अगर चाहिए स्वाद घर का और मज़ा बाहर तो mealboat पर जाएं, जमकर मौज उड़ाएं...

बैंगलोर में नौकरी कर रही दो लड़कियों ने घर के पके खाने को सबतक पहुंचाने का उठाया बीड़ाघर पर खाना पकाकर दूसरों को खिलाने के शौकीन लोगों को भी उपलब्ध करवाया एक मंचवेबसाइट पर जाकर अपनी पसंद के व्यंजन चुनिये और चाहें तो होम डिलीवरी लें या खुद जाकर खाना ले आएंफिलहाल सिर्फ बैंगलोर में सीमित है सेवा लेकिन जल्द ही देश के दूसरें हिस्सों में भी करना चाहती हैं विस्तार

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कुछ समय पहले मुझे एक ऐसी दूसरी दुनिया में जाने का मौका मिला जहां मैं अपना वजन बढ़ने की चिंता किये बिना बेफिक्र होकर कुछ भी खा सकता था और वहां पर चले बातचीत के दौर में मैंने आखिरी बार अपना एक उद्यम शुरू करने के बारे में विचार किया।

कुमारी एक्स और कुमारी वाई (जी हां, उन्होंने खुद ही यह नाम देने के लिये कहा है!) भी कुछ समय पहले ऐसी ही एक बातचीत के दौर में मिले और उन्होंने इस वार्ता के बाद एक अपनी एक कंपनी भी खोल ली और वह भी किसी दूसरी दुनिया में नहीं बल्कि इसी दुनिया में।

इन्होंने घर के पके खाने और पकवानों को एक मंच पर लाते हुए उसे घर के खाने के शौकीनों के सामने परोसने के लिये Mealboat.com की स्थापना की और वे इसे ‘व्यंजनों के लिये जीवनरक्षक नौका‘ कहते हैं।

मुझे पूरी उम्मीद है कि अब आपो यह अहसास हो रहा होगा कि यह ‘घर के पके खाने’ की कहानी है। कुमारी एक्स कहती हैं, ‘‘दिनभर काम में खपे रहने के बाद जब हम शाम को घर वापस लौटते थे तो अक्सर मजाक में एक-दूसरे से कहते थे कि काश हमरे पास एक जिन्न हो जो हमारे लिये खाने को कुछ भी पका सकता हो। दूसरी तरफ हम अक्सर ऐसे लोगों से मिलते रहते थे जो पाक-कला को लेकर बेहद संजीदा थे और अपने कैफे या कैटरिंग सेवा को शुरू करने के इच्छुक हैं या फिर अन्य तरीकों से से अपने खाने से संबंधित सपनों को पूरा करना चाहते हैं।’’

इस वेबसाइट का काम करने का तरीका बेहद सरल है। अगर आप अपने लिये भोजन की तलाश में हैं तो आपको इनकी वेबसाइट पर जाकर इनके द्वारा परोसे जाने वाले व्यंजनों में एक अपनी पसंद को चुनना है या फिर इनके संचालित होने के स्थान के बारे में जानकारी लेते हुए अपना आर्डर देना है। इसके बाद यह आपपर निर्भर करता है कि आप भोजन का अपने घर तक आने का इंतजार कर सकते हैं या फिर आप स्वयं इनके यहां जाकर भी उसे ले सकते हैं। अगर आप अपने घर के पके खाने को इनके द्वारा खाने को शौकीनों तक पहुंचाना चाहते हो तो आपको इनके पास स्वयं को पंजीकृत करवाना होगा और कुछ समय के भीतर ही कुमार एक्स या कुमार वाई में से कोई एक आपसे संपर्क स्थापित करेंगे।

एक्स बताती हैं, ‘‘अभी हमें अपनी इस वेबसाइट को शुरू करे मात्र कुछ महीने ही हुए हैं ओर हमें लोगों जो सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है वह हमारी उम्मीद से कहीं अधिक है। खाना पकाने वालों और खाने के शौकीनों, दोनों से मिलने वाली प्रतिक्रिया बेहद लाजवाब रही है। अभी तक हमारे पास व्यंजन पकाने वाले 20 लोग हैं और करीब 70 लोगों से हमारी बातचीत अंतिम चरणों में है।’’

इनके बारे में एक मजेदार जानकारी यह है कि फिलहाल इनके पास खाना पकाने वालों में सिर्फ दो या तीन ही पुरुष हैं। तो अगर मुझे ‘पापा के हाथ का खाना खाना है’ उस स्थिति में मैं कहां जाऊं?

फिलहाल की बात करें तो इनकी यह व्यापारिक पहल सिर्फ लोगों के जुबानी तारीफ, फेसबुक पोस्ट और दोस्तों और मित्रों द्वारा की गई तारीफों के दम पर दूसरों तक अपनी पहुंच बता रही है। दूसरी तरफ यह जोड़ी अपने काम करने के तरीके में कुछ बदलाव करते हुए अपने रास्ते में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिये खुद को तैयार कर रही है। एक्स बताती हैं, ‘‘हमें काम करने के कई तरीकों को एक साथ संभालना पड़ता है क्योंकि घर के पके खाने से संबंधित उद्योग मुख्यतः असंगठित है। हम अपने सामने आने वाली बाधाओं को जानने की कोशिश कर रहे हैं और समय के साथ उनके उचित समाधान भी सामने लाने में सफल हो रहे हैं।’’

Mealboat.com का मुख्य आकर्षण घर के पके व्यंजनों की सहज इच्छा में निहित है। यह वेबसाइट लोगों को घर के पके उनकी पसंद के व्यंजन उनकी पसंद के दिनों उपलब्ध करवाती है। इसके अलावा यह अपने उपभोक्तओं के द्वारा आयोजित की जाने वाली पार्टियों इत्यादि के लिये व्यंजन मुहैया करने का काम करती है। एक्स कहती हैं, ‘‘जल्द ही हम मेजबान रसोइयों को अपने साथ जोड़ने वाले हैं जो उपभोक्ताओं को दैनिक आधार पर लंच या डिनर परोसेंगे।’’ एक्स के अनुसार घर पर खाना पकाने वाले खुद को समर्पित एक पोर्टल पर अपनाएक पेज होने की संभावना से ही बेहद प्रसन्न हैं। इसके अलावा उपभोक्ताओं के लिये एक समीक्षा प्रणाली तैयार करने की दिशा में भी विचार चल रहा है जिसमें वे परोसे गए खाने और और उसे पकाने वाले रसोइये के साथ अपने अनुभव को साझा कर सकेंगे।

मीलबोट के मंच के लिये अब इन्होंने अपना सारा ध्यान पूरे बैंगलोर में घर पर दूसरों के लिये खाना पकाने के इच्छुक लोगों का एक डाटाबेस तैयार करने में लगा रखा है। इससे पहले की इस क्षेत्र में दूसरे अन्य खिलाड़ी अपने पांव जमाने की कोशिश करें इनका प्रयास बैंगलोर के अधिक से अधिक क्षेत्र को अपने दायरे में लाने का है। एक्स कहती हैं, ‘‘हम इस क्षेत्र में अपने हाथ गंदे करते हुए कार्यप्रणाली, सामने आने वाली चुनौतियों और नवीनतम प्रौद्योगिकी से रूबरू होना चाहते हैं। इस दिशा में उचित निर्णय लेने के लिये हम लगातार विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर रहे हैं। हमें उम्मी है कि आने वाले दिनों में आप हमें सफलता की नए सोपान पर देखने में कामयाब होंगे और उस समय हम दूसरे निवेशकों से वार्ता करने की स्थिति में होंगे।’’

एक्स बताती हैं, ‘‘प्रारंभ में हम बैंगलोर तक ही खुद को सीमित रखना चाहते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस तरह से देश के अन्य हिस्सों में विस्तार करने से पहले हम बाजार के अलावा उपयोगकर्ताओं ओर रास्ते में आने वाली चुनौतियों के बारे में जानने में कामयाब होंगे।’’ बातचीत के अंत में वे कहती हैं, ‘‘फिलहाल तो हम अपनी नौकरी और इस काम के बीच सामंजस्य बैठाने के प्रयास कर रहे हैं! कायदे से तो इस काम को शुरू करने से पहले हमें कुछ खाका तैयार करत हुए इसमें कुछ निवेश करना चाहिये था लेकिन एक दिन बैठे-बिठाये यह विचार आया और हमनें इसे मूर्त रूप दे दिया। लेकिन उसके बाद से चीजें काफी तेजी से बदल रही है।’’

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

Stories by Nishant Goel