केसर की क्यारियों में स्टार्टअप का बीज बोती तबिश हबीब

जब पिछले साल जुलाई में कश्मीर के ज्यादातर युवा हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने पर मार्च निकालने में व्यस्त थे, घाटी की ये होनहार बेटी कश्मीर को स्टार्टअप हब बनाने का सपना देख रही थी।

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कोई आईएएस में टॉप कर रहा है तो कोई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने गांव अपने शहर को नई पहचान दे रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं उस युवा महिला उद्यमी के बारे में जिन्होंने अभी तक अपनी ज़िंदगी के सिर्फ 26 बसंत ही देखे हैं और जज़्बा है कश्मीर की वादियों में कई दहाईयों से गायब बसंत को फिर से वापिस बुलाने का। नहीं जानते, तो हम मिलवाते हैं आपको  तबिश हबीब से जिनकी कहानी अपने आप में एक अनोखा असर छोड़ती है... 

तबिश हबीब
तबिश हबीब
पेशे से फोटोग्राफर और ग्राफिक डिजाइनर तबिश हबीब एक नये आइडिया के साथ घाटी के युवाओं से रूबरू हुई हैं। काबिले गौर है कि जब पिछले साल जुलाई में कश्मीर के ज्यादातर युवा हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने पर मार्च निकालने में व्यस्त थे, घाटी की यह होनहार बेटी कश्मीर को स्टार्टअप हब बनाने का सपना देख रही थी।

फिजाओं में घुली बारूद की गंध, लहू में नहाई केसर की क्यारियों और भारत विरोध की घृणास्पद आवाजों के दरम्यान घाटी में कुछ ऐसा भी घटित हो रहा है, जो अशांति, अराजकता और अनिश्चितता के दरम्यान भी बदलाव की उम्मीद को रवानी बख्श रहा है। उन्माद के सैलाब के बीच यहां का युवा तेजी से आगे बढ़ रहा है। कभी कोई आईएएस में टॉप कर रहा तो कोई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीरियत को नई पहचान दे रहा है। यहां बात हो रही है युवा महिला उद्यमी तबिश हबीब की, जिन्होंने अभी अपनी जिंदगी के सिर्फ 26 बसंत देखे हैं, लेकिन जज़्बा है कश्मीर में कई दहाइयों से गायब बसंत के मौसम को फिर से वापस बुलाने का। अहद है विनाश के दौर में विकास के बीज बोने की। पेशे से फोटोग्राफर और ग्राफिक डिजाइनर तबिश हबीब एक नये आइडिया के साथ घाटी के युवाओं से रूबरू हुई हैं।

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काबिले गौर है, कि जब पिछले साल जुलाई में कश्मीर के ज्यादातर युवा हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने पर मार्च निकालने में व्यस्त थे, घाटी की ये होनहार बेटी कश्मीर को स्टार्टअप हब बनाने का सपना देख रही थी। अपने इसी नवाचारी विचार को तबिश ने 05 मार्च को श्रीनगर में पहला को-वर्किंग स्पेस थिंकपॉड लॉन्च कर अमलीजामा पहना दिया। तबिश हबीब कहती हैं, कि 'हम रेग्युलर बिजनेस लोन प्रोवाइड कराने वाले बैंकों के बजाय अपने स्टार्टअप के लिए नए इंवेस्टर्स की तलाश में लगे हैं। यह आइडिया घाटी के लिए एकदम नया है। हम अपने इस सेंटर को केवल को-वर्किंग स्पेस के तौर पर रन नहीं करना चाहते, बल्कि युवाओं को इंस्पायर करने वाले एक प्रेरक के रूप में डिवेलप करना चाहते हैं। ताकि वह यहां आएं, बैठें और बिजनेस आइडिया शेयर करें।'

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ऐसा नहीं कि तबिश कश्मीर के हालात और चुनौतियों से ना-वाकिफ हैं। वह कहती हैं, कि कुछ भी नया स्थापित करना अपने आप में एक जोखिमपूर्ण काम है, कश्मीर जैसे नाजुक राज्य में जोखिम हमेशा को दोगुना बढ़ जाता है। लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती है लोगों से प्रतिस्पर्धा करना और आपकी कंपनी के लिए बाजार में हिस्सेदारी लेना। फिर भी, हम हालातों के आगे सरेंडर तो नहीं कर सकते।

हबीब बताती हैं, कि अपने बिजनेस प्लान की सफलता को लेकर मैं उस वक्त आश्वस्त हो गई, जब एक ही दिन में मेरे पास स्पेस के लिए 86 एप्लिकेशंस आईं। अभी थिंकपॉड में 36 वर्क स्टेशन के साथ ही अलग मीटिंग हॉल और कैफेटेरिया है, लेकिन आने वाले वक्त में हबीब यहां एक लाइब्रेरी भी शुरू करना चाहती हैं।

संगीनों के साये में पलते कश्मीरी समाज में बदलाव की बादे सबा तबिश ने केसर की क्यारियों में स्टार्टअप का एक सपना बो दिया है। उम्मीद है कि ये बीज एक दिन दरख्त जरूर बनेंगे।

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लेखक / पत्रकार

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