्टम के ट्रेंड्स के साथ लेकर चलता है। फ़ातिमा ने 2016 में मुंबई में गीतिका किशनचंदानी (को-फ़ाउंडर) के साथ केए एजुअसोसिएट्स की शुरूआत की थी।

फ़ातिमा अपने स्टार्टअप के माध्यम से सिर्फ़ बच्चों को ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी प्रशिक्षित करती हैं, ताकि वे अपने बच्चों को बेहतर से बेहतर माहौल दे सकें। फ़ातिमा ने एमबीए, बीएड और ईसीसी की डिग्रियां ली हैं। बतौर टीचर, उनका ऐजुकेशनल बैकग्राउंड पूरी तरह से मज़बूत और उपयुक्त है। एजुकेशनल मैनेजमेंट के सेक्टर में अपने स्टार्टअप की शुरूआत से पहले फ़ातिमा जेबीसीएन नाम के एक एजुकेशन स्टार्टअप से भी जुड़ी रही हैं, जहां पर वह एजुकेशनल प्रोग्राम्स बनाने और बतौर कन्सलटेन्ट उनके क्रियान्वयन पर काम करती थीं। फ़ातिमा के पास कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने का भी अच्छा अनुभव है और वह यूरोपियन कॉमर्ज़बैंक, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और इगॉन ज़ेंडर जैसे बड़े नामों के साथ भी जुड़ी रही हैं।

कई सेक्टरों में काम करने के बाद एजुकेशन सेक्टर में ही आगे काम करने को उनके दिल ने गवाही दी। फ़ातिमा ने अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई भारत में पूरी की और इसके बाद मास्टर डिग्री के लिए विदेश चली गईं। इस वजह से उन्हें भारत और विदेश के एजुकेशन सिस्टम के बीच के अंतर के बारे में पता चला और उन्होंने इस अंतर को गंभीरता से समझा। फ़ातिमा कहती हैं कि इस बारे में विचार करने के बाद ही उन्होंने इस अंतर को पूरा करने के बारे में सोचा। वह मानती हैं कि एजुकेशन सेक्टर में उनका अच्छा अनुभव रहा है और इसलिए अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने में भी काफ़ी मदद मिली।

फ़ातिमा यह भी मानती हैं कि ऑन्त्रप्रन्योरशिप, उनके ख़ून में है। अपने अनुभव साझा करते हुए वह कहती हैं, "मैं एक शख़्स की बेटी हूं, जिसने आज से 45 साल पहले रीटेल बिज़नेस को चुनौती दी थी। एक ऐसे वक़्त में एक्सपोर्ट का काम शुरू किया था, जब भारतीय सामानों की देश के बार कोई ख़ास पूछ नहीं थी। मेरे पिता ने हमेशा ही मुझे कुछ नया करने की प्रेरणा दी।"

फ़ातिमा ने बताया कि उन्होंने टीचर ट्रेनिंग के विज़न के साथ शुरूआत की थी और एजुकेशन सेक्टर में अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए उन्होंने स्कूलों के सेटअप लगवाए। इसके बाद कन्सलटेन्सी सर्विस की भी शुरूआत की। फ़ातिमा बेहद ख़ुश हैं कि उनके दोनों ही वर्टिकल्स अच्छा काम कर रहे हैं।

फ़ातिमा कहती हैं कि बाक़ी स्टार्टअप्स से अलग तरीक़ा अपनाते हुए उन्होंने एक बड़ी टीम के साथ काम की शुरूआत की और इस वजह से ही उनका स्टार्टअप्स जल्द ही अन्य मार्केटों तक अपनी पहुंच बढ़ाने में सफल रहा। वह मानती हैं कि ज़्यादा लोगों के सहयोग से काम हमेशा तेज़ी से होता है। वह कहती हैं कि बड़ी टीम में आपका खर्चा अधिक ज़रूर होता है, लेकिन ऐसी स्थिति में आप कुछ छोटा नहीं सोचते और कुछ अलग हटकर करने की हिम्मत भी सहजता से जुटा पाते हैं।

कंपनी के पोर्टफ़ोलियो में प्रीस्कूल्स, हाई स्कूल्स, स्कूल ऑडिट्स, करिकुलम डिज़ाइन, टीचर एजुकेशन, पैरेंटिंग वर्कशॉप्स और स्टूडेंट वर्कशॉप्स के काम शामिल हैं। कंपनी अपने वर्किंग मॉडल के तहत इन-हाउस और आउटसोर्स्ड टीमों के साथ काम करती है, जिसमें ग्लोबल टीचर्स भी शामिल रहते हैं। ऑनलाइट प्लेटफ़ॉर्म की मदद से स्टार्टअप को और भी बड़े वर्ग तक पहुंच मिलती है।

फ़ातिमा मानती हैं कि उनके स्टार्टअप की यूएसपी है, लीक से हटकर सोचना और कुछ नया करने की पर्याप्त क्षमता। उन्होंने कहा कि बड़ी टीम के साथ जल्द से जल्द काम को अंजाम देने के उद्देश्य के चलते उनकी कार्यप्रणाली काफ़ी आक्रामक है। साथ ही, वह यह भी मानती हैं कि उनकी टीम में सभी सदस्यों के पास अच्छा कॉर्पोरेट अनुभव है और इसलिए सभी बिज़नेस की पेचीदगी को बेहद अच्छी तरह से समझते हैं।

फ़िलहाल, केए एजुअसोसिएट्स 30 शहरों में मौजूद है और अभी तक लगभग 500 शिक्षकों को प्रशिक्षित कर चुका है। इतना ही नहीं, सिर्फ़ 18 महीनों के वक़्त में स्टार्टअप ने 10 स्कूलों के सेटअप जमवाने में प्रमोटर्स की मदद की है। फ़ातिमा बताती हैं कि उनके स्टार्टअप के पास कई निवेशकों के ऑफ़र्स आ चुके हैं, लेकिन कंपनी ने अभी तक किसी के साथ भी समझौता नहीं किया और अपने बल पर ही आगे बढ़ रही है।

चुनौतियों और संघर्ष को फ़ातिमा काम का हिस्सा मानती हैं। उनका कहना है कि किसी भी स्टार्टअप के लिए पहला क्लाइंट बेहद महत्वपूर्ण होता है और उसके साथ काम करना स्टार्टअप के सबसे ज़्यादा चुनौतीपूर्ण भी होता है। वह कहती हैं कि ऐसी स्थिति में आपके पास नज़रिया होता है, लेकिन कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता। इस संबंध में वह संदेश देती हैं कि हमें कुछ नया करने के लिए जोख़िम से बचना नहीं चाहिए।

अपनी सफलता के लिए फ़ातिमा अपने पिता के साथ-साथ अपने पति अजीत अगारकर को भी ख़ास धन्यवाद देती हैं। वह कहती हैं, "मेरे पति बेहद अनुशासित हैं और एक तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर सालों तक उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने बेहद कड़ी मेहनत की, लेकिन कभी भी शिकायत नहीं की। यह मेरे लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्त्रोत है, जिसने मुझे समझाया कि ज़िंदगी में कोई भी चीज़ बिना संघर्ष के हासिल नहीं की जा सकती। आपको अपने हिस्से की पूरी मेहनत करनी होती है और उसके बाद किस्मत और गॉडफ़ादर्स जैसे फ़ैक्टर्स आते हैं।"

भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए फ़ातिमा ने बताया कि वह दक्षिणपूर्व एशिया और मध्य-पूर्व में भी अपने काम को बढ़ाना चाहती हैं। फ़ातिमा मानती हैं कि इन क्षेत्रों में भी ऐसे केए एजुअसोसिएट्स जैसे प्रयोगों की ज़रूरत है।

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