राष्ट्रीय पुरस्कार से लेकर ऑस्कर तक, 2015 में मराठी सिनेमा का नया उदय

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जहां बॉलीवुड अपने खान और कपूर सुपरस्टारों की बदौलत बॉक्स ऑफिस पर धड़ल्ले से कमाई कर नए कीर्तिमान बना रहा है, वहीं मराठी सिनेमा का नए सिरे से उदय हो रहा है और अपनी विषयवस्तु एवं कहानियों से वह अलग छाप छोड़ रहा है।

इस साल जिन मराठी फिल्मों की चर्चा रही उनमें ‘कोर्ट’, ‘किल्ला’, ‘कट्यार कलजत घुशाली’, ‘हाईवे’, ‘मुंबई पुणे मुंबई-2’ और ‘डबल सीट’ शामिल हैं।

इनमें सबसे सफल और चर्चा में रही राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाली फिल्म ‘कोर्ट’ जिसके निर्देशक चैतन्य ताम्हाने ने अपनी इस पहली फिल्म में अदालत कक्ष का खाका खींचकर भारतीय न्याय व्यवस्था का परीक्षण करने का प्रयास किया।

एक भारतीय फिल्म द्वारा सबसे ज्यादा राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय पुरस्कार लगभग 18 पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ‘कोर्ट’ को भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में 88वें अकादमी :ऑस्कर: पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म श्रेणी में भेजा गया।

निर्देशक अविनाश अरूण की पहली फिल्म ‘किल्ला’ को भी आलोचकों की सराहना मिली। इसमें मराठी सिनेमा के किशोरवय विषय की परंपरा को बनाए रखा गया जैसे कि अधिकतर मराठी फिल्मों की कहानी बच्चों पर आधारित होती है लगभग ईरानी फिल्मों की तरह। ‘किल्ला’ में एक 11 साल के लड़के की कहानी है जो अपने पिता की मौत के बाद एक कठिन दौर से गुजर रहा होता है।

‘किल्ला’ को सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। अविनाश ‘मसान’ के भी सिनेमेटोग्राफर हैं जिसे स्वयं कान फिल्म समारोह में दो पुरस्कार मिले।

जहां ‘कोर्ट’ और ‘किल्ला’ का कलात्मक पक्ष बहुत बेहतर था वहीं एक और नए निर्देशक सुबोध भावे की पहली फिल्म ‘कट्यार कलजत घुषाली’ मराठी सिनेमा की ब्लॉकबस्टर हिट रही।

इस फिल्म में शंकर महादेवन और सचिन पिलगांवकर ने मुख्य भूमिकाएं निभायी हैं। महादेवन ने इस फिल्म से पहली बार अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा।

इसी तरह ‘हाईवे’, ‘मुंबई पुणे मुंबई-2’ और ‘डबल सीट’ जैसी फिल्मों ने भी अपनी छाप छोड़ी।


पीटीआई

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