अनुशासन से संबंधित 10 नियम जिनका ध्यान प्रत्येक स्टार्टअप के संस्थापक को रखना चाहिये

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वाईएस टीम हिंदी

लेखकः शुचि अग्रवाल

अनुवादः निशांत गोयल


मैं यह लेख सिर्फ अपने उस अनुभव के चलते लिख रहा हूँ जो मेरे लिये आंख खोलने वाला साबित हुआ। मैं कई स्टार्टअप्स के साथ काम कर चुका हूँ और कुछ स्टार्टअप की स्थापना अपने दम पर भी कर चुका हूँ। सीधे और सरल शब्दों में कहूं तो मुझे इनके साथ काम करने में मजा आता है। माहौल में फैला उत्साह, जितना अधिक से अधिक आप कर सकते हैं उतना करने की प्रेरणा, और स्वयं को कई भूमिकाओं के निर्वहन के लिये ढालना हर किसी को बेहद पसंद आता है। नतीजतन हमारे भीतर लगातार सीखने की लालसा बढ़ती जाती है। एक स्टार्टअप के साथ काम करने के दौरान आपके पास कुछ नया सीखने की असीमित संभावनाएं होती हैं और ऐसा करने के लिये भारत में सिलिकाॅन वैली बैंगलोर से बेहतर और कौन सी जगह हो सकती है।

हालांकि मेरा पिछला अनुभव वास्तव में काफी चैंकाने वाला रहा। मेरा पहला दिन काफी सकारात्मक रहा और मेरे पास कंपनी के तकनीकी साझीदार को देने के लिये काफी इनपुट थे लेकिन आने वाले दिन मेरे लिये एक बुरे सपने की तरह रहे जब माहौल को ‘ठेठ’ स्टार्टअप का माहौल बनाने का प्रयास किया जाने लगा। मैं इस बात को लेकर निश्चित नहीं हूँ कि यहां पर ‘ठेठ’ का क्या मतलब निकल सकता है क्योंकि कई चीजें व्यवसायिकता के दायरे में हो रही थीं।

कार्यालय में रखा रेफ्रीजरेटर बीयर के केन से भरा हुआ था और इसके अलावा अन्य चीजों सहित बार टेबल भी पूरी तरह से गुलजार थी। मेरी जाॅइनिंग के पहले ही सप्ताह में सीईओ के साथ हुई मेरी मुलाकात कुछ ऐसी रही जिसे एक पेशेवर के तौर पर स्वीकार करना मेरे लिये नामुमकिन था। वह मेरी मेज के बिल्कुल सामने बैठा था और मेरी एक महिला सहयोगी तेल लेकर उसके सिर की मालिश कर रही थी। मुझे इतना बुरा लगा कि मैं काम के बारे में बिल्कुल चर्चा ही नहीं कर सका!

चीजें ऐसे ही आगे बढ़ती रहीं लेकिन इनके नियंत्रण से बाहर जाने से पहले ही मैंने अपने कदम पीछे खींच लिये। औफ्फ! जी हां, स्टार्टआ न तो एक कठोर संरचना हैं, न ही वे चीजों को लेकर तनावग्रस्त हो सकते हैं लेकिन इसके बावजूद बुनियादी अनुाशसन तो एक आवश्यकता है ही और अपनी टीम के भीतर नियमों का पालन करवाना मुख्य रूप से स्टार्टअप के संस्थापकों की जिम्मेदारी है।

नियम संख्या 1
मित्र सिर्फ मित्र होते हैं और सहयोगी सिर्फ सहयोगी

यह किसी भी स्टार्टअप के संस्थापक के लिये अपनाया जाने वाला पहला नियम है। हो सकता है कि आपके कुछ मित्र उद्यमशीलता के सफर में आपके साथी बनें लेकिन उन्हें भी टीम के किसी भी अन्य सदस्य की तरह ही अपनी पेशेवर महत्ता को साबित करना होगा और नतीजे देने पड़ेंगे।

नियम संख्या 2
कानूनी औपचारिकताओं से दूर न भागें

हम यह अच्छी तरह से समझते हैं कि अगर आप एक स्टर्टअप हैं तो इस बात की पूरी संभावनाएं हैं कि तमाम प्रक्रियाओं का पालन ठीक तरीके से न किया गया हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कैसी भी मानक प्रथाओं के पालन से पीछे हटें विशेषकर कर्मचारियों को रखने के मामले में। हो सकता है कि आपके मित्र बिना कागजी कार्रवाई के आपका साथी बनने को आतुर हों लेकिन आप अन्य सदस्यों से बिना एक आॅफर लेटर के अपने साथ काम करने की उम्मीद नहीं कर सकते। यह सुनिश्चित करें कि आपकी कागजी कार्रवाई बिल्कुल पूर्ण हो क्योंकि हो सकता है कि आने वाले समय में आपकी टीम के साथी आपके साथ न हों लेकिन तब भी वे आपके बारे में बड़ी बात ही करें।

नियम संख्या 3
अपने कर्मचारियों का सम्मान करें। आपने किसी कारण से ही उन्हें साथ रखा है।

आप अपने कर्मचारियों को उनकी काबिलियत दिखाने का मौका दें और जल्दबाजी में किसी नतीजे पर न पहुंचे। अक्सर लोगों को किसी भी कंपनी और वहां के काम के माहौल से सामंजस्य बैठाने में कुछ समय लगता है। आप उनके काम पर भरोसा करना सीखें और कार्य में सुधार लाने के उद्देश्य से उनकी आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव लाने को तैयार रहें।

नियम संख्या 4
एक ऐसी कार्यपद्धति का निर्माण करें जो मनोरंजक हो लेकिन अजीब न हो

किसी भी कार्यालय में आपको सिर की मालिश की इजाजत नहीं मिलेगी। इस उच्च तनाव के दौर में थोड़ा मजा, हंसी-मजाक और छोटी वार्ताओं के दौर तक तो ठीक है लेकिन अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि संस्थापक कर्मचारियों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाकर या फिर उनके साथ बहुत अधिक दोस्ताना व्यवहार करके उन्हें असहज स्थिति में न डालें बल्कि वे उनके सामने सही उदाहरण स्थापित करें।

नियम संख्या 5
अपना रुख लचीला रखें ताकि कर्मचारी आपके साथ अधिक समय तक टिकें

जैसे-जैसे कंपनी का विकास होता है दैनिक आधार पर कर्मचारियों, विशेषकर महिलाओं की बढ़ती संख्या के प्रबंधन के मद्देनजर कुछ विशेष प्रक्रियाओं और नियमों का पालन करना वैसे-वैसे ही आवश्यक होता जाता है। हम इस तथ्य से पूर्णतः सहमत हैं कि काम सबसे अधिक महत्वपूर्ण है लेकिन कार्य और जीवन के बीच संतुलन स्थापित करना भी बहुत जरूरी है। आप यह सुनिश्चित करें कि आप अपने कर्मचारियों को घरेलू माहौल उपलब्ध करवाएं या फिर उनको बहुत जल्द आपका साथ छोड़ते देखने के लिये तैयार रहें।

नियम संख्या 6
पक्षपात को भूलकर भी प्रोत्साहन न दें

प्रत्येक व्यक्ति कुछ अलग प्रतिभा से लैस होता है और किसी की ताकत या कमजोरियां एक समान नहीं होती हैं। ऐसे में ही किसी के भी अनुभव की असल परीक्षा होती है। किसी की ताकत को पहचानते हुए उसे कंपनी के लाभ के लिये इस्तेमाल करना कोई आसान काम नहीं है। अगर संस्थापक प्रत्येक व्यक्ति के गुण-दोष को नहीं पहचान पाते हैं तो वे अपनी दृष्टि को ही बाधित और सीमित करेंगे।

नियम संख्या 7
हर समय विनम्र रहें

कभी भी इस बात पर अधिक गर्व मत करो कि आपकी कंपनी को कितना निवेश मिला है या फिर आपकी कंपनी कितना राजस्व अर्जित कर रही है। कभी भी अपने कर्मचारियों के सामने दिखावा मत करो। यह बात हमेशा याद रखो कि अबसे कुछ वर्ष पूर्व तक आपके पास ऐसा पैसा नहीं था और उस समय यही वह टीम थी जिसके सहयोग की बदौलत आप सफलता का स्वाद चखने में सफल रहे हैं।

नियम संख्या 8
अपनी शक्तियों पर ध्यान केंद्रित करें और उन्हें बढ़ाएं

एक स्टार्टअप का सीईओ होने का सीधा मतलब यह है कि आपको कुछ भी करने के लिये हरदम तैयार रहना चाहिये। हो सकता है कि व्यापार के कुछ आयाम ऐसे हो जिनके बारे में आपको कुछ पता न हो लेकिन आप उन्हें सीखने के प्रयास करते रहें। सब कुछ जानने वाला बनने में कोई फायदा नहीं है। कर्मचारियों को आपसे एक अच्छे उदाहरण की उम्मीद रहती है। जब वे आपको कुछ प्राप्त करने की ओर अग्रसर देखते हैं तो वे भी ऐसा करने को प्रेरित होते हैं।

नियम संख्या 9
अपने संवाद करने के तरीके को लेकर सतर्क रहें

किसी भी कार्यालय का माहौल वहां प्रयोग होने वाली बोलचाल की भाषा और शारीरिक भावभंगिमा पर निर्भर करता है। अपनी टीम के सामने कसम खाना, चिल्लाना या दूसरों को नीचा दिखाना या फिर बेवजह चिल्लाना आपके साथ काम कर रहे लोगों को आपसे दूर ले जाता है। समग्र उत्पादक्ता प्रभावित होती है और कर्मचारी एकाकी हो जाते हैं। वे अपने विचारों के साथ सामने आने में संकोच महसूस करेंगे और कंपनी के मिशन में सहयोग करने में खुद को सक्षम नहीं पाएंगे।

नियम संख्या 10
सहानुभूति अत्यंत आवश्यक है

संस्थापक को निश्चित रूप से कर्मचारियों के साथ सहानुभमतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिये और उनकी तरफ मदद के हाथ बढ़ाने चाहियें ताकि वे आपके स्टार्टअप की भलाई की दिशा में कार्य करते रहें। अगर आपको किसी को नौकरी से निकालना भी है तो ऐसा सम्मानजनक तरीके से करें। अगर आपको अपने किसी कर्मचारी को रातोंरात हटाना भी है तो आप उसके साथ ऐसा व्यवहार करें जैसे की आप दूसरों से अपने लिये उम्मीद करते हैं।

भारत में बहुत तेजी के साथ स्टार्टअप सामने आते जा रहे हैं और अधिकतर संस्थापक अपने आसपास वालों के लिये किसी भी प्रकार का उपेक्षा का भाव नहीं रखते हैं। कई बार अचानक हाथों में आई सत्ता या फिर अचानक से हुई धन की अतिउपलब्धता के चलते संस्थापक बुनियादी मानवता को भूल जाते हैं। उनकी ऊर्जा का सही दिशा में प्रयोग करना बहुत आवश्यक है।

स्टार्टअप दूसरों के सामने उदाहरण स्थापित करने में एक महती भूमिका निभाते हैं जैसे फेसबुक और गूगल जैसे पेशेवरों ने सफलतापूर्वक करके दिखाया है। लेकिन यह भी याद रखिये कि मार्क जुकरबर्ग और लैरी पेज बहुत ही महान संस्थापक हैं।

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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