फुटपाथ पर छतरी लगाकर गरीब मरीजों का मुफ्त में इलाज करते हैं डॉ. अजीत मोहन चौधरी

गरीब मरीजों के गॉड फॉदर डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी...

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अंधाधुंध धन-सम्पत्ति जमा कर लेने की होड़ में शामिल चिकित्सकों के लिए कानपुर के डॉ अजीत मोहन चौधरी एक सबक हैं। खुद का सौ बिस्तरों वाला हॉस्पिटल होने के बावजूद फुटपाथ पर कैनोपी लगाकर वह अपने शहर के गरीब मरीजों का रोजाना एक घंटा मुफ्त इलाज करते हैं। उनके इस सेवाभाव की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 'मन की बात' में सराहना कर चुके हैं।

डॉ. अजीत मोहन चौधरी
डॉ. अजीत मोहन चौधरी
आज उनकी तरह हर चिकित्सक की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह देश, समाज, गरीबों और असहायों के लिए स्वयं कुछ करे। वह सैंपल की दवाएं गरीब मरीजों को दे देते हैं। हालांकि लाल बंगला इलाके में उनका सौ बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी है। 

दिल्ली सरकार ने पिछले साल नवंबर में गरीबों के इलाज से इनकार करने वाले दो बड़े प्रॉइवेट अस्पतालों शांति मुकुंद अस्पताल और पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीच्यूट पर 46 करोड़ से अधिक का जुर्माना ठोक दिया था। गरीबों के इलाज में दिलचस्पी लेने के बजाए दोनों अस्पताल नोटिस के खिलाफ अदालत पहुंच गए। इन अस्पतालों को इस शर्त पर रियायती दर पर सरकारी जमीन दी गई थी कि वे गरीब मरीजों के लिए 10 प्रतिशत बेड इंडोर में और ओपीडी में 25 फीसदी स्थान मुफ्त इलाज के लिए रिजर्व रखेंगे।

इस साल के आम बजट में केंद्र सरकार ने ऐलान किया था कि इलाज के लिए अब किसी गरीब को अपनी जमीन या घर नहीं बेचना पड़ेगा। वह अब मंहगे अस्पतालों में अपना इलाज मुफ्त करा सकेगा। उसके इलाज के खर्च की व्यवस्था सरकार करेगी। देश के पचास करोड़ गरीबों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इस सुविधा का आज तक कितने गरीबों को लाभ मिला है, ये तो केंद्र सरकार को ही मालूम होगा, लेकिन ऐसे खराब वक्त में कई ऐसे डॉक्टर मिसाल बने हुए हैं, जो मुफ्त में गरीबों का इलाज कर रहे हैं। ऐसे ही एक सेवाभावी चिकित्सक हैं कानपुर के डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी।

'मन की बात' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत सारी बातों के साथ एक बार ऐसे मन के डॉक्टर की भी बात कह बैठे थे। 25 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री ने 42वीं 'मन की बात' में कहा था- 'कानपुर के डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी की कहानी सुनने को मिली कि वो फुटपाथ पर जाकर ग़रीबों को देखते हैं और उन्हें मुफ़्त दवा भी देते हैं। इससे देश के बंधु-भाव को महसूस करने का अवसर मिला।' इसके साथ प्रधानमंत्री देश के सभी डॉक्टरों को सलाह देते हैं कि वे गरीबों को सस्ती जिनेरिक दवाएं लिखें। इसी क्रम में डॉ चौधरी देश के सभी डॉक्टरों से अपील करते हैं कि वे अपना एक घंटे का समय गरीबों के इलाज पर जरूर दें। डॉ चौधरी अपने यहां पहुंचने वाले गरीबों को मुफ्त में दवाएं देते हैं। उनके लिए पीएम की बधाई से कम महत्वपूर्ण नहीं है गरीब मरीजों की दुआएं। ऐसे ही हैं दिल्ली के एक और डॉक्टर, धर्मशिला कैंसर अस्पताल के डायरेक्टर और मशहूर कैंसर सर्जन डॉ. अंशुमन कुमार भी। कासना (ग्रेटर नोएडा) में वह जमीन पर दरी बिछाकर गरीबों का निःशुल्क इलाज करने के साथ ही उन्हें सस्ती जिनेरिक दवाएं भी लिखते हैं।

मूलतः उन्नाव (उ.प्र.) के निवासी डॉ अजीत मोहन चौधरी का जन्म कानपुर में हुआ था। उनके परिवार के प्रायः सभी सदस्य चिकित्सक हैं। डॉ चौधरी ने वर्ष 1977 में बिहार से एमबीबीएस और कानपुर से एमडी किया था। वर्ष 1980 में उन्होंने प्रैक्टिस की शुरुआत की और कानपुर शहर के डॉक बंगला एरिया में अपना एक नर्सिंग होम खोला। अब वह कचहरी के पास चेतना चौराहे पर रोज एक घंटा गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं। साधारण कुर्ता पायजामे में उनको फुटपाथ पर इलाज करते देख कर आने-जाने वाले लोग कुछ पल के लिए वहां अनायास ठिठक जाते हैं। चेतना चौराहे पर मंदिर के बाहर उनका क्लीनिक सिर्फ एक घंटे तक चलता है।

वह रोज फुटपाथ पर क्लीनिक के नाम पर कैनोपी लगाकर बैठ जाते हैं। यहां रोजाना 10 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। डॉक्टर चौधरी के साथ एक कंपाउंडर भी होता है। उन्होंने शहीद सैनिकों के सम्मान में गरीबों का मुफ्त इलाज करने का ये बीड़ा उठा रखा है। वह रोज लोगों को सुबह 10-11 के बीच देखते हैं। उनके पास इलाज के लिए हर तरह के मरीज आते हैं। उन्हें देखने के बाद वह फ्री में सैंपल की दवाएं भी देते हैं। अगर उनकी स्थिति गंभीर होती है तो उन्हें तत्काल इलाज का वाजिब मशविरा भी दे देते हैं। वह जहां बैठकर इलाज करते हैं, वहां वह एक दान पात्र भी रखा रहता है। इस पर उन्होंने 'शहीद सैनिकों के परिवार के लिए दान' लिखा रखा है। डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि यहां पर जो भी मरीज अपनी इच्छा से बॉक्स में पैसा डालता है, उस पैसे को शहीदों के सम्मान में लगाए जाने का उन्होंने संकल्प लिया है।

डॉ चौधरी कहते हैं कि वह अब पूरी दुनिया घूम चुके हैं। उनकी हर तरह की पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में खुद के लिए उनकी कोई ख्वाहिश शेष नहीं रह गई है। आज उनकी तरह हर चिकित्सक की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह देश, समाज, गरीबों और असहायों के लिए स्वयं कुछ करे। वह सैंपल की दवाएं गरीब मरीजों को दे देते हैं। हालांकि लाल बंगला इलाके में उनका सौ बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी है। वह चाहते हैं कि उनके इस कार्यक्रम को देश की जनता अपने स्तर से, अपने स्थान पर अलग-अलग कामों से आगे बढ़ाए। आज के वक्त में डॉक्टर चौधरी की पहल उन चिकित्सकों के लिए एक सबक है, जो मरीजों से मोटी फीस ऐंठ कर भी उनका समुचित इलाज नहीं करते हैं।

क्लिनिक से सटे मंदिर के महंत भगतराम कहते हैं कि ऐसे डॉक्टरों को ही धरती का भगवान कहा जाता है। उनके यहां पहली बार पहुंचने वाले मरीज कहते हैं कि उन्होंने डॉ चौधरी के बारे में काफी कुछ सुन रखा था। वे इसीलिए यहां चेकअप कराने पहुंचे और अब उनके इलाज से वह निःशुक्ल स्वस्थ भी हो रहे हैं। उन्हें लगता है कि अन्‍य डॉक्‍टरों को भी डॉक्‍टर चौधरी की तरह सोचना और दवा-इलाज करना चाहिए।'

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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