प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासिटामॉल के सेवन से बढ़ जाता है शिशु पर खतरा

प्रिग्नेंसी में दूर रहें इस दवाई से, इसका सेवन बच्चे पर डाल सकता है नेगेटिव असर...

2

प्रेग्नेंट मां से होने वाले बच्चे को उसके प्रजनन क्रिया में समस्या खड़ी कर सकता है पैरासिटामॉल। एक नई स्टडी के मुताबिक रोडेन्ट (चूहों की एक प्रजाति) पर किये गए 3 अलग शोधों में ये पता चला है कि एक प्रेगनेंट मां से उसकी होने वाली संतान को उसके बड़े होने के बाद प्रोडक्शन क्रिया में समस्याएं आने लगती हैं।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
पैरासिटामॉल और एसिटामिनोफेन का इस्तमाल पूरी दुनिया में प्रेगनेंट महिलाओं को दर्द से छुटकारे के लिये दिया जाता है।

जानकारी के मुताबिक होने वाले बच्चों में लड़कों के लिये रिप्रोडक्शन पर खास प्रभाव नहीं करता, पर सीधा असर बच्चियों के गर्भाशय पर बड़े होने के बाद दिखता है।

प्रेग्नेंट मां से होने वाले बच्चे को उसके प्रजनन क्रिया में समस्या खड़ी कर सकता है पैरासिटामॉल। एक नई स्टडी के मुताबिक रोडेन्ट (चूहों की एक प्रजाति) पर किये गए 3 अलग शोधों में ये पता चला है कि एक प्रेगनेंट मां से उसकी होने वाली संतान को उसके बड़े होने के बाद प्रोडक्शन क्रिया में समस्याएं आने लगती हैं। एन्डोक्राइन कनेकश्न्स में छपे लेख के मुताबिक सभी तीनों शोध के नतीजे लगभग इस बात की ओर संकेत करते हैं कि पैरासिटामॉल का इस्तमाल होने वाले बच्ची के लिये भविष्य में नुकसानदेह हो सकते हैं। उसकी प्रजनन की क्षमता कम हो सकती है, क्योंकि उनमें सामान्य महिलाओं के मुकाबले गर्भाशय में अंडे कम बन पाते हैं।

हालांकि पूरी दुनिया में पैरासिटामॉल और एसिटामिनोफेन का इस्तमाल पूरी दुनिया में प्रेगनेंट महिलाओं को दर्द से छुटकारे के लिये दिया जाता है। जानकारी के मुताबिक होने वाले बच्चों में लड़कों के लिये रिप्रोडक्शन पर खास प्रभाव नहीं करता, पर सीधा असर बच्चियों के गर्भाशय पर बड़े होने के बाद दिखता है। वैसे इस बात की जानकारी भी सामान्य है कि प्रेगनेंसी के दौरान कुछ खास केमिकल्स का सेवन बच्चे के हर तरह के ग्रोथ पर असर करता है। बचपन ही नहीं युवावस्था में भी कई परेशानियां स्टडी के दौरान पाई गई हैं। 

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खोजें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनसे चूहों और इंसानों के बीच प्रजनन प्रणाली के बीच समानता को समझने में मदद मिलेगी। इन नतीजों को देखते हुए शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि गर्भवती महिलाओं को जरूरत पड़ने पर कुछ समय के लिए थोड़ी मात्रा में दर्द निवारक दवाएं लेनी चाहिए। रोडेन्ट्स और मनुष्यों में महिलाओं के जन्म के समय से ही प्रोडक्शन के लिये ज़रूरी अंडों की संख्या मौजूद होती है। इसलिये रोडेन्ट्स को ठीक वैसे ही पैरासिटामॉल के डोज़ दिये गए जैसे मनुष्यों को दिये जाते हैं। उनके बच्चों के जन्म के बाद पाया गया कि फीमेल ऑफस्प्रिंग के अंडों में कमी थी, जबकि मेल ऑफस्प्रिंग पर कोई खास असर नहीं था। 

फ्रांस में एन्वायरमेंट एट ट्रॉवेल (आईआरएसईटी) व अब इंस्टीट्यूट डि रिचेर्चे इन सेंटे से जुड़े मोबजर्ग क्रिटेनसेन ने कहा, यह चिंताजनक है। फर्टिलिटी बिल्कुल समाप्त तो नहीं हो जाती ऐसी महिलाओं की, पर अंडों की संख्या बहुत कम हो जाती है, जिससे उनको बच्चा हो पाना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि कमज़ोर अंडो को फर्टिलाइज़ होने में दिक्कत आती है। इससे पहले के शोध में देखा गया है कि पैरासिटामोल के इस्तेमाल से नर भ्रूणों में टेस्टोस्टोरोन सेक्स हार्मोन का विकास बाधित होता है। इससे शिशुओं में अंडकोष की विकृति का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन भ्रूण अवस्था में टेस्टोस्टोरोन का कम स्तर प्रौढ़ पुरुषों के व्यवहार के लिए भी महत्वपूर्ण है। टेस्टोस्टोरोन एक प्राथमिक पुरुष सेक्स हार्मोन है जो पुरुष के शरीर व दिमाग के पुरुष प्रणाली को विकसित करने में सहायक होता है।

डॉक्टर्स ये भी मानते हैं कि रोडेन्टस पर किये गए टेस्ट की अपेक्षा मनुष्यों पर भी एक बार टेस्ट ज़रूरी है इस बात को प्रमाणित करने के लिये, पर ऐसे मॉडल्स का उनको इंतज़ार है। इतना ही नहीं पैरासिटामोल के अलावा किन दवाओं या केमिकल का इस्तमाल दर्द से छुटकारे के लिये किया जाना चाहिये, इस पर शोध जारी है। तब तक पैरासिटामोल का जितना कम प्रयोग हो सके, उतना बेहतर है। ताकि अजन्मी बच्चियों का भविष्य सुरक्षित हो। कुछ ऐसा ही प्रभाव नर संतानों के जन्म पर भी देखने को मिला है। उनके पास उन कोशिकाओं की कमी थी जो भविष्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ा सकते थे। जबकि वयस्क होने के समय तक उनकी प्रजनन प्रणाली सामान्य हो गई।

अब आपको समझ आ गया हो कि आपकी थोड़ी सी लापरवाही आपके बच्चे की ज़िन्दगी को खतरे में डाल सकती है। इसलिए गर्भावस्था के समय इन सभी बातों का खास ख्याल रखें। गर्भवस्था के दौरान अगर आपको कोई भी दिक्कत महसूस हो तो पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें, क्योंकि इस अवस्था में काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। 

ये भी पढ़ें: ऐसे निकालें खुद को अकेलेपन की दलदल से

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

Related Stories

Stories by प्रज्ञा श्रीवास्तव