बिहार की छात्रा ने बनाया ऐसा सिस्टम, शराब पीकर गाड़ी में बैठने पर इंजन होगा लॉक

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बिहार की एक छात्रा ऐश्वर्य प्रिया ने दुनिया को हैरत में डाल देने वाले यंत्र का आविष्कार किया है। इसका नाम है 'अल्कोहल डिटेक्टर एंड ऑटोमेटिक इंजन लॉकिंग सिस्टम'। जिस वाहन में ये सिस्टम फिट होगा, उसमें शराबी चालक अथवा सवारी के बैठते ही इंजन ऑटोमेटिकली लॉक हो जाएगा।

ऐश्वर्या प्रिया
ऐश्वर्या प्रिया
शराब पीकर वाहन चलाने के कारण होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर शराब की दुकानों पर बैन लगा दिया है। सरकार सड़क हादसों पर काबू पाने के लिए यातायात नियमों को और सख्त बनाने पर लगातार जोर दे रही है। 

भोपाल (म.प्र.) के लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस से बीटेक कर रही पूर्णियां (बिहार) के गांव भवानीपुर की छात्रा ऐश्वर्य प्रिया ने 'अल्कोहल डिटेक्टर एंड ऑटोमेटिक इंजन लॉकिंग सिस्टम' का आविष्कार किया है। यह सिस्टम किसी भी फोर ह्विलर के इंजन में फिट कर देने पर वह शराबी सवारी को सूंघ लेता है और इंजन अपनेआप तत्काल बंद हो जाता है। जब तक शराबी वाहन सवार नीचे नहीं उतरेगा यानी वाहन से बाहर नहीं होगा, इंजन ऑटोमेटिकली चालू नहीं हो सकेगा। इस सिस्टम को लगाने में मात्र नौ सौ रुपए खर्च होते हैं।

हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएँ इतनी बड़ी और खतरनाक समस्या बन गई हैं कि हर वर्ष लगभग एक छोटे शहर के बराबर की जनसंख्या मौत का शिकार हो जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष देश में सड़क हादसों में लगभग डेढ़ लाख लोग मर जाते हैं और उनसे कई गुना ज्यादा लोग घायल और अपंग हो जाते हैं। इस तरह हादसों से देश को हर वर्ष भारी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती है। आकलन में ये पाया गया है कि नशे की हालत में गाड़ी चलाना इन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है।

शराब पीकर वाहन चलाने के कारण होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर शराब की दुकानों पर बैन लगा दिया है। सरकार सड़क हादसों पर काबू पाने के लिए यातायात नियमों को और सख्त बनाने पर लगातार जोर दे रही है। इसके बावजूद सड़क हादसों में कोई कमी नहीं आ रही है। और कहीं की तो बात छोड़ दीजिए, देश की राजधानी दिल्ली में ही इस साल होली के दौरान शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले 1900 से ज्यादा लोग पकड़े गए थे। दिल्ली की बात इसलिए कि वहां अपेक्षित चौकसी बरती जाती है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि सड़क हादसों में रोजाना करीब 400 लोगों की जान चली जाती है। उनमें ज्यादातर लोगों की मौत शराब पीकर वाहन चलाने से होती है। ऐसे में ऐश्वर्य प्रिया का आविष्कार देश के लिए किसी वरदान से कम नहीं। बिहार में शराबबंदी के बावजूद ऐसे हादसों में कोई कमी नहीं आई है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐश्वर्य प्रिया इस प्रोजेक्ट पर लगातार काम करती रहीं। कड़ी मेहनत के बाद उन्हें यह आश्चर्यजनक सफलता मिली है। सरकार यदि वाहनों में इस यंत्र का इस्तेमाल कराना सुनिश्चित कर दे तो शराब पीकर कोई गाड़ी नहीं चला पाएगा।

ऐश्वर्य प्रिया ने 'अल्कोहल डिटेक्टर एंड ऑटोमेटिक इंजन लॉकिंग सिस्टम' के अपने आविष्कार की पहली बार पुणे में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इन्नोवेटिव मॉडल एवं प्रोजेक्ट कम्पिटीशन में इसका खुलासा किया। उन्हे कम्पिटीशन में प्रथम स्थान मिला। इस प्रतियोगिता में देशभर के 84 प्रतिभागी शामिल हुए। ऐश्वर्य प्रिया फिलहाल भोपाल के लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस से बीटेक कर रही हैं। उनके पिता रवि गुप्ता बताते हैं कि वह लंबे समय से अपने दो दोस्तों के साथ इस प्रोजेक्ट को तैयार कर रही थीं।

कॉलेज के प्रोफेसर भी इस काम में उनकी मदद कर रहे थे। ऐश्वर्य का आविष्कार सड़क हादसे रोकने में ऐतिहासिक भूमिका निभा सकता है। ऐश्वर्य ने अपना आविष्कार पिता रवि गुप्ता एवं मां इंदू देवी को समर्पित किया है। ऐश्वर्य बताती हैं कि वाहन के इंजन में लगने वाला यह सिस्टम बहुत कम स्पेस लेता है। इसलिए इसे कार या किसी भी बड़े वाहन के डैश बोर्ड पर रखा जा सकता है। इस सिस्टम का एक तार वाहन की बैटरी से और दूसरा तार इंजन से जोड़ दिया जाता है। इसके बाद यह शराबी चालकों या सवारियों की जासूसी शुरू कर देता है। यह सिस्टम जिस भी वाहन में फिट होगा, कोई शराबी उसे स्टार्ट नहीं कर पाएगा। सिस्टम उसकी सांस से अल्कोहल को डिटेक्ट कर लेता है। दोबारा वाहन तभी स्टार्ट होगा, शराबी वाहन से बाहर निकल जाए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक पूरे विश्व में सबसे अधिक सड़क हादसे हमारे देश में होते हैं। एक अन्य, एनसीआरबी की रिपोर्ट में बताया गया है कि नशे में गाड़ी चलाना हादसों के लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार है। लगभग 99 प्रतिशत हादसों में से, जो जानलेवा हादसे शहरों के बाहर होते हैं, उनमें शराब मुख्य वजह होती है। ट्रक ड्राइवरों का मानना है कि वे सड़कों पर तभी चलाने को तैयार होते हैं, जब वह पूरी तरह नशे में धुत हो जाते हैं। नशे में गाड़ी चलाने के खिलाफ मुहिम चला रहे एक संगठन कैंपेन एगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग के मुताबिक सड़कों पर दुर्घटनाएं बढ़ने से साबित हो चुका है कि राज्य सरकारें और पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने को उतनी गंभीरता से नहीं लेती हैं। यह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि शराब को लेकर राज्यों का अपना क़ानून है और यह देश भर में हो रहा है। विकास की रफ्तार के साथ हादसों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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