सिर्फ घर नहीं आपकी ज़िंदगी का भी करे केयर, 'डायमंड बिल्डिंग केयर'

-डीबीसी यानि डायमंड बिल्डिंग केयर की शुरूआत इशिता चौहान और अरशद खान ने की।- पेंटर्स को ट्रेन्ड कर नौकरी दे रहा है डीबीसी।-डीबीसी के पास 277 ट्रेन्ड वर्कर्स हैं जो लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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विजेता जीत की जो भी परिभाषा देता है वो सर्वमान्य हो जाती है लेकिन हारने वाला जो भी तर्क देता है उसे बहाना समझा जाता है। कहा जा सकता है कि जीत हमेशा जीतने वाले की ही होती है। इस जीत और हार के कई कारण होते हैं ये कारण एक गुणवान व्यक्ति की भी हार का कारण बन सकते हैं तो कई बार अपेक्षाकृत कम टेलेंटिड व्यक्ति भी काफी सक्सेस पा लेता है। मेहनत और लगन के अलावा सही समय पर सही अवसर मिलना ही प्रमुख कारण कहा जा सकता है जो एक व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है तो वहीं किसी टेलेंटिड व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक सकता है। भारत में कई व्यवसाय सीजनल हैं यानि कि उन व्यवसाय से जुड़े लोग साल में कुछ महीने ही काम करते हैं औऱ बाकी के समय उन्हें रोजगार नहीं मिल पाता तो उन व्यवसाय में काम कर रहे बहुत से टेलेंटिड लोग साल के कुछ महीनें बेरोजगार रहते हैं जिससे उनको दिक्कत होती है साथ ही देश को भी नुक्सान होता है क्योंकि यदि वे निरंतर काम पर लगे रहते तो इससे आय जनरेट होती जिससे सब का फायदा होता। एक ऐसा ही व्यवसाय है पेंटिंग का । इस कार्य से जुड़े लोगों को साल के कुछ महीने ही व्यवसाय मिलता है और अधिकांश महीने ये लोग खाली ही रहते हैं और मजदूरी करके पैसा कमाते हैं। ये लोग दीवारों को पेंट करते हैं लेकिन बरसात के मौसम में इनका व्यवसाय बिल्कुल बंद हो जाता है ।

इस निरंतरता को बनाए रखने के उद्देश्य से डायमंड बिल्डिंग केयर ने एक प्रयास किया और पेंटर्स को नौकरी दी जिससे वे साल भर काम कर सकें। भगवान सिंह एक ऐसे ही पेंटर हैं जो झालवाड़, राजस्थान से हैं उनके काम का लोहा हर कोई मानता है और उनकी गिनती सबसे बेहतरीन पेंटर्स में होती है लेकिन साल में कुछ महीन ही काम मिल पाने के कारण उनकी आर्थिक स्थिती बद से बदतर होती गई, पैसा कमाने के लिए उन्होंने मजदूरी भी की लेकिन उस कार्य में भी वे ज्यादा पैसा नहीं कमा पाए। 5 साल पहले उन्होंने डायमंड बिल्डिंग केयर को ज्वाइन किया और आज वे अच्छा पैसा कमा रहे हैं। सबसे अच्छी बात है कि वे हर महीने पैसा कमाते हैं उनकी कमाई पर कोई ब्रेक नहीं लगता। भगवान ने 10वीं तक पढ़ाई की है लेकिन वे चाहते हैं कि उनके बच्चे बहुत पढ़ाई करें और डॉक्टर बनें। एक गरीब आदमी के लिए ऐसे सपने देखना बहुत अच्छी औऱ साकारात्मक बात है। भगवान कंपनी में प्लास्टरिंग, वाटरप्रूफिंग और अन्य काम करते हैं वे अपने काम से बहुत खुश हैं औऱ पूरी मेहनत के साथ अपने काम को अंजाम देते हैं।

डीबीसी यानि डायमंड बिल्डिंग केयर की शुरूआत इशिता चौहान और अरशद खान ने की थी। इशिता एक एयर फोर्स ऑफिसर रह चुकी हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई आईआईएम बेंगलूरू से की थी । वहीं अरशद मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके हैं और बिल्डिंग और रियल एस्टेट इंडस्ट्री की अच्छी खासी नौलेज रखते हैं।

एक बार अरशद और इशिता मुंबई के एक बड़े अार्कीटेक्ट से मिलने गए लेकिन उन्होंने वहां जो देखा वो उनकी सोच से बिल्कुल अलग था और इसी ने उन्हें अपनी नई कंपनी डीबीसी की नीव रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने देखा कि उस आर्किटेक्ट का चूंकि बहुत नाम था और उनका काम भी उनका काफी अच्छा था इसलिए उनके पास काम की कोई कमी नहीं थी लेकिन उन्हें अपना काम करने में काफी दिक्कत हो रही थी क्योंकि उन्हें अपने काम के लिए विभिन्न लोगों से डील करना होता था। कोई काम करने वाला कभी छु्ट्टी मार लेता था तो कोई खराब काम कर के चला जाता था कोई काम पर लेट आ रहा था तो कोई ज्यादा पैसा मांग रहा था। इस मुलाकात के बाद इशिता और अरशद ने विचार किया कि क्यों न वे एक ऐसी कंपनी खोलें जहां बिल्डिंग केयर से जुड़ी सारी सुविधाएं वे एक छत के नीचे प्रदान करें। वो चाहे प्लास्टरिंग हो, वाटरप्रूफिंग हो, पेंटिंग हो या फिर वॉल फिनिशिंग। काफी सोच विचार के बाद नीव रखी गई डायमंड बिल्डिंग केयर की। दोनों ने प्लान किया कि कंपनी में वे सारा काम खुद ही अपने वर्कर्स से करवाएंगे और किसी दूसरी कंपनी के भरोसे नहीं रहेंगे। इसके कई फायदे थे पहला तो उन्हें किसी दूसरी कंपनी को काम के लिए पैसा नहीं देना था अपने खुद के वर्करों से काम करवाना था। दूसरा वे जिस बिल्डर के लिए काम करें उसे भी अलग-अलग कामों के लिए कहीं भटकना न पड़े वो बस इन्हें बता दे और वो भी निश्चिंत हो जाए।

उ्न्होंने लोगों को हायर करना शुरू किया वे उनको प्रोपर ट्रेनिंग देते औऱ फिर काम पर लगा देते। लोगों के चयन में वे काफी सतर्कता बरतते हैं पहले इंटरव्यू लिया जाता है फिर उनकी पिछली नौकरी के बारे में पूरी जानकारी लेकर पड़ताल की जाती है फिर उनका आईडी वगैरा और पुलिस वैरिफिकेशन करवाया जाता है उसके बाद ही किसी को नौकरी दी जाती है। इशिता औऱ अरशद पेंटर्स का ही चुनाव करते हैं ताकि उनको साल भर आमदनी हो सके ट्रेनिंग के दौरान वे सबसे पहले उनको ब्रश थमाते हैं और उसी से मिलते जुलते कार्य देते हैं चूंकि पेंटर्स का हाथ ब्रश के प्रयोग में काफी अच्छा होता है तो उनके लिए भी शुरूआत आसान होती है और वे बहुत जल्द सारा काम आसानी से सीख लेते हैं। डीबीसी पेंटर्स को वाटरप्रूफिंग, थर्मल इंस्यूलेशन, क्लींग सर्विसिज, वर्टिकल गार्डनिंग, पेस्ट कंट्रोल, पेंटिंग सोल्यूशन, वुडन फ्लोरिंग, प्लंबरिंग औऱ कारपेंटर की ट्रेनिंग देते हैं। इससे इन लोगों का आर्थिक स्तर तो बढ़ता ही है साथ ही उनका सामाजिक स्तर भी बढ़ता है।

आज डीबीसी के पास 277 ट्रेन्ड वर्कर्स हैं जो लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं साथ ही अपनी जिंदगी का स्तर भी बढ़ा रहे हैं।

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