'इंडिया होम हेल्थ केयर', घर पर ही मरीजों की देखभाल...सुविधा अस्पताल की


- सन 2009 में रखी गई 'इंडिया होम हेल्थ केयर' कंपनी की नीव

- 'इंडिया होम हेल्थ केयर' कर रहा है घर पर मरीज़ों की देखभाल।

- अब नहीं जाना पड़ेगा मरीज़ों को बार-बार अस्पताल। घर पर ही होगी अस्पताल जैसी देखभाल।

- आगामी 5 सालों में भारत के 15 शहरों में विस्तार का है प्लान।

0

हेल्थ एक ऐसा सेक्टर है जिसका विस्तार लगातार हो रहा है। शायद हेल्थ ही पूरी दुनिया में ऐसा सेक्टर होगा जिस पर दुनिया भर की सरकारों ने हमेशा से काम किया, बेशक गरीबी के चलते कई देशों में इस सेक्टर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा सका लेकिन लगभग हर सरकार और विश्व भर में इस क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न संगठनों ने हेल्थ क्षेत्र में सुधार के लिए हर संभव प्रयास किया। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां काफी काम हो जाने के बाद भी इसे और बेहतर बनाने की काफी संभावनाएं हैं। भारत का ही यदि उदाहरण लें तो यहां काफी अस्पताल हैं, क्लीनिक हैं, डिसपेंसरियां हैं लेकिन इस सबके बावजूद बढ़ती जनसंख्या के कारण यह सभी प्रयास कम साबित हो रहे हैं। कई अस्पतालों के होने के बावजूद भी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी रहती है और सभी को समुचित इलाज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

इस क्षेत्र से जुड़े लोग कुछ न कुछ प्रयास लगातार करते रहते हैं ताकि मरीजों को अच्छी सुविधा मिले। एक ऐसा ही प्रयास किया है 'इंडिया होम हेल्थ केयर' ने। यह कंपनी लोगों को उनके घरों में नर्स मुहैया कराती है ताकि मरीज़ों को अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ें। यह सुविधा मुख्यत: बुजुर्गों के लिए है। कई बार उपचार के बाद उन्हें डॉक्टर द्वारा आराम की सलाह दी जाती है जिस दौरान मरीज के कुछ छोटे-मोटे टेस्ट भी करने होते हैं ऐसे में इंडिया होम हेल्थ केयर लोगों के घरों में नर्सों को भेजता है और उन्हें अस्पताल आने के झंझट से बचाता है। इसके अलावा कई बार मरीजों को अतिरिक्त देखभाल की भी जरूरत होती है ऐसे में प्रोफेशनल नर्सिंग स्टाफ यदि आपके साथ हो तो यह काफी सुविधाजनक रहता है।

'इंडिया होम हेल्थ केयर' की शुरूआत वी.त्यागराजन, समीर मेहता और जर्मन मूल के फ्रैंक गोलर ने चेन्नई में सन 2009 में की। फ्रैंक कंपनी के फाउंडर व सीईओ थे लेकिन 2013 में उन्होंने सीईओ का पद छोड़ दिया। इसके अलावा फ्रैंक एक पत्रिका भी लांच कर चुके हैं। साथ ही उनके पास डैलेटी कंसल्टिंग में कार्य करने का दस साल का अनुभव है।

एक उद्यमी के रूप में फ्रैंक हमेशा से ही कुछ नया करना चाहते थे जिससे बदलाव आए। वे उस चीज में लोगों की मदद करना चाहते थे जिसमें लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। फ्रैंक ने देखा कि भारत में होम हेल्थ केयर सेक्टर बेहद खराब है जबकि पश्चिमी देशों में यह सेक्टर काफी अच्छा काम कर रहा है। तब फ्रैंक ने तय किया कि क्यों न वे इसी क्षेत्र में काम करें और अपने काम से लोगों को सुविधा पहुंचाऐं। यह कोई नया विचार नहीं था, ऐसी काफी एजेंसी हैं जो पहले से यह कार्य कर रहीं थीं लेकिन वे अच्छी सर्विस नहीं दे रही थीं और फ्रैंक ने अच्छी सर्विस को ही अपना हथियार बनाया। उन्होंने अपने फील्ड स्टाफ को बहुत अच्छी ट्रेनिंग दी। लोगों से कैसे बात करनी है इसके व्यवहारिक गुर सिखाए। साथ ही अपने फील्ड स्टाफ पर नजर रखी ताकि क्वालिटी सर्विस मरीज़ को मिलती रहे। दूसरी चीज यह कोई एजेंसी नहीं थी। फील्ड स्टाफ के लोग कंपनी के ही कर्मचारी थे। इससे उनकी जवाबदेही बढ़ गई।

भारत और पश्चिमी देशों में रहने वाले लोगों की सोच में काफी अंतर है जहां पश्चिमी देशों में लोग जल्दी से जल्दी अपने घर जाना चाहते हैं और घर में वे होम सर्विस के लिए पैसे देने के लिए तैयार रहते हैं वहीं भारत में लोगों की सोच इस विषय में अलग है। यहां के लोग होम सर्विस में ज्यादा पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं होते और जब बहुत ज्यादा ही जरूरी हो तभी लोग होम सर्विस के लिए तैयार होते हैं। इसलिए भारत में यह काम करना काफी मुश्किल भरा था। भारत में लोग अस्पताल में तो पैसे देने के लिए तैयार थे लेकिन होम सर्विस के लिए नहीं।

फ्रैंक गोलर
फ्रैंक गोलर

लेकिन फ्रैंक डटे रहे और अपना काम करते रहे और लोगों को बेहतरीन सुविधा प्रदान करते रहे। इसका परिणाम यह निकला कि लोगों को इनका काम काफी पसंद आने लगा। सन 2013 में कंपनी ने बेयड़ा होम हेल्थ केयर, यूएस के साथ पार्टनरशिप की ताकि कंपनी का और विस्तार हो सके। इस पार्टनरशिप ने न केवल इनकी आर्थिक मदद की बल्कि इससे इंडिया होम हेल्थ केयर का विस्तार भी हुआ।

कंपनी अगले पांच सालों में भारत के 15 शहरों में विस्तार की योजना पर काम कर रही है।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...