आप भी समझिए, क्या है भारत सरकार की नज़र में स्टार्टअप, किसे कहेंगे स्टार्टअप...

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भारत सरकार द्वारा देश में स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल की घोषणा की गई है। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा इस प्रयोजन के लिए कार्यकलाप शुरू किए गए हैं। पहचान किए गए उद्यमों में एकरुपता लाने के उद्देश्य से किसी संस्था को निम्नानुसार स्टार्टअप माना जाएगा—

(क) उसके निगमीकरण या पंजीकरण की तिथि से पांच साल तक,

(ख) यदि किसी वित्तीय वर्ष में उसका कारोबार(टर्नओवर) 25 करोड़ से अधिक नहीं है, और

(ग) वह अभिनवीकरण, प्रौद्योगिकी या बौद्धिक संपदा आधारित नए उत्पादों, प्रक्रियाओं अथवा सेवाओं के विकास, अनुप्रयोग या वाणिज्यीकरण के सम्बन्ध में कार्य कर रहा है;

पहले से ही अस्तित्व वाले किसी व्यवसाय के विभाजन या उसके पुनर्निर्माण के माध्यम से बनाई गई किसी संस्था को ‘स्टार्टअप’ नहीं माना जाएगा;

उपर्युक्त परिभाषा के अनुसार पहचान किए गए किसी स्टार्टअप को कर लाभ प्राप्त करने के लिए अंतर मंत्रालयी प्रमाणन बोर्ड के पात्र व्यवसाय का प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अपेक्षित होगा जिसमें निम्नलिखिति शामिल हैं:

(क) संयुक्त सचिव, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग,

(क) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रतिनिधि, और

(ग) जैव-प्रौद्योगिकी विभाग के प्रतिनिधि। 


स्पष्टीकरण

1. कोई संस्थान अपने निगमीकरण या पंजीकरण की तिथि से पांच वर्ष पूरे होने पर अथवा किसी विगत वर्ष में उसका कारोबार 25 करोड़ रुपए से अधिक होने पर ‘स्टार्टअप’ के रूप में नहीं माना जाएगा।

2. संस्थान का अर्थ है- कोई निजी क्षेत्र लिमिटेड कंपनी(कंपनी अधिनियम, 2013 में यथा परिभाषित), अथवा पंजीकृत साझेदारी फर्म (साझेदारी अधिनियम, 1932 के खण्ड 59 के तहत पंजीकृत) या लिमिटेड देयता साझेदारी (लिमिटेड देयता साझेदारी अधिनियम, 2002 के अन्तर्गत)।

3. कारोबार का अर्थ, कंपनी अधिनियम, 2013 में परिभाषित किए अनुसार है।

4. किसी संस्थान को अभिनवीकरण, प्रौद्योगिकी या बौद्धिक संपदा आधारित नए उत्पादों, प्रक्रियाओं या सेवाओं के विकास, अनुप्रयोग या वाणिज्यीकरण के संबंध में कार्यरत माना जाता है, यदि उसका लक्ष्य निम्नलिखित को विकसित करना और उनका वाणिज्यीकरण करना है:

(क) एक नया उत्पाद या सेवा या प्रक्रिया अथवा 

(ख) महत्वपूर्ण रूप से सुधार किए गए मौजूदा उत्पाद, सेवा या प्रक्रिया, जो ग्राहकों या कार्य के प्रवाह के सृजन या उसके मूल्य संवर्धन में सहायक हो।

मात्र निम्नलिखित को विकसित करने सम्बन्धी कार्य को परिभाषा में शामिल नहीं माना जाएगा—-

(क) उत्पाद या सेवाएं या प्रक्रियाएं जिनमें वाणिज्यीकरण की संभावना नहीं हो, अथवा 

 (ख) एक समान उत्पाद या सेवाएं या प्रक्रियाएं अथवा 

(ग) उत्पाद या सेवा या प्रक्रियाएं जो ग्राहकों या कार्य के प्रवाह के सम्बन्ध में मूल्य संवर्धन नहीं करते या सीमित वृद्धि करते हुए हों, 

5. ‘स्टार्टअप’ के रूप में मान्यता संबंधी प्रक्रिया, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के मोबाइल एप/ पोर्टल के माध्यम से होगा। स्टार्टअप्स को निम्नलिखित दस्तावेजों में से एक के साथ साधारण आवेदन-पत्र प्रस्तुत करना होगा:

(क) भारत के किसी भी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्थापित किसी इन्क्यूवेटर से औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा विनिर्दिष्ट प्रपत्र में अनुशंसा(व्यवसाय की अभिनव प्रकृति के संबंध में); या

(ख) किसी इन्क्यूवेटर का समर्थन पत्र, जिसका निधियन(परियोजना के संदर्भ में), अभिनवीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए किसी निर्दिष्ट योजना के भाग के रूप में भारत सरकार या कोई राज्य द्वारा किया जाता हो; या

(ग) भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी इन्क्यूवेटर से औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा विनिर्दिष्ट प्रपत्र में अनुशंसा(व्यवसाय की अभिनव प्रकृति के संबंध में); या

(घ) किसी इन्क्यूवेशन फंड/एंजल फंड/निजी इक्विटी फंड/त्वरित/एंजल नेटवर्क जो भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड में पंजीकृत हो, के द्वारा इक्विटी में 20 प्रतिशत या इससे अधिक के निधियन का पत्र जो व्यवसाय के अभिनव रूप को स्वीकारता हो। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग ऐसे कारणों के लिए नकारात्मक सूची में ऐसे किसी भी फंड को शामिल कर सकता है जो वह उचित समझे; या

(च) भारत सरकार या किसी राज्य सरकार का अभिनवीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए किसी निर्दिष्ट योजना के भाग के रूप में निधियन पत्र; या

(छ) व्यवसाय के स्वरुप को संवर्धित करने वाले क्षेत्रों में भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा पत्रिका में दर्ज किया गया और प्रकाशित किया गया पेटेंट। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग ऐसे मोबाइल एप/पोर्टल के शुरू होने तक स्टार्टअप को मान्यता देने के वैकल्पिक व्यवस्था कर सकता है। एक बार संबद्ध दस्तावेज के साथ ऐसा आवेदन अपलोड हो जाने पर स्टार्टअप को वास्तविक समय मान्यता नम्बर जारी किया जाएगा। यदि बाद में सत्यापन के समय यह पाया जाता है कि यह मान्यता, दस्तावेज के बिना अपलोड किए गए या अन्य दस्तावेज अपलोड होने या जाली दस्तावेज होने के कारण प्राप्त हुई है, तो संबंधित प्रार्थी दण्ड का भागी होगा जो स्टार्टअप की प्रदत्त पूंजी का 50 प्रतिशत होगा, लेकिन यह 25,000 रुपए से कम नहीं होगा।

यह अधिसूचना, राजकीय राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू होगी। 

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