दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो रही है किकस्टार्ट कैब सर्विस

एक सराहनीय स्टार्टअप है बेंगलुरू की किकस्टार्ट कैब सर्विस...

1

2011 में हुई जनगणना के आकंडे़ कहते हैं 121 करोड़ की आबादी में से 2.68 करोड़ यानी 2.21 फीसदी लोग दिव्यांग हैं। दिव्यांगों के यातायात आसान हो जाए यही मकसद है बंगलूरू के स्टार्टअप किकस्टार्ट कैब का।

फोटो साभार: सिल्वर टॉकीज
फोटो साभार: सिल्वर टॉकीज
किकस्टार्ट कैब दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस कैब के द्वारा उन्हें उनके गंतव्य तक बिना किसी सहारे के छोड़ा जाता है।

किकस्टार्ट कैब सेवा फिलहाल बेंगलुरु में काम कर रही है, लेकिन अब इसे पूरे इंडिया में लॉन्च करने की तैयारी चल रही है।

एक सामान्य व्यक्ति जिस सहजता से रोजाना घर से अपने काम तक पहुंचता है उतना किसी दिव्यांग के लिए सहज और आसान नहीं। 2011 में हुई जनगणना के आकंडे़ कहते हैं, कि 121 करोड़ की आबादी में से 2.68 करोड़ यानी 2.21 फीसदी लोग दिव्यांग हैं। दिव्यांगों का यातायात आसान हो जाये यही मकसद है बंगलूरू के स्टार्टअप किकस्टार्ट कैब का। विद्या रामासुब्बन और स्रीक्रीस सिवा ने खासतौर पर दिव्यांगों के लिए ये कैब सर्विस दिसबंर 2014 में सिर्फ 3 गाड़ियों के साथ शुरू की थी। ये सेवा अभी फिलहाल बेंगलुरु में काम कर रही है लेकिन अब इसे पूरे इंडिया में लॉन्च होने की तैयारी चल रही है। किकस्टार्ट कैब दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस कैब के द्वारा उन्हें उनके गंतव्य तक बिना किसी सहारे के छोड़ा जाता है। ये खुद अपनी मंजिल तय करते हैं। ये एक खास तरह की टैक्सी कैब है जो दिव्यांगों के लिए पब्लिक प्लेस पर लाने ले जाने का काम करते हैं। इसमें बस एक फोन करो और कैब आपकी सेवा में हाजिर । इस कैब में दिव्यांग सुरक्षा और आराम के साथ एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं।

ये भी पढ़ें,
समोसे बेचने के लिए छोड़ दी गूगल की नौकरी

कैसे काम करती है ये सर्विस

दिव्यांगो के सेक्टर में 20 साल काम कर चुकी विद्या रामासुब्बन और स्रीक्रीस सिवा ने मिलकर इस कैब सर्विस की शुरूआत की थी। दिव्यांगों के लिए खास कैब के इस कॉन्सेप्ट को हकीकत में उतारना, विद्या और स्रीक्रीस के लिए बड़ी मशक्कत का काम रहा। विद्या के मुताबिक, 'ये चलने-फिरने में असमर्थ लोगों की सेवा के लिए खास तौर पर बनाया गया है ताकि सामाजिक सरोकार के साथ दिव्यांगों को लाभ मिल सके। इसके ड्राइवर भी उन लोगों को ही बनाया जाता है जो असमर्थ हैं, पर कुछ करना चाहते है। ये कैब सेवा एक कम बेनिफिट में सामाजिक सेवा है।' कंपनी ने गाड़ियों में खास तरह की सीट्स इंस्टॉल की हैं। इन्हे बाहर निकालकर, व्हीलचेयर से इन सीटों पर बैठना काफी आसान है। थोड़ी मदद से या अकेले भी दिव्यांग ग्राहक कैब में आसानी से बैठ सकते हैं। इसमें ड्राइवर ग्राहकों की मदद करते हैं। इस खास सर्विस कैब के आइडिया को ग्राहकों ने भी खूब सराहा। फिलहाल कॉल और वेबसाइट के जरिए कंपनी बुकिंग्स ले रही है लेकिन विस्तार प्लान के साथ टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म मजबूत बनाने पर भी काम चल रहा है।

दूसरे शहरों में भी लॉन्चिंग की तैयारी

बेंगलुरू से शुरू हुई इस सर्विस को अब फाउंडर्स नए शहरों में ले जाने के लिए तैयार हैं। लेकिन गाड़ियों में निवेश करते हुए एसेट हेवी मॉडल के साथ कारोबार का विस्तार करना मुश्किल होगा। इसलिए कंपनी अब ओनर ड्राइवर कैब मॉडल अपना रही है। ओनर ड्राइवर मॉडल में कंपनी गाड़ियों में जरुरी मोडिफिकेशन खुद करवा कर देगी। गाड़ियों के इन डिजाइन्स को राज्य सरकार की मंजूरी भी मिल चुकी है। 

किकस्टार्ट ऐप, विस्तार और मार्केटिंग के लिए कंपनी फंडिंग जुटाने की तैयारी में भी है। किकस्टार्ट ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को आसान ट्रैवल मुहय्या करने पर फोकस बनाए हुए हैं। जल्द ही चेन्नई पुणे मुंबई और दिल्ली में किकस्टार्ट कैब सर्विस अपनी सेवा शुरु करेगी।

ये भी पढ़ें,
ट्रांसजेंडर्स ने लिखी कामयाबी की नई इबारत

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...