रातों रात अरबपति बन गए शेयर मॉर्केट के दो बड़े खिलाड़ी

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भारतीय शेयर मॉर्केट की तो रीति ही निराली है। कोई जिंदगी भर मशक्कत कर एक दमड़ी नहीं सहेज पाता है, उल्टे कंगाल और बन बैठता है तो कोई अपने खास ट्रिक्स-स्ट्रेटजी फॉलो करते हुए रातोरात अरबपति बन जाता है। इस बाजार के ऐसे ही दो बड़े खिलाड़ी हैं राधाकिशन दमानी और डॉली खन्ना।

डॉली खन्ना और राधाकिशन
डॉली खन्ना और राधाकिशन
 हमेशा सफेद कपड़े पहनने के शौकीन राधाकिशन दमानी सुर्खियों में नहीं रहना चाहते हैं। उन्हे हर वक्त सिर्फ अपने बिजनेस की पड़ी रहती है। शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के बीच उनको 'मिस्टर व्‍हाइट एंड व्‍हाइट' कहा जाता है।

आज के जमाने में हर किसी को मोटा मुनाफा कमाने की हवस है। ज्यादातर के सामने मुश्किल ये होती है कि वह आखिर ज्यादा से ज्यादा कमाई करे कैसे! जो ऐसा कर ले जाता है, मोटा मुनाफा कमा ले रहा है, उसे ही मार्केट का बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। बाजार में कई तो ऐसे मजे हुए खिलाड़ी हैं, जिन पर देश के शीर्ष उद्योगपतियों की भी हर वक्त नजर रहती है। ऐसे ही दो बड़े खिलाड़ी हैं डॉली खन्ना और राधाकिशन दमानी। बासठ साल के रिटेल किंग दमानी सुपरमार्केट रिटेल चेन 'डी-मार्ट' के मालिक हैं। उनको हुरुन इंडिया के अमीरों की सूची में जगह मिल चुकी है।

दमानी ने शुरुआती दिनों में बॉल-बियरिंग का कारोबार शुरू किया था, लेकिन नुकसान होने के चलते बंद कर दिया। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने भाई के साथ स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग शुरू की। बेहतर मौके तलाश कर छोटी कंपनियों में निवेश शुरू किया। वह वर्ष 1990 तक निवेश से करोड़ों रुपए कमा चुके थे। फिर उन्होंने रीटेल कारोबार में उतरने का निर्णय लिया। कारोबार चल निकला। 20 मार्च 2017 तक राधाकिशन दमानी सिर्फ एक रिटेल कंपनी के मालिक थे, लेकिन 21 मार्च की सुबह जैसे उन्होंने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की घंटी बजाई, वैसे ही उनकी संपत्ति सौ फीसदी तक बढ़कर गोदरेज और बजाज से भी ज्यादा हो गई।

उस वक्त डीमार्ट का शेयर 604.40 रुपए पर लिस्ट हुआ था, जबकि इश्यू प्राइस 299 रुपये रखा गया था। यानी वह 102 फीसदी का रिटर्न रहा। वह बीते तेरह वर्षों में किसी शेयर की कीमत का सबसे बड़ा रिकार्ड उछाल था। हमेशा सफेद कपड़े पहनने के शौकीन राधाकिशन दमानी सुर्खियों में नहीं रहना चाहते हैं। उन्हे हर वक्त सिर्फ अपने बिजनेस की पड़ी रहती है। शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के बीच उनको 'मिस्टर व्‍हाइट एंड व्‍हाइट' कहा जाता है।

राधाकिशन दमानी ने जब 1999 में रिटेल बिजनेस शुरू किया था, कुमार मंगलम बिड़ला और फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी के कदम शेयर मार्केट के सेक्टर में उतरे भी नहीं थे। उनकी सफलता का राज है लंबी अवधि के निवेश पर नजर रखना, आगे बढ़ने के लिए कोई शार्टकट नहीं। छोटी सी शुरुआत से डी-मार्ट के निर्माण के समय उन्हे कोई जल्दबाजी नहीं रही। इससे सप्लाई चेन पर उनका सही ढंग से नियंत्रण रहा। उनका ध्यान केवल मुनाफे पर था। आज डी-मार्ट बुलंदी पर है। दमानी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि वह क्या कर रहे हैं। वह अपने दैनिक ग्राहकों को भारी छूट पेश करते हैं।

आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं को भुगतान एक दिन के भीतर करने की कोशिश करते हैं, जबकि इंडस्ट्री के नॉर्म्स के मुताबिक यह अवधि करीब एक हफ्ते की है। शुरुआती भुगतान के कारण उन्हें माल सस्ती दर पर उपलब्ध हो जाता हैं। उन्होंने जिन कंपनियों में अपने पैसे लगाए, ज्यादातर के शेयरों में अच्छी कमाई देखी जाती है। दमानी के कुछ खास बिजनेस टिप्स हैं। जैसेकि किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसकी बैलेंस शीट जरूर चेक करें। शॉर्ट टर्म के लिए पैसा न लगाएं। हर सेक्टर पर नजर रखें। पोर्टफोलियो में कैश का कम से कम इस्तेमाल करें। शेयर खरीदने से ज्यादा उन्हें कब बेचा जाए, इस पर दिमाग लगाएं। स्ट्रैटजी बनाने से पहले यह तय कर लें कि आपको कितना निवेश करना है। स्टॉक खरीदने से पहले ये भी तय कर लें कि आपको उस स्टॉक से कब निकलना है।

शेयर मार्केट के टॉप इन्वेस्टर्स में दूसरी बड़ी खिलाड़ी हैं डॉली खन्ना। इनकी भी खासियत है कि जिस भी कंपनी में निवेश करती हैं, ज्यादातर के शेयरों में मोटा मुनाफा मिल जाता है। इसीलिए ज्यादातर निवेशक उन्हीं की राह चल पड़ते हैं। उनके पोर्टफोलियो में शामिल शेयरों ने 550 फीसदी तक रिटर्न दिए हैं। उन्होंने अभी तक छह स्मॉलकैप कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाया है। कहा जाता है कि शानदार रिटर्न देने वाली स्मॉलकैप कंपनियों को पहचानने में उनको महारत हासिल है। डॉली चेन्नई में रहती हैं। उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं। छोटे निवेशक डॉली के हर निवेश पर नजर रखते हैं। इससे उन्हें अच्छी संभावना वाली कंपनियों का पता चलता है। इस साल 2018 में मार्च तिमाही के आंकड़ों के अनुसार डॉली खन्ना की हिस्सेदारी असोसिएटेड अल्कोहल्स में 1.04 फीसदी थी। उनके शेयर के बाद 189 फीसदी की छलांग लगाते हुए 348 रुपये का स्तर हासिल हो गया।

इसी तरह किचन और घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनी बटरफ्लाय गांधीमती अप्लायंस में डॉली खन्ना ने 27,487 शेयर खरीदे थे। इससे उनकी हिस्सेदारी 1.26 फीसदी से बढ़कर 1.42 फीसदी हो गई। ठीक एक साल बाद 157 फीसदी बढ़कर 924.10 रुपये हो गई है। इसी तरह आईएफबी एग्रो इंडस्ट्रीज में पिछले एक साल में कंपनी के शेयरों ने 92 फीसदी की छलांग लगाई है। रेन इंडस्ट्रीज में पिछली मार्च तिमाही में खन्ना ने कंपनी के 3 लाख शेयर खरीदे, जिसके चलते उनकी हिस्सेदारी 2.57 फीसदी से बढ़कर 2.66 फीसदी हो गई। डॉली को इसी तरह की कामयाबी श्रीकलाहस्ती पाइप्स, टाटा मेटालिक्स आदि में भी मिली। भारतीय शेयर मार्केट में डॉली खन्ना तो अपनी कोशिशों में भरपूर कामयाब रही ही हैं, उनके टिप्स और स्ट्रैटजी अपनाकर तमाम लोग मार्केट में अच्छी कमाई करने लगे हैं। डॉली खन्ना का मानना है कि ज्यादा रिटर्न के लालच में न पड़ कर घाटे के कैलकुलेशन के साथ डिमांड देखकर ही निवेश के लिए स्टॉक्स चुनना चाहिए।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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