'purple squirrel', सही करियर के चुनाव में निभाए साथ

- सितंबर 2013 में पर्पल स्क्वरल एड्यूवेंचर की नीव रखी। - विदेशी तर्ज पर अब भारत में भी छात्र खुद कर सकेंगे अपने सही करियर का चुनाव। - पर्पल स्क्वरल के माध्यम से आदित्य और साहिबा कर रहे हैं छात्रों की मदद।

0

आईआईटी भारत के उच्च संस्थानों में से एक है। और यहां से पास होने वाले अधिकांश छात्रों का सपना होता है कि वे किसी विदेशी कंपनी में नौकरी करें क्योंकि विदेशी कंपनियां इन छात्रों को मोटी सेलेरी पर अपने यहां जॉब देती हैं। लेकिन कई छात्र ऐसे भी होते हैं जो भारत में ही रहकर अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। आदित्य गांधी ने आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग करने के बाद जर्मनी चले गए। जर्मनी में काम करने के दौरान उन्होंने देखा कि किस तरह छात्रों को कंपनियों में विजिट कराया जाता है ताकि उन्हें केवल किताबी ज्ञान ही न हो। यह विजिट्स छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान के लिए कराई जाती हैं और यह उनके शैक्षिक पाठ्यक्रम का अंग है। लेकिन भारत में ऐसा कुछ भी नहीं है। यहां आपने एक बार यदि किसी इंस्टीट्यूट में प्रवेश लिया तो जब आप वहां से बाहर निकलते हैं तब आपके पास किताबी ज्ञान तो बहुत होता है लेकिन छात्रों को यह पता नहीं होता कि उनके लिए कौन सा काम ज्यादा बेहतर है और किस प्रकार की कंपनी को उन्हें ज्वाइंन करना चाहिए। इस कारण कई बार छात्र उन कंपनियों को चुन लेते हैं जो उनके काम करने के तरीके से मैच नहीं करती। आदित्य ने बीटेक और एमटेक की डिग्री आईआईटी मुंबई से ली। यूरोप में उन्होंने फाइनेंस सेक्टर में काम किया। यूरोप जाकर उन्होंने बहुत कुछ सीखा लेकिन जो सबसे बड़ी बात उन्होंने समझी वो थी भारत में व्यवहारिक शिक्षा का आभाव।

उसके बाद उन्होंने तय किया कि वे इस कमी को पूरा करने के लिए कुछ ऐसा करेंगे जिससे छात्रों को फायदा हो। इसी सोच के साथ उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया।

लगभग इसी समय साहिबा धननानिया जोकि क्राइस्ट यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट थीं और हैदराबाद में फाइनेंस सेक्टर में काम कर रही थीं। कॉलेज के दौरान वो आईएसईसी का पार्ट थीं, जिसके कारण उन्हें काफी इंटरनेशनल एक्सपोजर मिला और चालीस से ज्यादा देशों के बच्चों के साथ संपर्क करने का मौका भी उन्हें मिला। उन्हें भी विदेशों में चल रहे ऐसे प्रोग्राम जहां छात्रों को किताबी ज्ञान के अलावा कंपनियों में ले जाया जाता था और छात्रों को वहां के वर्क कल्चल से अवगत कराया जाता था काफी प्रभावित करते थे। डेल में काम करने के दौरान साहिबा को यह समझ आ गया था कि व्यवहार में जो काम हम ऑफिस में करते हैं वह किताबी ज्ञान से काफी अलग होता है।

अब साहिबा भी छात्रों के लिए एक ऐसा प्लेटफार्म तैयार करने की जरूरत महसूस करने लगी थीं जहां बच्चों को व्यवहारिक जानकारी भी दी जाए। एक ऐसा सेतु बनाया जाए जहां छात्रों को यह पता चल सके कि वे भविष्य में क्या करना चाहते हैं। और छात्र अपने लिए सही निर्णय ले सकें।

आदित्य बताते हैं कि जब हमने रिसर्च की तो पाया कि अधिकांश लोग अपने काम से खुश व संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि वे सही जगह पर काम नहीं कर रहे हैं। लेकिन अब उनके पास कोई और विकल्प भी नहीं बचा था। इसलिए वे बस नौकरी किए जा रहे थे। भविष्य में छात्रों को यह तकलीफ न हो इसी कारण आदित्य और साहिबा ने सितंबर 2013 में पर्पल स्क्वरल एड्यूवेंचर की नीव रखी। यह एक छोटा सा प्रयास था छात्रों की मदद के लिए।

पर्पल स्क्वरल का मुख्य उद्देश्य कंपनी और छात्रों दोनों को फायदा पहुंचाना था। इसके माध्यम से जहां छात्रों को अपनी क्षमता व रुचि के मुताबिक काम करने के लिए अवसर मिल रहे थे वहीं दूसरी ओर कंपनी को सही कर्मचारी। यह एक ऐसा प्रयास था जो छात्रों और कंपनी के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा था।

भारत में जो कैंपस नियुक्तियां होती हैं उसमें आमतौर पर छात्रों का पिछले रिकार्ड देखा जाता है। यह बहुत कम जांचा परखा जाता है कि छात्र के अंदर क्या क्षमताएं हैं और वह भविष्य में क्या करना चाहता है। ऐसे में यह एक नई अवधारणा है जिसके जरिए छात्र और कंपनी दोनों अपने मुताबिक नौकरी और कर्मचारी ढूंड सकते हैं।

इनका यह प्रयास छात्रों को अपडेट भी करता है। उन्हें पता चलता है कि वे किस कंपनी और किस सेक्टर में अपना बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

पर्पल स्क्वरल का मकसद बाजार में मौजूद हर तरह की कंपनियों से छात्रों को अवगत कराना है। यह एक छोटा सा स्टडी टूर है जिसमें बच्चों को बताया जाता है कि इस कंपनी में असल में किस तरह से काम किया जाता है। इस दौरान छात्रों का वहां कंपनी के विभिन्न लोगों से परिचय भी कराया जाता है। इसके अलावा एक सेमिनार भी आयोजित किया जाता है जहां छात्र अपने प्रश्नों का जवाब पा सकते हैं। यह फन और लर्निंग का बहुत अच्छा अनुभव देता है। इस सारी प्रक्रिया का मक्सद यही है कि छात्र उस इंडस्ट्री को बारीकी से समझ सकें।

इस विजट को बहुत अच्छी तरह डिजाइन किया गया है। जो छात्र क्लास में पढ़ता है उसे यहां वही चीज़ें व्यवहारिक रूप से बताई जाती हैं ताकि छात्र के दिमाग में सारे तथ्य स्पष्ट हो सकें। वह इस बात को अच्छी तरह समझ सके कि किताब में जो वह पढ़ रहा था उसका व्यवहारिक रूप किस प्रकार का है। इससे एक और फायदा यह रहता है कि बच्चे जब अपने लिए किसी जॉब को चुनते हैं तो आंख मूंद कर कोई भी जॉब स्वीकार नहीं करते बल्कि उसी जॉब को चुनते हैं जो उनके व्यक्त्वि व रुचि के मुताबिक होती है।

पर्पल स्क्वरल का मकसद छात्रों के समक्ष सभी विकल्पकों को खोलना है। कई ऐसी कंपनियां भी भारत में हैं जिनके बारे में छात्रों को कम जानकारी होने की वजह से वे वहां आवेदन तक नहीं करते। जबकि उन कंपनियों में भी कैरियर का बहुत अच्छा स्कोप होता है। इसके अलावा पर्पल स्क्वरल एनजीओ के विषय में भी छात्रों को बताता है कि एनजीओ किस प्रकार काम करते हैं। इसके अलावा नई-नई स्टार्टअप के बारे में भी छात्रों को जानकारी दी जाती है।

पर्पल स्क्वरल ने केवल 40 लोगों की टीम के साथ इस काम को शुरु किया। लेकिन अब तक पर्पल स्क्वरल दस हजार से ज्यादा छात्रों की मदद कर चुका है। इस काम में पर्पल स्क्वरल को सभी का बहुत समर्थन मिल रहा है चाहे कंपनी हो या छात्र। पर्पल स्क्वरल भविष्य में इस काम का विस्तार करना चाहता है। पर्पल स्क्वरल चाहता है कि आने वाले तीन महीने में उनकी 150 लोगों की टीम हो। इसके अलावा पर्पल स्क्वरल विदेशों में भी जाने के इच्छुक हैं। वे भारतीय छात्रों के लिए विदेशी बाजारों में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...