'ERC Eye Care' का मिशन कम दाम और बढ़िया इलाज

- असम में मोतियाबिंद के मरीज़ों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।- डॉ. परवेज अपनी सोशल इंटरप्राइज़ ईआरसी आई केयर के माध्यम से दे रहे हैं आई केयर सुविधाएं।- गरीबों को बहुत कम दामों पर उपलब्ध करा रहे हैं आई केयर सर्विस।

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डॉक्टर परवेज़ उबेद एक नेत्र विशेषज्ञ हैं। वे असम में रहते हैं। सन 2007 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल अस्पताल 'जोहरत' में काम करना शुरु किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि यहां बहुत बड़ी संख्या नेत्र रोगों से पीडि़त मरीज़ों की है। और उसमें भी ज्यादातर लोग मोतिया बिंद से पीडि़त हैं। लोगों की नज़र कमजोर हो रही है। जिसका बड़ा कारण यह है कि इन मरीज़ों को समय रहते सही उपचार नहीं मिल रहा है। असम में नेत्र विशेषज्ञों की तो कमी है ही साथ ही अच्छे आई अस्पतालों की भी भारी कमी है। इसके अलावा देश भर के कुल मोतिया बिंद मरीज़ों का एक बड़ा हिस्सा असम में है जोकि लगभग 18 प्रतिशत है। यहां अस्पताल तो हैं लेकिन मोतिया बिंद का उपचार बहुत कम स्थानों पर होता है। इसके अलावा जिन अस्पतालों व आईकेयर सेंटर पर यह इलाज उपलब्ध है वहां मोतिया बिंद का ऑपरेशन करने की कीमत इतनी ज्यादा है कि एक निम्न आय वर्ग के व्यक्ति के लिए इसे कराना आसान नहीं। जब परवेज़ अस्पताल में काम कर रहे थे तब ही वे समझ चुके थे कि इस क्षेत्र में काम करने की बहुत जरूरत है। एक बहुत बड़ी आबादी पैसे और सुविधा की कमी के कारण नेत्र रोगों का इलाज नहीं करा पा रही है जिस वजह से यह रोग तेजी से बढ़ता जा रहा है।

उसके बाद परवेज ने ईआरसी आई केयर की शुरुआत की। यह एक सोशल इंटरप्राइज़ है जिसका उद्देश्य लोगों को सही दाम पर नेत्र रोग संबंधी उपचार उपलब्ध कराना है। परवेज़ की कोशिश थी कि सबसे पहले वे गरीब लोगों से जुड़ेंगे जो पैसा न होने की वजह से मोतिया बिंद का इलाज नहीं करा पा रहे हैं। सन 2011 में परवेज ने एक क्लीनिक के साथ अपने अभियान की शुरुआत की। उन्होंने बहुत सारे फ्री चेकअप कैंप भी लगाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनके साथ जुड़ सकें। शुरुआत में बहुत कम पेशेंट ही उनके क्लीनिक में आते थे और परवेज काफी देर तक उनसे बात करते और उनकी समस्या के मूल में जाकर उसे समझने का प्रयास करते।

ईआरसी आई केयर को अंकुर कैपिटल, इनोवेंट इंपेक्ट इनवेस्टमेंट होल्डिंग और दो अन्य निवेशक दिसंबर 2013 में मिले। जिनकी मदद से ईआरसी आई केयर ने असम में अपने तीन और सेंटर खोले। अब इनके पास लगभग 22 से ज्यादा लोगों की टीम है। लगभग 40 लोग इनके साथ पार्टटाइम जॉब कर रहे हैं। ईआरसी लोगों से 50 रुपए कंसल्टेंसी फीस लेता है और चश्मे की कीमत 99 रुपए से शुरु है। यहां मोतिया बिंद का ऑपरेशन मात्र 3,500 रुपए में किया जाता है।

यह लोग 'हब और स्पोक' मॉडल पर काम कर रहे हैं। और साथ ही इसके माध्यम से अपने कार्यों का प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं। यहां हर हब चार से पांच सेटेलाइट सेंटर से जुड़ी होती है जोकि उस स्थान के ग्रामीण इलाकों में बेसिक आई केयर सुविधाएं उपलब्ध कराती है। ईआरसी के विजन असिस्टेंट डोर टू डोर लोगों की स्क्रीनिंग करने जाते हैं साथ ही जागरुकता भी फैलाते हैं। इसके अलावा इन्होंने एक मोबाइल यूनिट भी शुरु की है। जोकि एक महीने में एक जिले में 15 से 20 कैंप लगाती है। जहां यह लोग फ्री में आई चेकअप और दवाएं देते हैं। इनका पूरा मॉडल गरीबों के लिए सीधे तौर पर काम कर रहा है और नेत्र रोगों के लिए लोगों को जागरूक करने में जुटा है। परवेज़ को उम्मीद है कि हब और स्पोक मॉडल जरूर अच्छा काम करेगा।

असम में ज्यादातर लोगों को सामाजिक इंटरप्राइज के बारे में पता नहीं है। परवेज़ को खुद भी इसके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं थी पर थोड़ी बहुत जानकारी प्राप्त करने के बाद ही उन्होंने अपनी सोशल इंटरप्राइज शुरु कर दी ताकि ज्यादा से ज्यादा गरीब लोगों की वे मदद कर सकें।

ईआरसी ने स्पार्क द राइज़ पुरस्कार जीता व संकल्प प्रतियोगिता के वे फाइनलिस्ट थे। परवेज़ ने जिस तरीके से सफलता प्राप्त की उसका मुख्य कारण उनकी सोच और लोगों के प्रति उनकी जिम्मेदारी और अथाह परिश्रम रहा है। जिसकी वजह से वे अपने इस बड़े विजन को मूर्त रूप दे सके। भविष्य में परवेज़ ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुडऩा चाहते हैं और इस दिशा में और भी कई नए काम करना चाहते हैं।

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