बारिश से बह गए  पहाड़ों के रास्ते, सरकारी अध्यापक जान जोखिम में डाल पहुंच रहे पढ़ाने

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इन दिनों मॉनसून के मौसम में पहाड़ी राज्यों का हाल बदहाल हो जाता है और पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा जैसी सुविधाएं स्थानीय लोगों के लिए दूर की कौड़ी बन जाती हैं।

 भयंकर बारिश और पहाड़ों पर मौसम की अनिश्चितता के बीच एक मामूली तार का भी कुछ भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन जोध सिंह का हौसला भी इस कठिनाई को चीरता हुआ आगे बढ़ जाता है। 

एक तरफ जहां शिक्षा आज के जमाने में अधिक से अधिक पैसा कमाने वाला व्यापार बनता चला जा रहा है वहां अभी भी ऐसे शिक्षक मौजूद हैं जो समाज को शिक्षित करने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाने से नहीं डर रहे। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के शिक्षक जोध सिंह कुंवर की, जो एक जिप लिंक के सहारे उफनाती नदी पार करते हैं और बच्चो को पढ़ाने स्कूल पहुंचते हैं। इन दिनों मॉनसून के मौसम में पहाड़ी राज्यों का हाल बदहाल हो जाता है और पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा जैसी सुविधाएं स्थानीय लोगों के लिए दूर की कौड़ी बन जाती हैं।

सड़क टूट जाने और नदियों में पानी की मात्रा बढ़ जाने की वजह से बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते। कई बार गांव के लोगों को बीमार पड़ने पर स्ट्रेचर पर लादकर दूर अस्पताल पहुंचाया जाता है। ऐसे में जोध सिंह कंवर जैसे शिक्षक अपनी महानता का परिचय देते हैं और जान जोखिम में डाल मुश्किलों की बाधाएं पार करते स्कूल जा पहुंचते हैं। हाल ही में एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक विडियो पोस्ट किया था जिसमें जोध सिंह कुंवर 30 मीटर लंबी जिप लाइन पर लटकते हुए नदी को पार कर रहे थे। दरअसल इसके पहले नदी के दोनों किनारों को जोड़ने के लिए जो अस्थाई बंदोबस्त था, बारिश की वजह से वह बह गया। इस हाल में दोनों तरफ का संपर्क टूट गया।

उस वीडियो में जोध सिंह कुंवर को एक व्यक्ति सहारा देकर जिप लाइन पर चढ़ाता है और अपने पेट पर नीला बैग बांधकर वह तारों पर उल्टे लटकते नदी को पार कर जाते हैं। इस बीच नदी का बहाव इतना तेज होता है कि अगर उसमें कोई व्यक्ति गिर जाए तो उसका बचना नामुमकिन सा होगा। भयंकर बारिश और पहाड़ों पर मौसम की अनिश्चितता के बीच एक मामूली तार का भी कुछ भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन जोध सिंह का हौसला भी इस कठिनाई को चीरता हुआ आगे बढ़ जाता है। जिप लाइन के सहारे वह नदी के दूसरे छोर पर पहुंचते हैं और फिर वहां से वे अपने स्कूल जाते हैं।

हालांकि जोध सिंह ऐसे अकेले अध्यापक नहीं हैं जो जान जोखिम में डाल नदी को पार करते हैं, बल्कि दनियबागद के कई सरकारी स्कूल के अध्यापक इसी रास्ते और इसी तरीके से अपने-अपने स्कूल पहुंचते हैं। इलाके में काली और गोरी नदी बहती हैं जो बारिश में तेज बहाव के चलते रौद्र रूप धारण कर लेती हैं। इसी वजह से इलाके की 22 सड़कें ब्लॉक हो चुकी हैं। इतना ही नहीं उत्तरकाशी जिले में तो भारी बारिश की वजह से स्कूल की इमारत भी ढह गई। हालांकि अच्छी बात ये रही कि उससे किसी की जानमाल का नुकसान नहीं पहुंचा।

देश में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है और इस स्थिति में सरकारी स्कूल के अध्यापकों का जान जोखिम में डाल शिक्षा की अलख जगाना अपने आप में न केवल अनोखा है बल्कि उसकी जितनी सराहना की जाए कम है। जिन बच्चों को भी ऐसे शिक्षक मिले हैं, वे गर्व के मारे फूले नहीं समाते होंगे। हम उम्मीद करते हैं कि मुश्किल हालात में शिक्षा पाने वाले ऐसे बच्चे आगे चलकर न केवल अपना भविष्य संवारेंगे बल्कि इस स्थिति को भी बदलेंगे जहां अध्यापकों को जिप लाइन के सहारे नदी पार करना पड़ रहा है।

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