‘सिटीजन कॉप’ की बदौलत बिना परेशानी के कर सकते हैं किसी भी घटना की पुलिस में रिपोर्ट

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हम में से ज्यादातर लोग जब अपने आसपास कोई अपराध देखते हैं या फिर नगर निगम से जुड़ी समस्या को पाते हैं तो उसकी शिकायत करने से बचते हैं, क्योंकि अक्सर हम ये नहीं जानते की ऐसी चीजों की शिकायत कहां पर और कैसे की जाती है। लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर राकेश जैन ने इस समस्या का समाधान एक खास तरीके से निकाला है। उन्होने ‘सिटीजन कॉप’ नाम से एक ऐसा ऐप तैयार किया है जिसकी मदद से कोई भी शख्स अपनी शिकायत उचित जगह तक पहुंचा सकता है।


राकेश जैन ने जनवरी 2013 में ‘सिटीजन कॉप’ नाम से एक ऐप लॉच किया। तब से इस ऐप के करीब 1 लाख 75 हजार डाउनलोड हो चुके हैं। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। ये एंड्रायड और आईओएस दोनों ही वर्जन में उपलब्ध है। राकेश जैन खुद एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं वो पिछले 20 सालों से इंदौर में अपनी कंपनी ‘इंफोक्रेट वैब सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ चला रहे हैं। वो बताते हैं कि “पिछले कुछ सालों से समाज में एक अवधारणा सी बन गयी थीं कि हमारी सरकार और पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं कर रही है। तब मेरे मन में एक विचार आया कि एक जिम्मेदार नागरिक के नाते क्यों ना मैं ही ऐसा कुछ बनाऊं जो कि समाज के लिए उपयोगी हो।”


अपने ऐप के बारे में राकेश बताते हैं कि जो भी व्यक्ति मुश्किल हालात में इस ऐप का इस्तेमाल करता है तो इससे पुलिस कंट्रोल रूम को घटना स्थल की जानकारी और सबूत दोनों ही मिल जाते हैं। इस ऐप की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसमें घटना की जानकारी देने वाले व्यक्ति की गोपनियता बनी रहती हैं। इसके एक खास फीचर में अगर कहीं पर किसी तरह का अपराध हो तो कोई भी व्यक्ति इसकी शिकायत अपनी पहचान बताये बगैर कर सकता है। राकेश का मानना है कि लोग आपराधिक घटनाओं को अनदेखा नहीं करना चाहते लेकिन पुलिस की पूछताछ से बचने के लिए वो मूकदर्शक बने रहते हैं। इसलिए जब उन्होने अपने इस ऐप को लॉच किया तो लोगों से बहुत ही अच्छी प्रतिक्रिया मिली। राकेश कहते हैं कि उनका उद्देश्य ही ये है कि वो इस ऐप को देशभर में लोकप्रिय बना सकें। अब तक उनके ऐप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल मध्य प्रदेश और छत्तीगढ़ में हो रहा है। यहां पर इंदौर, भोपाल, जबलपुर के अलावा करीब 18 शहरों में इस ऐप का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के लगभग सभी शहर इसमें शामिल हैं। साथ ही पुणे, नवी मुंबई, नोएडा, झांसी, वाराणसी और बैंगलुरू में प्रशासन इसका इस्तेमाल कर रहा है। उनका मानना है कि इस तरह पूरे भारत में अगर इसका इस्तेमाल हो तो व्यक्ति कहीं भी आये जाये वो इस ऐप की सुविधा ले सकता है।


‘सिटीजन कॉप’ ऐप के फिलहाल दो वर्जन हैं। ये हैं फुल और लाइट वर्जन। फुल वर्जन में प्रशासन, पुलिस और दूसरी समकक्ष एंजेसी का पूरा योगदान रहता है। फिलहाल ये सुविधा देश के 25 शहरों में उपलब्ध है, धीरे-धीरे दूसरे शहरों में भी इसका विस्तार हो रहा है। जबकि इस ऐप को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इसका लाइट वर्जन काफी मददगार साबित हो रहा है। इसमें पुलिस और प्रशासन से सम्बन्धित 1-2 फीचर कम हो जाते हैं लेकिन आत्मरक्षा वाले सभी फ़ीचर इसमें उपलब्ध हैं। ‘सिटीजन कॉप’ ऐप का लाइट वर्जन ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल करे इसके लिये इन्होने ‘सिटीजन कॉप फाउंडेशन’ नाम से एक संगठन बनाया है। जिसमें इनके साथ 10 दूसरे लोग भी जुड़े हैं। ‘सिटीजन कॉप’ ऐप में पहला इमरजेंसी फीचर है इसका एक बटन। जिसे दबाते ही चार नजदीकी जानकारों को पता चल जाता है कि आप मुसिबत में हैं। जबकि फुल वर्जन ऐप में लोकल डिस्ट्रिक पुलिस कंट्रोल रूम भी इससे जुड़ा होता है। इसके अलावा मुश्किल हालात में मोबाइल को तीन बार हिलाने से और अगर मोबाइल में इयर फोन लगा हो तो उसे हटाने से भी इमरजैंसी का बटन मोबाइल के सामने आ जाता है।


इस ऐप में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टाइमर का बटन दिया गया है। अगर किसी महिला की ऑफिस से छुट्टी शाम 5:30 बजे होती है और 1 घंटे बाद वह घर नहीं पहुंचती है तो उसके करीबियों और पुलिस तक मैसेज अपने आप पहुंच जाता है। इसमें ट्रैवल सेव का भी विकल्प है जिसे कोई भी महिला सार्वजनिक यात्रा के दौरान इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए महिला को अपनी यात्रा से पहले गाड़ी का नंबर और लोकेशन इस ऐप में डालना होता है सकती है। इतना ही नहीं अगर किसी का मोबाइल खो जाये तो उसे पुलिस भी आसानी से ढूंढ सकती है। इसके लिए किसी भी व्यक्ति को अपने मोबाइल का आईएमए नंबर इस ऐप में डालना होता है और जब कभी उसका फोन चोरी हो जाये तो उसका डेटा पुलिस के पास चला जाता है। ऐसे में अगर कोई चोरी का मोबाइल खरीदता है तो इसकी जानकारी पुलिस को लग जाती है।


भविष्य की योजनाओं के बारे में इनका राकेश का कहना है कि जिस भी शहर में प्रशासन का सहयोग मिलेगा वहां पर ये इस ऐप का फुल वर्जन उतारेंगे। फिलहाल इनकी कोशिश है कि इस ऐप का देशभर में प्रसार हो ताकि अलग अलग अपराधों की रिर्पोट सिर्फ एक ऐप के जरिये हो सके।

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