245 रुपए की मासिक सैलरी पर काम करने वाले पलानी जी. पेरिसामी कैसे बन गये 1000 करोड़ के मालिक

आप भी पढ़ें गांव के स्कूल में पढ़कर अमेरिका होते हुए 1,000 करोड़ का टर्नओवर देने वाली कंपनी के मालिक पलानी जी. पेरिसामी की अद्भुद जीवन यात्रा...

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क्या आपने कभी सुना है, कि जिसकी पहली सैलरी 245 रुपए हो, वो 1,000 करोड़ का टर्नओवर देने वाली कंपनी खड़ी कर ले? जी ये सच है, हम बात कर रहे हैं, तमिलनाडु के पलानी जी. पेरिसामी की, जिनका सफर शुरू तो हुआ था एक गांव के स्कूल से, लेकिन अमेरिका होते हुए अपने देश में हज़ार करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी तक पहुंच गया। डिग्री से प्रोफेसर पलानी आज की तारीख में 5स्टार होटल के मालिक हैं और ये सबकुछ उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर खड़ा किया है। पलानी उदाहरण हैं उन तमाम युवाओं के लिए जो अपनी असफलता का श्रेय अभावों के मत्थे मढ़ देते हैं...

नीले सूट में PGP ग्रुप अॉफ कंपनीज़ के चेयरमैन डॉ. पलानी जी. पेरिसामी
नीले सूट में PGP ग्रुप अॉफ कंपनीज़ के चेयरमैन डॉ. पलानी जी. पेरिसामी
ऐसा कम ही होता है कि कोई पढ़ाई में अव्वल हो, छात्र राजनीति में भी बराबर दखल करे और फिर बिजनेस में भी। लेकिन तमिलनाडु के पलानी जी. पेरिसामी इसके जीते-जागते उदाहरण हैं, जिन्होंने गांव के स्कूल में पढ़कर अमेरिका होते हुए आज 1,000 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी खड़ी कर ली है।

त्रिची से इकनॉमिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट पलानी जी. पेरिसामी चेन्नई से पीजी करते वक्त 1960-62 में प्रेजीडेंसी कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट चुने गए थे। पश्चिमी तमिलनाडु में नमक्कल के पास मुथुगपट्टी गांव में पैदा हुए पलानी की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गांव के ही तमिलनाडु बोर्ड के एक स्कूल में हुई थी। बाद में उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर अमेरिका से पीएचडी पूरी की और वहीं से बिजनेस शुरू कर दिया।

"1973 में जब वह अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी कर रहे थे तो कई भारतीय डॉक्टर भी उनके साथ रहते थे। वहां पर टैक्स में कटौती करवाने के लिए कुछ डॉक्टरों ने उनसे सलाह मांगी। इकोनॉमिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट पलानी पेरीसामी को अमेरिकी कानूनों की अच्छी जानकारी थी। उन्होंने डॉक्टरों की मदद करने के लिए 1976 में अमेरिका में ही PGP इंडस्ट्रियल & फाइनैंशियल कंसल्टैंट कॉर्पोरेशन नाम की एक रिएल एस्टेट इन्वेस्टमेंट कंपनी खोली। उस वक्त कंपनी में सभी ने मिलकर 260,000 डॉलर इन्वेस्ट किए। इन पैसों से अमेरिका में एकक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स खरीदा गया। 15 महीने बाद अच्छे खासे प्रॉफिट में उसे बेच दिया गया। इससे दो फायदे हुए एक तो सभी इन्वेस्टर्स को टैक्स में छूट मिली और इस प्रॉपर्टी को बेचकर अच्छा खासा फायदा भी हो गया।"

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1987 में पेरिसामी ने तमिलनाडु में धारानी सीमेंट्स नाम से सीमेंट फैक्ट्री खोली। यह उनका पहला प्रोजेक्ट था। हालांकि 1998 में उन्होंने इसे आदित्य बिरला ग्रुप के हाथों बेच दिया। इसके बाद पेरीसामी ने रिएल एस्टेट में इन्वेस्ट करना जारी रखा। उन्होंने इन पैसों से कई कंपनियों में निवेश किया और तमाम बिल्डिगें और शॉपिंग मॉल खरीदे। कई प्रॉपर्टी खराब हालत में थीं, उनकी मरम्मत कराकर उन्हें किराए पर भी दिया गया। बाद में उनमें से कई प्रॉपर्टी को बेचा भी गया। ये सिलसिला लंबे समय तक चलता और देखते ही देखते पलानी पेरीसामी अच्छी खासी संपत्ति के मालिक बन बैठे।

पेरिसामी के पास चेन्नई में ले रॉयल मेरिडियन जैसा होटल है। वर्ष 2000 में खोले गए उनके होटल में 250 रूम हैं। इस फाइव स्टार होटल से उन्हें हर साल लगभग 88 करोड़ का टर्नओवर हासिल होता है। उनके सारे बिजनेस PGP ग्रुप के अंदर ही चलते हैं। इस ग्रुप के कोयंबटूर, कुंबकम सहित कई सारे होटल हैं। इतना ही नहीं पेरिसामी ने सुगर मिल्स, फाइनैंस कंपनी, रिएल एस्टेट डिवेलपर्स की कंपनियों में भी खूब निवेश किया। 369 टर्नओवर वाली धारानी सुगर और केमिकल्स पबल्कि लिमिटेड कंपनी उन्हीं के ग्रुप की है।

सौम्य स्वभाव पलानि पेरिसामी का कहना है, 'मैं ये सब इंडस्ट्री स्थापित करने में सिर्फ इसलिए सफल रहा क्योंकि मेरे अमेरिकी दोस्त हरदम मेरे साथ खड़े थे। मैंने उन्हें प्रोफिट दिलाने के लिए जमकर मेहनत की।' अपने पुराने दिनों को याद करते हुए पलानि कहते हैं, 'मैं गांव में ऐसे परिवार में पैदा हुआ था जो खेती करता था। हम धान, तंबाकू और मूंगफली की खेती करते थे।' उन्होंने सीनियर सेकंड्री तक की पढ़ाई गांव में ही तमिलनाडु बोर्ड के एक स्कूल में की। बाद में आगे की पढ़ाई के लिए वह कराइकुड़ी आ गए। वहां पर इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई होती थी। पलानि के परिवार में छह भाई बहन थे। उनसे बड़ी चार बहने थीं और उनसे छोटे एक भाई और एक बहन। वह अपने पिता को जिंदगी का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानते हैं। उनके घर में जब मजूदर खेतों में काम करते थे तो सबसे पहले उन्हीं को फसल दी जाती थी और उनकी वजह से गांव में जाति के नाम पर कोई झगड़ता भी नहीं था। पलानि बताते हैं कि इससे उन्हें काफी प्रेरणा मिली और आज भी वह कर्मचारियों का बेहद सम्मान करते हैं।

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पलानि पेरिसामी हैं, 'मेरे पिताजी के दो अजीज दोस्त थे। जिनमें से एक रेड्डी समुदाय से आते थे, जो कि पूरी तरह से शाकाहारी थे, वहीं दूसरी तरफ एक और दोस्त थे जो कि मुस्लिम थे। हमें खास मौकों पर दोनों के यहां जाने को मिलता था और इसी बहाने दोनों तरह के भोजन हमें खाने को मिलता था।'

बचपन में पेरिसामी महात्मा गांधी और अब्राहम लिंकन जैसी शख्सियत से काफी प्रभावित थे। उन्होंने गांव की लाइब्रेरी में इन महापुरुषों की जीवनी पढ़ी थी। एक वक्त ऐसा भी था जब पलानि ने आईएएस बनने का सोच लिया था।

एक पुराने वाकये को याद करते हुए पलानि बताते हैं, 'एक बार मुझे अपने डॉक्युमेंट्स को अटेस्ट करवाने के लिए तहसीलदार के ऑफिस जाना पड़ा। वहां मुझसे एक रुपये की घूस मांगी गई, लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। और इसी वजह से मुझे लगभग एक हफ्ते तक सरकारी ऑफिस के चक्कर लगाने पड़े। बाद में डिप्टी कलेक्टर से मिलने के बाद मेरा काम हो गया।' पलानी बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने सोचा कि वह भी आईएएस बनेंगे और सभी बच्चों के सर्टिफिकेट फ्री में अटेस्ट करेंगे। इसी उद्देश्य से उन्होंने ग्रेजुएशन में दाखिला भी ले लिया, लेकिन उनका मन पढ़ने पढ़ाने में ज्यादा लगने लगा और वह पढ़ते ही रहे। बाद में उन्होंने आईएएस बनने का ख्वाब छोड़ दिया और चेन्नई की एक बड़ी प्राइवेट कंपनी में 640 रुपये की नौकरी कर ली। लेकिन यहां भी उनका मन नहीं लगा औऱ जल्द ही उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी। उनकी शुरुआती ज़िंदगी कई दिशाओं में भटकते हुए गुज़री।

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आखिर में अपने प्रोफेसर की सलाह मानकर उन्होंने कोयंबटूर के पीजीएस आर्ट्स कॉलेज में 245 रुपये की नौकरी कर ली। तकरीबन एक साल नौकरी करने के बाद वह पुडुचेरी चले गए और वहां पर आर्ट्स कॉलेज में पढ़ाने लग गए। बाद में वह आगे की पढ़ाई के लिए पीएचडी करने के लिए अमेरिका गए और वहां पर से अपना बिजनेस खड़ा किया।

उनकी पत्नी विसालक्षी बीबीए ग्रेजुएट हैं और सिस्टम एनालिस्ट रह चुकी हैं। अब वह PGP ग्रुप के शिक्षण संस्थानों को देखती हैं। दोनों ने 1964 में शादी की थी। तब पलानि 25 साल के थे और विसालक्षी महज 17 साल की थीं। उनकी चार बेटियां हैं जिनमें से तीन अमेरिका में वेल सेटल्ड हैं। उनकी तीसरी छोटी बेटी चेन्नई में उनका बिजनेस संभालती है।

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