अपने अनोखे स्टार्टअप्स से भारत की तस्वीर बदल रहे हैं ये युवा

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‘हमारे युवा क्या चाहते हैं, यह एक बहुत बड़ा प्रश्न रहा है। इसी क्रम में ‘योरस्टोरी’ ने कुछ प्रतिभाशाली युवाओं से बात की, जो हाल में खुद का व्यवसाय कर रहे हैं और इस विषय पर उनकी राय जानने की कोशिश की...

युवा उद्यमी
युवा उद्यमी
17 वर्षीय अयान ने ‘आर्टीसन’ नाम से एक क्लोदिंग ब्रैंड शुरू किया। अयान ने स्कूलों, ऑफिसों और कई कंपनियों से उनके हैंडलूम उत्पादों के प्रचार के लिए संपर्क किया।

भारत में युवा आबादी का प्रतिशत पूरी दुनिया की अपेक्षा सर्वाधिक है। हमारे देश में 35 करोड़ से भी ज्यादा लोग 10 से 24 साल के आयु वर्ग में आते हैं। स्वामी विवेकानंद की जयंती पर हम राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं और बीते 12 जनवरी को हमने 33वां युवा दिवस मनाया। हमारे युवा क्या चाहते हैं, यह एक बहुत बड़ा प्रश्न रहा है। इसी क्रम में ‘योरस्टोरी’ ने कुछ प्रतिभाशाली युवाओं से बात की, जो हाल में खुद का व्यवसाय कर रहे हैं और इस विषय पर उनकी राय जानने की कोशिश की।

कभी न मानो हार

नमन गुप्ता और विशाल कनेट ने 2016 में नोएडा से अपने कोड एंटरप्राइज की शुरूआत की थी, जो हाल में 20 राज्यों में काम कर रहा है। यह अपनी तरह की अनोखी कंपनी है, जो पीने के बाद फेंकी हुई सिगरेट को रीसाइकल करके उससे आकर्षक प्रोडक्ट तैयार करती है। 23 वर्षीय नमन और 26 वर्षीय विशाल ने रिसर्च की और सिगरेट के वेस्ट में मौजूद पॉलिमर, बची हुई तंबाकू और पेपर के सही इस्तेमाल का तरीका इजात किया। जहां एक तरफ तंबाकू और कागज से जैविक खाद तैयार की जा सकती है, वहीं दूसरी ओर पॉलिमर के इस्तेमाल से कुशन, सॉफ्ट टॉय, की चेन और अन्य कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

दोनों ने बताया कि वह दिल्ली-एनसीआर से वाकिफ हैं और इसलिए उन्होंने यहीं से अपना काम शुरू किया। नमन ने बताया कि वे दोनों सिगरेट बेचने वालों के पास गए और उन्हें अपनी योजना के बारे में बताया। चुनौतियों का जिक्र करते हुए दोनों ने बताया कि कई बार सिगरेट इकट्ठा करने वाले डिब्बे ही चोरी हो गए या कई बार उनका इस्तेमाल ही नहीं हुआ। फिर भी दोनों ने अपना काम जारी रखा। हर 15 दिन में वे सिगरेट विक्रेताओं के पास जाकर तौल के हिसाब से इस्तेमाल हो चुकीं सिगरेट खरीदते थे और उसी हिसाब से पैसा देते थे।

इन दो दोस्तों ने अपने काम के प्रमोशन के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाया। हाल में कोड एंटरप्राइज 100 जिलों में 60 सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रही है, जो सिगरेट वेस्ट को इकट्ठा कर दिल्ली भेजते हैं और यहीं पर उनकी रीसाइकलिंग होती है।

जुनून को ही चुनें

हम बात कर रहे हैं वंदना विजय की, जिन्होंने तीन साल तक फेसबुक के साथ काम करने के बाद 30 साल की उम्र में ‘ऑफबीट ट्रैक्स’ की शुरूआत की। उनकी कंपनी भारत में प्रयोगशील और किफायती पर्यटन पर केंद्रित है। इस कंपनी की शुरूआत अप्रैल, 2016 में हुई, जो बहुत से ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर काम करती है।

अज्ञात की खोज का समय

फैशन डिजाइनिंग से ग्रैजुएशन करने वालीं वंद्या और रेखा को हमेशा ही विटेंज (ऐतिहासिक) और हाथ से बने उत्पादों से खास लगाव रहा है। दोनों ने मिलकर ‘इश्मा’ नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया, जो लुप्त होते क्राफ्ट को फिर से जिंदा करने और लोकप्रिय बनाने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही, इसका उद्देश्य है कि कारीगरों को बेहतर से बेहतर रोजगार का मौका मिल सके।

दोनों ने 2014 में हैदराबाद के राष्ट्रीय फैशन टेक्नॉलजी संस्थान (एनआईएफटी, हैदराबाद) से ग्रैजुएशन पूरा किया और इसके बाद 2016 में बतौर लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप रजिस्ट्रेशन कराया। वंद्या ने बताया कि अंतिम वर्ष में ही उन्होंने इस आइडिया पर विचार करना शुरू कर दिया था। दोनों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के गांवों में घूमे और वहां के स्थानीय कलाकारों के साथ समय बिताकर उनके रहन-सहन और जरूरतों को समझा। उन्होंने पाया कि आर्थिक जरूरतों के चलते कारीगरों के बच्चे, कला को आगे बढ़ाने से झिझकते हैं। रेखा का कहना है कि आदमी को संजने-संवरने का शौक हमेशा रहेगा और ऐसे में ज्वैलरी की मांग हमेशा बनी रहेगी। रेखा बताती हैं कि इसलिए ही उन्होंने ज्वैलरी से शुरूआत की। हाल में इश्मा कंपनी चार अलग-अलग कलाकार परिवारों के साथ मिलकर काम कर रही है।

पढ़ें और प्रेरणा लें

लगभग हर युवा की तरह अयान भट्टाचार्य को भी विदेशी ब्रैंड्स का काफी शौक था, लेकिन सिलाई-बुनाई का काम करने करने वाले कारीगरों की मामूली आय को देखते हुए, अयान ने इन कारीगरों के लिए कुछ बेहतर करने के बारे में सोचा। 17 वर्षीय अयान ने ‘आर्टीसन’ नाम से एक क्लोदिंग ब्रैंड शुरू किया। अयान ने स्कूलों, ऑफिसों और कई कंपनियों से उनके हैंडलूम उत्पादों के प्रचार के लिए संपर्क किया।

अयान कहते हैं कि उनकी अभी तक की यात्रा ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है। अयान ने अपने इस ब्रैंड में काफी निवेश किया है। वह सोशल मीडिया के जरिए इसका प्रचार कर रहे हैं। अयान की कंपनी पांच बुनकरों के साथ मिलकर काम कर रही है, जो किफायती दामों पर डिजाइनर स्कार्व बेच रही है और इन बुनकरों की आय लगभग दोगुनी हो चुकी है।

क्या है इन उदाहरणों का निचोड़?

खुद का व्यवसाय शुरू करने वालों के कई उदाहरण ऐसे हैं, जो साबित करते हैं कि उम्र मायने नहीं रखती है। आपके अंदर सिर्फ जुनून होना चाहिए। छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन कुछ नया और ऐसा काम कीजिए, जो समाज की बेहतरी के लिए हो। हमारा युवा इस ही अवधारणा पर चल रहा है।

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