एक लक्ष्य को साधो और झोंक दो खुद को, सफलता ज़रूर मिलेगी-सहवाग

वीरेंद्र सहवाग से खास बातचीत की योर स्टोरी की संस्थापक और चीफ एडिटर श्रद्धा शर्मा ने...

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क्रिकेट की दुनिया में नजफगढ़ के नवाब के नाम मशहूर वीरेंद्र सहवाग से मुलाकात एक ऐसा अनुभव है जिसे मैं ताउम्र भूलना नहीं चाहूंगी। बेहद विनम्र स्वभाव के मालिक और हमेशा चेहरे पर मुस्कान बिखेरे रहने वाले मृदुभाषी वीरेंद्र सहवाग अपने दम पर सफलता के शीर्ष पायदान पर पहुंचने का जीता जागता उदाहरण हैं।

हालांकि उनसे मिलने से पहले मैं इस सोच में थी कि सफलता के शीर्ष पर खड़ा यह व्यक्ति जरूर स्वभाव से थोड़ा बहुत घमंडी तो होगा ही या उसके हाव-भाव में सफलता की अकड़ जरूर होगी, लेकिन उनसे मिलने के बाद मैं उन्हें बिल्कुल एक सामान्य इंसान की तरह पाकर हैरत में पड़ गई। वीरेंद्र सहवाग सही मायनों में देश के सच्चे प्रतिमान है और ‘मेड इन इंडिया’ के एक सफल अवतार हैं। साथ ही मैं ‘वू एप्प’ को भी धन्यवाद देना चाहूंगी जिनकी वजह से यह संभव हो सका।

विलक्षण प्रतिभा के धनी और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाजों में शुमार सहवाग के साथ हुई दिलचस्प बातचीत के कुछ अंश आपके लिये पेश हैं। सहवाग की बातें जितनी सरल और सहज हैं वो उतनी ही गूढ़ हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि बड़े सपनों का पीछा करने वाले पराक्रमियों की तरह आप भी जीवन में सफलता के गूढ़ रहस्यों को पा सकते हैं जैसी मुझे मिली।

अपनी सफलता के राज के बारे में बात करते हुए सहवाग कहते हैं कि लक्ष्य को केंद्रित करके ही सफलता को पाया जा सकता है। जब मैं स्कूल में था तो रोज़ाना लगभग चार से पांच तरह के खेलों में भाग लेना पसंद करता था। एक तरह से आप कह सकते हैं कि मैं इन सभी खेलों में अच्छा था। लेकिन दसवीं क्लास में आने के बाद मैंने क्रिकेट के अलावा बाकी सभी खेलों को छोड़ने का फैसला कर लिया क्योंकि मैं जानता था कि मुझे अपना सारा ध्यान, ऊर्जा और निष्ठा को एक ही खेल में लगाते हुए उसमें अपना सर्वस्व झोंकना होगा। मुझे एक ही खेल में और बेहतर होने के लिये प्रत्येक क्षण कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता थी।

मैंने अपना लक्ष्य निर्धारित करके ध्यान केंद्रित किया और मुझे गर्व है कि मैं भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर पाया और अपने सपनों को पूरा करने में सफल रहा। यह सब केवल एक ही वजह से हो पाया - ध्यान। सबसे पहले अपने जीवन में एक विशेष ध्येय को चुनें, चाहे वह पढ़ाई अथवा खेल हो या उसी दिशा में आपका कुछ और जुनून हो - चाहे आप एक खिलाड़ी बनना चाहते हों, या इंजीनियर, डॉक्टर, सफल व्यवसायी या कुछ और। फिर अपना ध्यान उस लक्ष्य पर केंद्रित करें और आगे बढ़ें और खुद को पूरी ऊर्जा के साथ उसमें झोंक दें। जब आप ऐसा कर लेते हैं तो आप अपने लक्ष्य को पाने के लिये कड़ी मेहनत और अथक एकाग्रता करने के लिए अडिग हो जाते हो और आप सफलता के शीर्ष को छूने के लिये कुछ भी कर गुजरने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

इसके बाद सहवाग कहते हैं कि व्यक्ति को जीवन में मिलने वाली विफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। असफलता आपको और अधिक बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि अगर असफलता न हो तो देश का हर नागरिक प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन जाए। यह आपको खुद में सुधार करने का एक मौका देती है क्योंकि जीवन में सिर्फ एक ही चीज है जिसे आप लगातार सुधार सकते हैं और वह है आप स्वयं। अपने जीवन में मैं कई मौकों पर असफल हुआ लेकिन मैंने कभी असफलता के भाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। मैं सिर्फ अपने खेल को बेहतर करने का लक्ष्य लेकर मेहनत करता रहा और विफलताओं ने सिर्फ मुझे और बेहतर करने के लिये प्रेरित किया। मेरे मन-मस्तिष्क में हर समय केवल एक ही सवाल घूमता रहता था कि मैं अपने खेल को और बेहतर कैसे बनाऊँ, चाहे वह बल्लेबाजी, गेंदबाजी हो या क्षेत्ररक्षण।

चूंकि मेरे अभिभावकों ने मुझे सिर्फ तबतक ही खेल में ध्यान केंद्रित करने की आजादी दी थी जबतक मैं अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था इसलिये मेरे पास समय बहुत कम था। यह एक आपसी समझौते जैसा था कि मैं पढ़ाई के बाद अपने पिता के व्यवसाय में उनका हाथ बटाऊंगा। इसलिये मेरे पास खुद को साबित करने के लिये सिर्फ स्नातक करने के दौरान के तीन या चार साल थे। मैंने अपनी सारी ऊर्जा और ध्यान सिर्फ क्रिकेट को केंद्रित करते हुए उसमें झोंक दिया क्योंकि मैं अपने पिता के व्यवसाय का हिस्सा नहीं बनना चाहता था। मैंने अपनी स्नातक की पढाई पूरी करने से पहले ही दिल्ली राज्य, रणजी और भारत के लिये खेलने का सौभाग्य पाया। मैं बहुत भाग्यशाली था कि स्नातक के पहले ही वर्ष में मैं भारतीय टीम के लिये खेलने में सफल रहा लेकिन जल्द ही मैं टीम से बाहर हो गया। यह मेरे लिये सबसे बड़ा झटका था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और प्रथम श्रेणी क्रिकेट पर अपना सारा ध्यान केंद्रित करते हुए जी तोड़ मेहनत की और दोबारा भारतीय टीम में वापसी करने में सफल रहा।

सहवाग आगे कहते हैं कि वे हमेशा यह मानते हैं कि अगर आप खुश रहेंगे तो दुनिया भी आपकी तरफ खुशी से ही देखेगी। जब मैं बच्चा था तब से ही मेरे पिताजी नियमित रूप से मुझसे कहते थे कि ‘‘बच्चे, अगर आप मुस्कुराते रहोगे और खुश रहोगे तो आपका भाग्य जरूर बदलेगा,’’ और मैं हमेशा अपने जीवन में इन शब्दों को याद रखने और इनका पालन करने की कोशिश करता हूँ। चाहे जैसी भी परिस्थितियां हों मैं हमेशा मुस्कुराता रहता हूँ और खुश रहने का प्रयास करता हूँ।

मैंने और मेरे परिवार ने कभी दूसरे लोगों की बातों की परवाह नहीं की। न ही कभी यह सोचकर परेशान हुए कि दूसरे क्या कह रहे हैं या क्या कर रहे हैं? हमनें हमेशा खुद पर ही ध्यान केंद्रित रखा है। हमारा परिवार एक सुखी परिवार है। हमें अच्छी तरह पता है कि हमारे माता-पिता ने हमें एक बेहतर जीवन देने के लिए कितनी कड़ी मेहनत की और आज हम जिस भी मुकाम पर हैं वह उनकी इसी मेहनत का नतीजा है। वर्तमान में मैं अपने जीवन से बहुत खुश हूँ क्योंकि मैं एक स्वस्थ और सुखी परिवार के साथ जीवन गुजार रहा हूँ। मैं इस सबके लिये बहुत आभारी हूँ और मेरे पास चिंता करने के लिये कुछ भी नहीं है।

मैं कभी इस बात को लेकर परेशान नहीं होता कि मैंने 10 हजार रनों का आंकड़ा नहीं पार किया या मैं 200 टेस्ट मैच नहीं खेल पाया। मैं इस बात से खुश हूँ कि मैं 100 से अधिक टेस्ट मैच खेलकर 8 हजार से अधिक रन बनाने में कामयाब रहा और 250 एकदिवसीय मैचों में देश का प्रतिनिधित्व करने में कामयाब रहा। मैं अपनी इन उपलब्धियों के साथ ही बहुत खुश हूँ।

बहुत छोटी उम्र से ही मैंने अपना ध्यान उन चीजों में लगाने की कोशिश की है, जिनपर मेरा बस चलता है। मैंने हमेशा अपने नियंत्रण से बाहर की बातों और चीजों के बारे में परवाह ही नहीं की है। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, मेरा दिमाग सिर्फ खेल को सुधारने और बेहतर करने की दिशा में और कड़ी मेहनत जैसी बातों पर ही केंद्रित रहता है। मैं खुद को तरोताज़ा और स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से कसरत करता हूं। अपने दिलो दिमाग को केंद्रित करने के लिए ध्यान लगाने और योग क्रियाओं को भी करता हूँ। इसके अलावा मैं कभी इस बात की चिंता नहीं करता कि मुझे एक तेज गेंदबाज या स्पिनर को कैसे खेलना है।

मैं एक सुखी और स्वस्थ जीवन जीना चाहता हूँ। अगर मैं जीवन में करोंड़ों की संपत्ति का मालिक होने के बावजूद शारीरिक या मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हूँ तो यह पैसा और ख्याति मेरे किसी काम की नहीं है। इसलिये इसका पीछा करने की जगह मैं एक सुखी और स्वस्थ परिवार की कामना करता हूँ। मेरे ऊपर बड़ों का आशीर्वाद है और यही मेरी उपलब्धि है।

और हाँ, अंत में वे अपने प्रशंसकों से वायदा करते हैं कि वे ‘वू एप्प’ के माध्यम से लगातार उनके बीच आते रहेंगे और उनसे बातचीत करते रहेंगे।