निवेश से लेकर सफलता की राह दिखाने तक नए स्टार्टअप्स का पूरा साथ निभाती है यह कंपनी

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आज से पांच साल पहले तक, रीटेल, ऑयल और ऐनर्जी सेक्टर में काम करने वाली कंपनियां यूएस के स्टॉक मार्केट पर राज करती थीं और आज की तारीख़ में फ़ेसबुक, ऐपल, ऐमज़ॉन, नेटफ़्लिक्स और अल्फ़ाबेट्स गूगल जैसी कंपनियों ने अपना वर्चस्व बनाकर रखा है।

शशांक और वरुण
शशांक और वरुण
शुरुआती स्तर पर निवेश उपलब्ध कराने वाली बाक़ी कंपनियों से अलग, ऐवलॉन अपने क्लाइंट्स के बिज़नेस मॉडल को बेहतर बनाने और आगे बढ़ने में हर संभव मदद मुहैया कराती है। अभी तक कंपनी 6 स्टार्टअप्स में निवेश कर चुकी है, जिनमें माना नेटवर्क, फ़ॉक्स बाउंड और एनकिडु प्रमुख हैं।

ऐवलॉन लैब्स एक विश्वस्तरीय टेक्नॉलजी और ब्लॉकचेन कंपनी है, जो शुरुआती स्तर पर सॉफ़्टवेयर स्टार्टअप्स की हर संभव मदद करती है। कंपनी के फ़ाउंडर्स, वरुण मय्या और शशांक उदुपा ने युवा ऑन्त्रप्रन्योर्स को सही राह दिखाने का लक्ष्य तय किया है। आज से पांच साल पहले तक, रीटेल, ऑयल और ऐनर्जी सेक्टर में काम करने वाली कंपनियां यूएस के स्टॉक मार्केट पर राज करती थीं और आज की तारीख़ में फ़ेसबुक, ऐपल, ऐमज़ॉन, नेटफ़्लिक्स और अल्फ़ाबेट्स गूगज जैसी कंपनियों ने अपना वर्चस्व बनाकर रखा है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ही वरुण और शशांक ने मिलकर 'ऐवलॉन लैब्स' की शुरुआत की थी। ऐवलॉन एक माइक्रो वेंचर कैपिटल कंपनी है, जो बेहद ख़ास आइडियाज़ को आगे बढ़ाने में सहयोग करती है। कंपनी के पास 40 लोगों की कोर टीम है, जो लगभग 1 मिलियन डॉलर तक के रेवेन्यू का दावा करती है। हालांकि, कंपनी ने रेवेन्यू का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया है।

ऐवलॉन लैब्स के को-फ़ाउंडर वरुण ने मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी से कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई की है, जबकि शशांस ने मुंबई के एसआईईएस कॉलेज से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया है। दोनों ही ने 2016 में ग्रैजुएशन की डिग्री ली थी। दोनों को-फ़ाउंडर्स रिश्तेदार हैं और हमेशा से ही स्टार्टअप्स में उनकी ख़ास रुचि रही है। वरुण ने महज़ 19 साल की उम्र में जॉब्सपायर नाम से अपना पहला स्टार्टअप शुरू किया था। इस स्टार्टअप को काफ़ी लोकप्रियता मिली। यह रिक्रूटमेंट प्लेटफ़ॉर्म था, जिसमें करीबन 1,90,000 आवेदकों ने साइन अप किया था। इतना ही नहीं, ऊबर और स्विगी जैसी बड़ी कंपनियों समेत कुल 1,500 कंपनियों ने हायरिंग के लिए इस प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया। जॉब्सपायर की टीम वीसी लेवल फ़ंडिंग हासिल करने वाली सबसे युवा टीमों में से एक बनी। 2017 में कंपनी ने सफलतापूर्वक मार्केट से एग्ज़िट लिया।

वरुण मानते हैं कि इस इंडस्ट्रियल युग में, पर्याप्त कैश-रिज़र्व वाली कंपनी छोटी कंपनियों को मार्केट से बाहर कर देती हैं और इसी प्रचलन में बदलाव लाने के उद्देश्य के साथ उन्होंने ऐवलॉन लैब्स की शुरुआत की। शुरुआती स्तर पर निवेश उपलब्ध कराने वाली बाक़ी कंपनियों से अलग, ऐवलॉन अपने क्लाइंट्स के बिज़नेस मॉडल को बेहतर बनाने और आगे बढ़ने में हर संभव मदद मुहैया कराती है। अभी तक कंपनी 6 स्टार्टअप्स में निवेश कर चुकी है, जिनमें माना नेटवर्क, फ़ॉक्स बाउंड और एनकिडु प्रमुख हैं।

वरुण कहते हैं, "हम एक हाइब्रिड वेंचर स्टूडियो हैं और हम अपने हर क्लाइंट स्टार्टअप में 50 हज़ार डॉलर से 1 लाख डॉलर तक का निवेश करते हैं। हम अपने बल पर ही टेक्नॉलजी तैयार करते हैं। हमारे पोर्टफ़ोलियो में सेल्स ऑटोमेशन टूल्स से लेकर लीगल टेक प्रोडक्ट्स तक सभी कुछ मौजूद है। आईटी इंडस्ट्री में वरुण विश्वस्तरीय उत्पाद तैयार करने के लिए मशहूर हैं, जबकि शशांक एक इनवेस्टमेंट बैंकर रह चुके हैं। शशांक आईआईएफ़एल के साथ काम कर चुके हैं और वह पूरी दुनिया में निवेश प्रबंधन करने में ऐवलॉन की मदद करते हैं। कंपनी ने बताया कि उनके 6 क्लाइंट्स में से 2 क्लाइंट्स पहले से ही मुनाफ़े में हैं।

ऐवलॉन के पास डिवेलपमेंट और कॉन्टेन्ट सर्विसेज़ की एक अलग विंग है, जो लंबे समय से अलग-अलग क्लाइंट्स के साथ काम कर रही है। स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिए बाहरी सूत्रों से कैपिटल जुटाने के बजाय ऐवलॉन, अपनी सर्विसेज़ के माध्यम से होने वाली कमाई को ही निवेश में इस्तेमाल करता है। ऐवलॉन की सर्विस विंग के पास 75 से भी अधिक क्लाइंट्स हैं और इनमें से ज़्यादातर स्टार्टअप्स को अच्छी फ़ंडिंग मिल चुकी है। कंपनी ऐसे ऑन्त्रप्रन्योर्स की तलाश में रहती है, जिनके पास शानदार आइडियाज़ तो हैं, लेकिन उनके पास कंपनी शुरू करने के लिए निवेश की कैपिटल की कमी है। निवेश उपलब्ध कराने से पहले ऐवलॉन अपने क्लाइंट्स का बिज़नेस ट्रैक-रेकॉर्ड ज़रूर जांच लेती है।

ऐवलॉन लैब्स के वीपी अनिन्द्य चंदा कहते हैं, "हमारे पास सिलिकन वैली की बड़ी कंपनियों के साथ काम करने का अनुभव है और हमें ऐवलॉन के ऑपरेशन्स में इस अनुभव का काफ़ी लाभ मिलता है। कंपनी के नाम में लैब्स शब्द इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि हम लगातार अपने तरीक़ों और तकनीक के साथ प्रयोग करते रहते हैं और उन्हें बेहतर बनाने की कोशिश करते रहते हैं।"

शशांक मानते हैं कि शुरुआती स्तर पर नए स्टार्टअप्स की मदद करके दरअसल उनकी कंपनी अपनी मदद कर रही है। उन्होंने बताया कि ऐवलॉन स्विगी जैसी कंपनियों में निवेश करने से बचता है, जिन्हें बड़े-बड़े डिलिवरी फ़्लीट्स की ज़रूरत होती है।

ऐवलॉन का मुक़ाबला, इनफ़्यूज़ वेंचर्स, पाई वेंचर्स और सीड फ़ंड जैसी कंपनियों से हैं। कंपनी की योजना है कि सिर्फ़ निवेश में ध्यान देने के बजाय अगले साल तक सभी 6 क्लाइंट्स के माध्यम से 1 मिलियन डॉलर तक रेवेन्यू पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए और इन सभी कंपनियों को सीरीज़-ए तक पहुंचाया जाए। संभव है कि इस स्तर पर पहुंचकर ऐवलॉन इन कंपनियों में शेयर की मांग करे या फिर पूरी तरह से एग्ज़िट ले।

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