कचरे से पैसे कमा रहा बेंगलुरु का यह शख़्स, जेब के साथ परिवेश का भी रख रहा ख़्याल

'खाली बॉटल' से पैसा कमा रहा है ये शख़्स...

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आपने कभी सोचा है कि जो चीज़े हम कूड़े में फेंक देते हैं, उनसे भी पैसा कमाया जा सकता है। साथ ही, ऐसा करके आप सिर्फ़ अपनी जेब का ही ख़्याल नहीं रख रहे बल्कि शहर को प्रदूषण से भी बचा रहे हैं और अपना सामाजिक दायित्व भी अदा कर रहे हैं।

खाली बॉटल के पास फोन कॉल्स और वेबसाइट के जरिए ग्राहकों की अर्जियां आती हैं। इसके बाद सपोर्ट टीम ग्राहकों से संपर्क करके उनकी रिक्वेस्ट कन्फ़र्म होने की सूचना देती है। ग्राहकों के पते से पिकअप टीम कूड़ा-कचरा इकट्ठा करके लाती है। पिकअप टीम के पास डिजिटल वेइंग मशीन होती है और वे एक प्रोफ़ेशनल ड्रेस कोड में होते हैं।

आपने कभी सोचा है कि जो चीज़े हम कूड़े में फेंक देते हैं, उनसे भी पैसा कमाया जा सकता है। साथ ही, ऐसा करके आप सिर्फ़ अपनी जेब का ही ख़्याल नहीं रख रहे बल्कि शहर को प्रदूषण से भी बचा रहे हैं और अपना सामाजिक दायित्व भी अदा कर रहे हैं। कुल मिलाकर, पैसे कमाने का इससे आदर्श ज़रिया क्या हो सकता है! बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप 'खाली बॉटल' ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया है। स्टार्टअप के फाउंडर नवीन मरियन ने पैसे कमाने के लिए रीसाइकलिंग बिज़नेस को चुना और अपने सामाजिक दायित्वों का भी ख़्याल रखा।

क्या है 'खाली बॉटल' ?

खाली बॉटल, एक ऑनलाइट प्लेटफ़ॉर्म है, जहां पर ग्राहक (कोई व्यक्ति या कॉर्पोरेट हाउस) अपने पते से रीसाइकलिंग के लिए कूड़ा-कचरा आदि कलेक्ट करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

खाली बॉटल के पास फोन कॉल्स और वेबसाइट के जरिए ग्राहकों की अर्जियां आती हैं। इसके बाद सपोर्ट टीम ग्राहकों से संपर्क करके उनकी रिक्वेस्ट कन्फ़र्म होने की सूचना देती है। ग्राहकों के पते से पिकअप टीम कूड़ा-कचरा इकट्ठा करके लाती है। पिकअप टीम के पास डिजिटल वेइंग मशीन होती है और वे एक प्रोफ़ेशनल ड्रेस कोड में होते हैं।

इसके बाद संबद्ध और प्रमाणित रीसाइकलिंग प्लान्ट को यह माल भेज दिया जाता है। आमतौर पर ये माल बेंगलुरु, मैसूर, हैदराबाद और आस-पास के इलाकों के प्लान्ट्स में भेजा जाता है। माल भेजने के लिए रोड या रेल ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

ग्राहकों को पेमेंट के कई विकल्प

ग्राहकों को पेमेंट करने के लिए कई विकल्प रखे गए हैं। ग्राहकों को तौल के हिसाब से कैश या कुपॉन्स ऑफ़र किए जाते हैं। इसके अलावा उनके सामने सामाजिक कार्यों के लिए अनुदान का विकल्प भी रखा जाता है।

पेमेंट के विकल्प के तौर पर दिए जाने वाले कुपॉन्स के लिए फ़्रेश मेन्यू, कार्टिसन और हाउसजॉय से करार किया गया है। खाली बॉटल, जस्ट डायल पर भी रजिस्टर्ड है। आपको बता दें कि टीम सूखा कचरा ही इकट्ठा करती है और उसे बांटने के लिए पहले से ही कैटेगरीज़ निर्धारित की गई हैं। जैसे कि सॉफ़्ट प्लास्टिक, पेट बॉटल्स, ग्लास, कार्डबोर्ड मटीरियल और मेटल (धातु) आदि।

नवीन अपने स्टार्टअप से फ़ायदा उठाने वालों की चेन का ज़िक्र करते हुए बताते हैं कि उनके सेटअप से उनके अलावा कूड़े में बॉटल बेचने वालों और रीइकलिंग प्लान्ट्स को भी आर्थिक फ़ायदा होता है। शहर के साफ़ रहने का कारक तो है ही।

शेफ़ से ऑन्त्रेप्रेन्योर बनने की कहानी

नवीन मरियन ने अपने करियर की शुरूआत होटल इंडस्ट्री में बतौर शेफ़ की थी। 2013 में उन्होंने अपनी ख़ुद की केटरिंग सर्विस (प्लेट अप) शुरू की और कॉर्पोरेट इवेंट्स का कॉन्ट्रैक्ट लेने लगे।

नवीन ने योर स्टोरी से बातचीत करते हुए बताया कि पहला बिज़नेस 2015 में डूब गया। हालांकि, नवीन की तैयारी में किसी तरह की कमी नहीं थी। वह पहले ही से प्रोजेक्ट 'रीयूज़' के लिए मार्केट रिसर्च कर रहे थे और वेंडर्स तलाश रहे थे। यही वेंचर आगे चलकर 'खाली बॉटल' बना। उन्होंने 'प्लेट अप' के बंद होने के बाद दिसंबर 2016 तक ज़ोमेटो (बेंगलुरु) में काम किया। इसके बाद उन्होंने अपने पांच दोस्तों के साथ मिलकर पांच अलग-अलग जगहों पर खाली बॉटल की शुरूआत की। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में 5,000 टन तक ऐसा वेस्ट मटीरियल इकट्ठा होता है, जिसे रीसाइकल किया जा सकता है।

अपने आइडिया के पीछे की भूमिका स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में अभी भी वेस्ट मैनेजमेंट उस स्तर तक नहीं पहुंचा है, जहां उसे होना चाहिए। उनका मानना है कि जागरूकता और तकनीक के मेल से हम अपने शहरों की सूरत को पूरी तरह से बदल सकते हैं और अपने लिए बेहतर भविष्य गढ़ सकते हैं।

खाली बॉटल के पास फ़िलहाल 15 कर्मचारियों की टीम है, जिसमें इंजीनियर्स से लेकर ड्राइवर तक सभी शामिल हैं। नवीन का इरादा अपनी टीम और काम दोनों ही को बेंगलुरु के भीतर और भी विस्तृत करने का है।

नवीन ने जानकारी दी की मासिक तौर पर रजिस्ट्रेशन्स की संख्या में 22 प्रतिशत की दर से इज़ाफ़ा हो रहा है। नवीन ने आगे बताया कि रेवेन्यू के हिसाब से खाली बॉटल की स्थिति कुछ ठीक नहीं है, लेकिन चीज़ें धीरे-धीरे सुधर रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि जून तक उनके हालात सुधर जाएंगे।

और भी बढ़ाएंगे भलाई के कामों का दायरा!

नवीन अपने बिज़नेस के सामाजिक सुधार वाले पहलू में एक और कड़ी जोड़ना चाहते हैं। वह फ़िलहाल शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को रोज़गार देने के विकल्प पर गौर कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि कई ऑफ़लाइन सेंटर्स शुरू किए जाएं, जहां पर कैश-ऑन-ड्रॉप की सुविधा उपलब्ध हो। इन सेंटर्स या आउटलेट्स में कॉलेज ड्रॉपआउट्स, सिंगल पैरेन्ट्स के साथ पल रहे बच्चों या दिव्यांगों को ही काम दिया जाएगा। टीम की योजना है कि कबाड़ी वालों को भी सिस्टम का हिस्सा बना लिया जाए, जो बड़ी मात्रा में ग्राहकों के पास सूखा कचरा ला सकें।

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